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सावधान! बच्चों को पागल बना सकता है ''ऑटिज्म'', जानें इसके बारे में सब कुछ

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस: ऑटिज्म एक ऐसी समस्या है, जिससे ग्रसित होने के कारण लोगों में व्यवहार से जुड़ी व अन्य कई तरह की समस्याएं होती हैं। शोर-शराबे वाली जगहों पर रहने वालों के बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी जगहों पर रहने वाले बच्चों में दो गुना तक ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।

सावधान! बच्चों को पागल बना सकता है

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर हम आपको ऑटिज्म से जुड़ी सभी बातें बताने जा रहे हैं। बता दें कि विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2 अप्रैल को मनाया जाता है। दरअसल, ऑटिज्म एक ऐसी समस्या है, जिससे ग्रसित होने के कारण लोगों में व्यवहार से जुड़ी व अन्य कई तरह की समस्याएं होती हैं।

एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. अमित आर्या के अनुसार शोर-शराबे वाली जगहों पर रहने वालों के बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी जगहों पर रहने वाले बच्चों में दो गुना तक ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।

ऑटिज्म क्या है

ऑटिज्म को अन्य भाषा में स्वलीनता भी कहा जाता है। यह एक तरह की मानसिक बीमारी है। बच्चे की इस बीमारी से ज्यादातर ग्रसित होते हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप में किसी ख्यालों में खोए रहते हैं। इसके अलावा उन बच्चों को बाकी लोगों के साथ उठना-बैठना अच्छा नहीं लगता। वह सामाजिक तौर पर सबसे अलग-अलग रहते हैं। ऐसे बच्चे किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं और साथ ही दूसरे लोगों से बात करने से हिचकिचाते हैं।

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ऑटिज्म के लक्षण

  • ऑटिज्म ज्यादातर बच्चों में होता है।
  • इसके शुरुआती लक्षण सामान्यतौर पर 2-3 साल के बच्चों में नजर आ सकते हैं।
  • जल्द इलाज होने पर इस समस्या से जल्द ही निजात मिल सकती है।
  • ऑटिज्म से ग्रसित लोगों में सामाजिकता का अभाव होता है।
  • साथ ही ऐसे लोगों में में पुनरावृत्ति व्यवहार की भी दिक्कत होती है।
  • इसके अलावा ऑटिज्म में ग्रस्त लोगों को बोलने और इशारों को न समझ पाने की भी समस्या होती है।
  • ऑटिज्म पर काबू पाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि शुरुआती लेवल पर अच्छे से देखभाल की जानी चाहिए।

ऑटिज्म के कारण

ऑटिज्म होने के कुछ प्रमुख कारणों में से शामिल है कि यह समस्या जेनेटिक हो सकती है या फिर इस समस्या के लिए पर्यावरण संबंधी कुछ कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

भारत में ऑटिज्म

  • रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2017 में दस लाख लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे।
  • देशभर में हर 68 में से एक बच्चा ऑटिज्म की समस्या से जूझ रहा है।
  • ऑटिज्म के 20 प्रतिशत केसेस का कारण जेनेटिक रहा है।
  • इसके अलावा बाकी 80 प्रतिशत केसेस के लिए पर्यावरण वंशानुगत जिम्मेदार रहे हैं।
  • भारत में देखे गए कई केसेस में 12-13 महीने के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण पाए गए हैं।
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