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World Alzheimer Day 2018: अगर आप भी हैं भूलने की आदत से परेशान, करें ये छोटा सा काम

आमतौर पर ओल्ड एज में होने वाला रोग अल्जाइमर अब कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। हालांकि यह रोग दिमाग से जुड़ा है लेकिन लाइफस्टाइल को सही रखकर,न्यूट्रीशस डाइट लेने और पॉजिटिव-एक्टिव रहकर इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। यहां हम आपको बता रहे हैं अल्जाइमर से जुड़ी बहुत उपयोगी जानकारियां।

World Alzheimer Day 2018: अगर आप भी हैं भूलने की आदत से परेशान, करें ये छोटा सा काम

आमतौर पर ओल्ड एज में होने वाला रोग अल्जाइमर अब कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। हालांकि यह रोग दिमाग से जुड़ा है लेकिन लाइफस्टाइल को सही रखकर,न्यूट्रीशस डाइट लेने और पॉजिटिव-एक्टिव रहकर इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। यहां हम आपको बता रहे हैं अल्जाइमर से जुड़ी बहुत उपयोगी जानकारियां।

एक सर्वे में पाया गया है कि पूरी दुनिया में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं। यह बीमारी अब केवल वृद्ध लोगों तक ही सीमित नहीं रही बल्कि यह अब बच्चों में भी देखी जा रही है।

अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है,जिसमें पेशेंट की स्मरण शक्ति क्षीण होने लगती है। व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पीड़ित में चिड़चिड़ापन और शक करने की आदत बढ़ती जाती है। अल्जाइमर के प्रति जागरूकता के लिए पूरी दुनिया में 21 सितंबर को ‘वर्ल्ड अल्जाइमर डे’ मनाया जाता है।

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प्रमुख लक्षण

अल्जाइमर रोग के प्रमुख लक्षणों के बारे में नई दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजुल अग्रवाल बताते हैं-

1.अल्जाइमर से पीड़ित पेशेंट रूटीन काम करने में भी परेशानी महसूस करता है। अगर किसी से बात करने या गेम्स खेलने में भी दिक्कत होती है तो आपको अल्जाइमर के लिए चेकअप करने की जरूरत है।

2.अल्जाइमर पेशेंट में निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। साथ ही वह चीजों को इधर-उधर रखकर भूल जाता है।

3.किसी बात को लेकर ज्यादा चिंता या अवसाद की स्थिति में चले जाने से आप इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।

4.अकसर कुछ बातें भूलना सामान्य बात है, लेकिन अगर आप प्रत्येक छोटी से छोटी बात भी भूल जाते हैं तो इसका मतलब है कि आप अल्जाइमर की प्रारंभिक स्टेज में आ चुके हैं।

5.अल्जाइमर से पीड़ित रोगी शब्द भी भूलने लगता है, जिससे बातचीत में अटकने या शब्दों को लिखने में अस्पष्टता आ जाती है।

6.अल्जाइमर पेशेंट्स अपने घर के आस-पास की गलियों, रास्तों को लेकर भी भ्रम में रहता है।

7.इस बीमारी से पीड़ित मरीज के स्वभाव में तेजी से बदलाव दिखाई देता है। जैसे-अचानक रोने या गुस्सा करने या हंसने लग जाता है। बेहद उलझनपूर्ण, संदेह करने वाला, भयभीत या किसी परिजन पर अत्यधिक निर्भर बन जाता है।

8.अल्जाइमर पेशेंट बेहद निष्क्रिय या टीवी के सामने घंटों बैठे रहते हैं। इसके अलावा पीड़ित को नींद अधिक आती है और सामान्य काम-काज करने में भी दिक्कत होती है।

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रोग के चरण

अल्जाइमर रोग धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाता है। इसके तीन चरण होते हैं। इस बारे में पीएसआरआई हॉस्पिटल के न्यूरोसाइंसेज के चेयरमैन डॉ. शमशेर द्विवेदी बताते हैं-

प्रारंभिक चरण में रोगी अपने दोस्तों और अन्य व्यक्तियों को पहचान सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी रोगी को ऐसा लगने लगता है कि वह कुछ चीजों को भूल रहा हैं। उसकी याददाश्त में कमी आने लगती है।

रोग का दूसरा यानी मध्य चरण आमतौर पर कई सालों तक रहता है। जैसे-जैसे रोगी की उम्र बढ़ती जाती है, साथ-साथ उसकी बीमारी भी बढ़ती जाती है। इसलिए बीमार व्यक्ति की देखभाल की ज्यादा जरूत होती है।

इस रोग के अंतिम चरण में पेशेंट अपनी गतिविधियों को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। यहां तक कि अपने दर्द के बारे में बताने में भी बहुत ज्यादा मुश्किल होती है। ऐसे में उस व्यक्ति को अपनी दिनचर्या के लिए पूरी तरह से दूसरे व्यक्ति की सहायता लेनी पड़ती है।

संभावना-बचाव

अल्जाइमर होने की संभावना और इसके बचाव के बारे में धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं,

यह रोग नॉर्मली ओल्ड एज में होता है लेकिन खान-पान और जीवनशैली के परिवर्तनों के कारण यह समस्या अब युवाओं और मध्य वय के लोगों में भी हो रही है। ऐसे में अगर आपको अल्जाइमर के कोई भी लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

इससे बचाव और पेशेंट को राहत देने के लिए कुछ बातों पर अमल करना फायदेमंद हो सकता है।

1.नियमित व्यायाम करें।

2.पौष्टिक भोजन करें।

3.पेशेंट को सक्रिय और सकारात्मक रखने का प्रयास करें।

4.पेशेंट को अवसाद (डिप्रेशन) से बचाएं।

5.पेशेंट को अकेला न छोड़ें।

6.पेशेंट को लोगों के निरंतर संपर्क में रखें, सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में भाग दिलाते रहें। इससे उसकी स्मरणशक्ति बनी रहेगी जो इस रोग का मुख्य प्रभाव है।

7.यदि रोगी को रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग है तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें।

8.पेशेंट को तंबाकू,शराब जैसे नशे से मुक्त रखें।

रोग से जुड़े तथ्य

1.अल्जाइमर एक आनुवांशिक रोग है, यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता है।

2.संयुक्त राज्य अमेरिका में बीमारियों से होने वाली कुल मौतों में छठा प्रमुख कारण अल्जाइमर है।

3.इस रोग पर अनेक रिसर्च हो रहे हैं लेकिन फिलहाल इसे पूरी तरह ठीक करना मुमकिन नहीं हो पाया है। डॉक्टर्स इस बीमारी की रोकथाम के लिए उपचार ढूंढ़ रहे हैं। इसलिए सावधानी बरतना और इसका प्रभाव कम करने के उपाय अपनाना ही एक विकल्प है।

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