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इन 5 संकेतों से जानें कहीं आपको तो नहीं है AIDS, ये हैं इसके लक्षण और उपचार

1 दिसंबर 2018 को दुनिया में एड्स दिवस को हर साल की तरह मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह है लोगों में HIV एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना। एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि इससे पीड़ित व्यक्ति का शरीर प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाता है, वो संक्रामक बीमारियों के वायरस(जीवाणु और विषाणु) से लड़ने की शक्ति खो देता है। क्योंकि एच.आई.वी का वायरस रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर हमला करता है।

इन 5 संकेतों से जानें कहीं आपको तो नहीं है AIDS, ये हैं इसके लक्षण और उपचार

1 दिसंबर 2018 को दुनिया में एड्स दिवस को हर साल की तरह मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह है लोगों में HIV एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना। एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि इससे पीड़ित व्यक्ति का शरीर प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाता है, वो संक्रामक बीमारियों के वायरस(जीवाणु और विषाणु) से लड़ने की शक्ति खो देता है। क्योंकि एच.आई.वी का वायरस रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर हमला करता है।


एड्स से बचने के लिए सबसे जरूरी है उसके बारे में पूरी जानकारी होना। क्योंकि दुनिया में इससे जुड़ी भ्रांतिया फैली हुई है। जिससे लोग इसे एक खतरनाक बीमारी मान लेते हैं और HIV से पीड़ित व्यक्ति से एक अछूत जैसा व्यवहार करने लगते हैं। इसलिए आज हम आपको एड्स से जुड़ी सारी जानकारी यानि लक्षण और संकेत, कारण और उपचार बता रहे हैं।

एड्स के लक्षण और संकेत


एड्स के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि इसकी शुरुआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्‍यक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है। इसीलिए इसके शुरूआती लक्षणों के बारे में पता होना बेहद जरूरी है।

1. सूखी खांसीअगर आपको लंबे समय तक सूखी खांसी यानि मुंह में हमेशा कफ आने की शिकायत रहती है। मुंह का स्‍वाद खराब रहता है, तो ऐसे में एक बार एच आई वी टेस्‍ट जरूर करवाएं।

2. मसल्‍स में खिंचावअगर बिना किसी भारी काम या शारीरिक श्रम के बार-बार आपकी मसल्स(मांसपेशियां) में खिंचाव या अकड़न महसूस करते हैं, तो ये भी एचआईवी एक लक्षण हो सकता है।


3. बार-बार बुखार आना आमतौर पर लोगों को मौसम के बदलने पर बुखार आने की शिकायत होती है, लेकिन अगर आपको बिना मौसम के बदले ही बहुत जल्दी-जल्दी बुखार आने लगे। तो थोड़ा सजग हो जाएं और एक बार एचआईवी का टेस्ट जरूर करवा लें।


4. सिर और जोड़ों में दर्द व सूजनअगर आपको बिना किसी तनाव के ही रोजाना सिरदर्द के साथ ही बढ़ती उम्र में होने वाले जोड़ो में दर्द और सूजन की परेशानी रहती है, तो ऐसे में आप डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


5. दिन भर थकान महसूस होनाअगर आपको बिना ज्यादा काम किए है कई दिनों से लगातार शरीर में थकान महसूस हो रही है, तो थोड़ा सचेत हो जाइए, क्योंकि शारीरिक कमजोरी होना एड्स का शुरुआती लक्षण हो सकता है।


एड्स के कारण


1. असुरक्षित यौन संबंध अगर आप बार-बार बिना किसी प्रोट्क्शन के यौन संबंध बनाते हैं, तो ये आपके लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। क्योंकि इससे आपको एड्स होने का खतरा बढ़ जाता है।

2. सिंरिंज के दुबारा इस्तेमालआपके शरीर में एचआईवी का वायरस ब्लड टेस्ट या इंजेक्शन लगने पर इस्तेमाल होने वाली सिंरिंज के बार-बार इस्तेमाल से भी पहुंच सकता है।


3 इंजेक्शन से ड्रग्स लेने पर आपके शरीर में एचआईवी का वायरस ड्रग्स लेने वाले लोगों में भी होने की सबसे ज्यादा आशंका होती है, क्योंकि वो भी सिंरिंज के जरिए ही ड्रग्स का सेवन करते हैं।


4. प्रेग्नेंसी के वक्त अगर कोई प्रेग्नेंट महिला एचआईवी से पीड़ित है, तो ऐसे में उसके शरीर का वायरस से उसके अजन्मे बच्चे में इस वायरस के होने का खतरा बढ़ जाता है।


एड्स के उपचार और बचाव


1. सुरक्षित यौन संबंधजब भी आप यौन संबंध बनाने के बारे में सोचें, तो उससे पहले उससे जुड़ी सारी सावधानियों को ध्यान में रखें और हमेशा ही कंडोम का इस्तेमाल करते हुए ही यौन संबंध बनाएं।


2. ब्लड टेस्ट के लिए हमेशा नई सिरिंज का करें इस्तेमालजब भी आप कोई ब्लड टेस्ट या इंजेक्शन लगवाएं, तो ये कोशिश करें कि हमेशा नई ही सिरिंज का ही इस्तेमाल किया जाए, इससे आप एचआईवी के खतरे को खुद से आसानी से दूर रख सकते है।


3. ड्रग्स से करें परहेज अगर आप एड्स से बचना चाहते हैं, तो किसी भी तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।


4. हेल्दी फूड खाना अगर आप एचआईवी से पीड़ित हैं, या इस बीमारी की शुरूआती स्टेज पर हैं, तो ऐसे में हमेशा हेल्दी फूड (संतुलित भोजन) का ही सेवन करें । इससे आपको अंदरूनी रूप से शरीर को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा हाइजीन का भी बेहद ध्यान रखना चाहिए।

5. दवाओं का सही समय पर सेवन करनाअगर आपको इस बीमारी से बचना है, तो सबसे पहले लगातार बुखार आने, खांसी, जोड़ो में दर्द आदि लक्षणों के दिखाई देने पर दवाईयों का सेवन नियमित रूप से सेवन करें। इसके साथ ही जरूरी परहेज को जारी रखें।

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