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वर्ल्ड एड्स डेः एड्स के ये लक्षण दिखाई दें तो ऐसे बरतें सावधानी

जानकारी के अभाव में सावधानी न बरतने पर संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है।

वर्ल्ड एड्स डेः एड्स के ये लक्षण दिखाई दें तो ऐसे बरतें सावधानी
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नई दिल्ली. आज पूरे विश्व में तकरीबन 37 मिलियन लोग एड्स से जूझ रहे हैं। वहीं भारत में भी लगभग 2.1 मिलियन लोग इससे पीड़ित हैं।लाइलाज होने के कारण आज पूरे विश्व में एड्स सबसे गंभीर समस्या बन गई है। यह शरीर में एचआइवी नामक वायरस के ज्वारा संक्रमण से होती है। यह वायरस शरीर में मौजूद टी कोशिकाओं और मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे उन्हे नष्ट कर देता है।
कुछ समय बाद ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से भी अपना बचाव नहीं कर पाता है। और तरह-तरह के संक्रमण से ग्रसित होने लगता है, एचआइवी वायरस के अंतिम चरण में पहुंचने पर यह एड्स रोग का रूप लेता है। जानकारी के अभाव में सावधानी न बरतने पर संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है। सबसे दिमाग में एक ही सवाल होता है कि एड्स इंफेक्शन आखिर होता कैसे हैं? तो चलिए आज आपको एड्स से संबंधित सारी बातों से रू-ब-रू कराते हैं..
ऐसे होता है इंफेक्शन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एड्स मुख्यत: एचआइवी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने, इंजेक्शन के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई सूई को फ्रयोग में लाने से एचआइवी संक्रमण हो जाता है। इसके अलाव एचआइवी पीड़ित महिला द्वारा गर्भधारण करने पर नवजात शिशु के संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है। इस विषाणु से संक्रमित व्यक्ति के अंग प्रत्यारोपण करने से भी एचआइवी इंफेक्शन हो जाता है।
HIV के लक्षण
- गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियां हो जाती हैं।
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है।
- लगातार कई-कई हफ्ते अतिसार रहने लगता है।
- कई हफ्ते खांसी बनी रहती है।
- लगातार कई हफ्ते बुखार रहता है।
-अकारण शरीर का वजन घटने लगता है।
- मुंह में घाव हो जाते हैं।
स्किन पर दर्द भरे और खुजली वाले चकते हो जाते हैं।
ऐसे बरतें सावधानी
- सुरक्षित यौन संबंध के लिए सजग रहें।
- हमेशा जीवाणुरहित या जिस्पीजेबल सिरिंज का ही उपयोग इंडेक्शन के रूप में करें।
-एचआइवी संक्रमित महिला गर्भधारण के दौरान उनके खून में संक्रमण की मात्रा को कम करने वाली दवाइयां नियमित लें।ताकि उनके आने वाले नवजात शिशु को संक्रमण से बचाया जा सके। इससे जन्म के बाद बच्चे का इलाज कराने में भी मदद मिलेगी।
- विशेषज्ञों की सलाह पर लाइफ क्वालिटी अच्छी रखें।
- संक्रमित व्यक्ति एंटीरेट्रोवायरल दवाइयां लें ताकि शुरुआती चरण में ही इसकी रोकथाम की जा सके।
-इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए हेल्दी और संतुलित भोजन का सेवन करें।
- बगैर डॉक्टर की सलाह के दवाइयों के इस्तेमाल से बचें।
- संक्रमण के कारण वजन में आई कमी को दूर करने का प्रयास करें।
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