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इन 5 खास संकेतों को गलती से भी न करें इग्नोर, हो सकती है अल्सर की बीमारी

आपने अक्सर लोगों को पेट दर्द और गैस बनने की परेशानी से जूझते हुए देखा होगा। वैसे तो पेट में बनने वाली गैस को कुछ दवाईयों और घरेलू उपचारों से दूर किया जा सकता हैं, लेकिन कई बार ये छोटी सी दिखने वाली बीमारी लापरवाही की वजह से एक बड़ी और गंभीर बीमारी, पेट में अल्सर का रूप ले लेती है।

इन 5 खास संकेतों को गलती से भी न करें इग्नोर, हो सकती है अल्सर की बीमारी

आपने अक्सर लोगों को पेट दर्द और गैस बनने की परेशानी से जूझते हुए देखा होगा। वैसे तो पेट में बनने वाली गैस को कुछ दवाईयों और घरेलू उपचारों से दूर किया जा सकता हैं, लेकिन कई बार ये छोटी सी दिखने वाली बीमारी लापरवाही की वजह से एक बड़ी और गंभीर बीमारी, पेट में अल्सर का रूप ले लेती है।

इसलिए आज हम आपको पेट में अल्सर के कारण, लक्षण और उसके उपचार बता रहे हैं। जिससे आप अपने में कुछ बदलाव करके इस बीमारी को होने से पहले ही मात दे सकें।

पेट में अल्सर के कारण :

1. अनियमित दिनचर्या - आज के दौर में लोगों के गलत समय पर खाने-पीने और सोने की आदतों की वजह से उन्हें कई सारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इस बिगड़ी दिनचर्या का सबसे ज्यादा परेशानी हमारे पेट को उठानी पड़ती है। जिनमें पेट खराब होना, पेट में दर्द होना,गैस बनना आदि बीमारी कॉमन हो गई हैं।

2. मसालेदार भोजन करना - कई बार आपके मसालेदार भोजन करने के बाद आपको पेट में जलन और खट्टी डकारों जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है, लेकिन अगर ये रूटीन लगातार लंबे समय तक चलता रहे तो ये पेट में अल्सर की बीमारी भी बन सकता है।

3. मानसिक तनाव - कहते हैं जैसा मन, वैसा तन, ये बात सौ फीसदी सच है। अगर आप लंबे समय तक मानसिक तनाव की स्थिति से गुजरते हैं तो उसका असर आपके शरीर के साथ पेट पर भी साफ तौर पर देखा जा सकता है।

4. कैफीन उत्पादों का ज्यादा सेवन - दिन में खाली पेट या लगातार कई बार चाय या कॉफी का सेवन करना भी अपके पेट में गैस बनने और जलन के वजह बन सकती है जो कुछ समय बाद पेट में अल्सर का रूप ले सकती है।

5. सिगरेट और शराब का अधिक सेवन - अगर आप सिगरेट और शराब का लगातार सेवन करते हैं तो आपको पेट में अल्सर होने की खतरा बढ़ जाता है।

पेट में अल्सर के लक्षण :

1.आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनना - अल्‍सर होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होती है। जब हम खाते हैं तो आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है, जिससे भोजन का पाचन होता है। बदहजमी की वजह से कभी-कभी एसिड ऊपर की ओर आहार नली में चला जाता है, इससे जलन महसूस होती है।

इसका असर गले, दांत, सांस आदि पर पड़ने लगता है। आवाज भारी हो जाती है और मुंह में छाले पड़ जाते हैं। इस तरह की स्थितियों को एसिड रिफ्लक्स डिजीज कहा जाता है।

2.पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द- अल्‍सर होने पर पेट के ऊपरी हिस्‍से पर असहनीय दर्द होता है। खासकर खाने के बाद पेट में दर्द शुरू हो जाता है। खाली पेट रहने से भी दर्द होता है। इस स्थिति को गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं।

आहार नली के निचले हिस्से में छाले पड़ जाते हैं, कुछ मामलों में तो आहार नली में छिद्र भी हो जाता है। इससे आहार नली में तेज जलन होती है।

3.एसिडिटी रिफ्लेक्शन -अल्‍सर होने पर छाती के पास दर्द होता है। अगर दर्द छाती के पास हो तो इसे एसिडिटी रिफ्लेक्शन का असर समझना चाहिए। इससे दिल के दर्द का शक होता है।

दिल का दर्द छाती के ऊपरी हिस्से में होता है और कभी-कभी एसिडिटी की वजह से भी उसी जगह दर्द होता है, इसलिए इन दोनों स्थिति के बीच में बिना जांच के अंतर समझ पाना आसान नहीं है।

4.वजन कम होना - अल्‍सर के मरीजों का वजन बहुत तेजी से घटने लगता है। अल्‍सर होने पर मरीज खाने के प्रति उदासीन हो जाता है, जिसके कारण वजन कम होता है। खाना भी अच्‍छे से नही पच पाता जो वजन घटने का कारण है।

5.खून की उल्टी - उल्टी होना या उल्टी जैसा महसूस होना अल्सर का लक्षण माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में अक्‍सर मरीज को लगता है कि उलटी होने वाली है। लेकिन जब अल्‍सर बढ़ जाता है तो हालत और भी खराब हो सकती है। अल्‍सर बढ़ने पर तो खून की उलटी हो सकती है। ऐसे में स्टूल (मल) का रंग काला हो जाता है।

पेट में अल्सर के उपचार :

1. अगर आपके पेट या अमाशय में तेज दर्द हो,भूख कम लगे या तेजी से वजन में गिरावट आना, बार-बार गैस बनना और पेट फूलना जैसा महसूस करें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

2. रात को खाना खाने और सोने के बीच में कम से कम 2 घंटे का गैप जरूर करें।

3. अत्याधिक रसीले और तरल पदार्थो का सेवन करें।

4. मसालेदार भोजन करने से बचें।

5. कॉफी और कॉर्बोनाइड पेय पदार्थो का सेवन करने से बचें।

6. अल्सर की बीमारी ठीक न होने तक शराब का सेवन न करें।

7. फ्लैवनॉइड युक्त आहार का सेवन जरूर करें,जैसे सेब, लहसुन और प्याज खाएं।

8. पेट में अल्सर होने पर परहेज का सख्ती से पालन करें।

9. पेट में अल्सर होने पर एस्प्रिन और नॉनस्टेरॉइडल दवाई का ही सेवन करें।

10. भोजन करने से 1 घंटे पहले या बाद में पानी पीने से बचें।

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