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इस वजह से शिशु को 6 महीने से पहले ''पानी'' तक नहीं पिलाया जाता

कई बार लोग बच्चे को 6 महीने से पहले ही पानी पिलाना शुरू कर देते हैं, जो उसकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। मां के दूध में लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है और यही कारण है कि 6 महीने से पहले बच्चों को पानी नहीं दिया जाता है।

इस वजह से शिशु को 6 महीने से पहले

नवजात शिशु को 6 महीने तक सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। 6 महीने तक पानी तक नहीं पिलाना चाहिए। नवजात शिशु को 6 महीने से पहले पानी पिलाना घातक साबित हो सकता है।

कई बार लोग बच्चे को 6 महीने से पहले ही पानी पिलाना शुरू कर देते हैं, जो उसकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। मां के दूध में लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है और यही कारण है कि 6 महीने से पहले बच्चों को पानी नहीं दिया जाता है।

चाहे कितनी भी गर्मी क्यों न हो मां का दूध ही बच्चे की शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेट रखता है। कुछ रिसर्च से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि ब्रेस्टमिल्क न सिर्फ पानी की कमी को पूरा करता है, बल्कि दूसरे जरूरी न्यूट्रिएंट्स भी देता है।

शिशु को पानी पिलाने के नुकसान

  • 1 महीने से छोटे शिशु को पानी पिलाने से वजन कम हो सकता है।
  • शिशु को पानी पिलाने से पीलिया होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • शिशु को पानी पिलाने से ओरल वाटर इन्टॉक्सीकेशन हो सकता है।
  • शिशु को पानी पिलाने से वह मां के दूध से दूर हो जाते हैं, जो बच्चे की सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

कब पिलाना चाहिए पानी

  • जब शिशु 4 महीने का हो जाए हो तो उसे दिन में 1-2 बार दो से तीन चम्मच पानी पिलाया जा सकता है।
  • बच्चा जब सॉलिड फूड खाने लगे तो उसे पानी पिला सकते हैं।
  • 6 महीने के बाद बच्चे को मां का दूध के अलावा पानी व अन्य तरल पदार्थ पिला सकते हैं।
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