logo
Breaking

न्यूट्रीएंट्स से भरपूर हेल्दी फूड-पल्स, बनाएं आपको फिट एंड हेल्थी

पल्स यानी दाल को हेल्दी फूड माना जाता है।

न्यूट्रीएंट्स से भरपूर हेल्दी फूड-पल्स, बनाएं आपको फिट एंड हेल्थी
पल्स यानी दाल को हेल्दी फूड माना जाता है। इसके सेवन से हमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर सहित दूसरे कई न्यूट्रीशस एलिमेंट्स प्राप्त होते हैं। इसलिए हमें हर रोज अपनी डाइट में दालों को जरूर शामिल करना चाहिए। इससे हम कई बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।
सभी डॉक्टर्स और न्यूट्रीशनिस्ट्स का मानना है कि हेल्दी और एक्टिव बने रहने के लिए हमें रेग्युलर बैलेंस्ड डाइट की जरूरत होती है। हमारी डाइट तब तक बैलेंस्ड नहीं मानी जाती है, जब तक उसमें दालें शामिल नहीं होती हैं। खासकर वेजिटेरियन लोगों द्वारा ली जाने वाली डाइट। भारत में दो-तिहाई लोग वेजिटेरियन हैं। ऐसे में उनके लिए दालें और फलियां प्रोटीन प्राप्त करने का सबसे अच्छी सोर्स मानी जाती हैं। लेकिन समय की कमी के कारण जंकफूड पर बढ़ती निर्भरता ने हमारी थाली से दाल को गायब कर दिया है। फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, पिछले बीस वर्षो में हमारे देश में दाल का सेवन 30 प्रतिशत तक कम हुआ है, जबकि तेल का सेवन 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है। यह कंडीशन हेल्थ के लिहाज से सही नहीं है।
दाल के फायदे
दालें लेग्यूम (फलियां) फैमिली की मेंबर होती हैं। इनमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम होती है। साथ हीं आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन बी भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यही वजह है कि इसे हेल्दी फूड माना जाता है। दाल के रेग्युलर सेवन से मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, कैंसर आदि बीमारियों के होने की आशंका कम हो जाती है। जो लोग सप्ताह में चार या पांच बार दाल का सेवन करते हैं, उनमें उन लोगों की तुलना में, जो दाल नहीं खाते हैं, कोरोनरी हार्ट डिजीज होने का खतरा 22 प्रतिशत और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज होने का खतरा 11 प्रतिशत तक कम हो जाता है। असल में दाल के सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है। 2014 में हुए एक मेटा-एनालिसिस रिसर्च के अनुसार, तीन सप्ताह तक लगातार दाल खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर काफी कम हो जाता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। इतना ही नहीं, दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो होने के कारण इसके खाने के बाद पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इस वजह से भूख नियंत्रित रहती है और वजन कम करने में सहायता मिलती है। दालें हमारे इंटेस्टाइन में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया के बैलेंस को बनाए रखती हैं, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम दुरुस्त रहता है। कब्ज की शिकायत दूर होती है। ये डाइबिटीज पेशेंट के लिए भी फायदेमंद होती हंै। सेलिएक डिजीज के पेशेंट के लिए दाल, गेहूं का अच्छा विकल्प साबित होता है। इसमें ग्लुटन नहीं होता है, जिससे यह पचने में आसान होता है। साथ ही सेलिएक पेशेंट की प्रोटीन और फाइबर की जरूरत को भी पूरा करता है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, किन खास बातों पर रखें ध्यान-
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Share it
Top