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HEALTH TIPS: अगर सर्दियों में रहना है फिट, तो करे इन विटामिंस को HIT

सेहतमंद रहने के लिए जरुरी है विटामिनस्।

HEALTH TIPS: अगर सर्दियों में रहना है फिट, तो करे इन विटामिंस को HIT
नई दिल्ली. सर्दी का मौसम आते ही हमारे लिए यह बहुत ही जरुरी हो जोता है की खुद को सर्दा के प्रकोप से कैसे बचाया जाए। बदलता हुआ मौसम अपने साथ ना जाने कितनी ही बीमारियों को अपने साथ लाता है। प्रॉपर बॉडी फंक्शनिंग के लिए हमें कई तरह के न्यूट्रीएंट्स की जरूरत होती है। इनमें से कुछ का प्रोडक्शन तो खुद हमारी बॉडी करती है, जबकि कुछ को डाइट के जरिए लेने की जरूरत होती है। विटामिंस भी ऐसे ही न्यूट्रीएंट्स होते हैं, जो हमारे कई इंपॉर्टेंट बॉडी फंक्शंस जैसे प्रॉपर मेटाबॉलिज्म, स्किन और बोन की इंटेग्रिटी को मेंटेन करने, प्रॉपर विजन और इम्यून सिस्टम के प्रॉपर फंक्शनिंग के लिए बहुत जरूरी होते हैं। प्रोटीन, काबरेहाइड्रेट, फैट, मिनरल्स की तरह ही विटामिंस भी हमारे बॉडी के प्रॉपर फंक्शनिंग के लिए बेहद जरूरी हैं। इनकी कमी या अधिकता से हम कई तरह की बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसलिए अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में विटामिंस शामिल करना जरूरी है। जानते हैं, विटामिंस के बारे में कुछ इंपॉर्टेंट बातें।
क्या है विटामिन
विटामिन ऑर्गेनिक कंपाउंड होते हैं, जो खाद्य-पदाथरें में पाए जाते हैं। ये हमारे शरीर के प्रॉपर फंक्शनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूंकि इनका निर्माण हमारा शरीर नहीं करता है, इसलिए इन्हें अपनी डाइट के जरिए लेने की जरूरत होती है। ये विटामिन कई प्रकार के होते हैं।
विटामिन की कमी से होने वाली बीमारियां
विटामिन ए (रेटिनॉल) : इसकी कमी से रतौंधी (रिकेट्स), जेरोसिस कंजंक्टिवा, जेरोसिस कॉर्निया, बायोटॉट्स स्पॉट्स, कीरेटोमलेशिया और फॉलिक्यूलर हाइपरकीरेटोसिस आदि बीमारियां होती हैं।
विटामिन डी (7 डिहाइड्रो कोलेस्ट्रॉल) : इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स और कीरेटोमलेशिया, बड़ों में ऑस्टोपेनिया, ऑस्टियोपोरोसिस आदि समस्याएं हो जाती हैं।
विटामिन ई (टोकोफेरॉल) : इसकी कमी से रिप्रोडक्शन फेलियर, लीवर सिरोसिस आदि डिसऑर्डर होते हैं।
विटामिन के : इसकी कमी से हेमोरैजिक कंडिशन उत्पन्न होती है।
विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) : इसकी कमी से स्कर्वी नामक बीमारी होती है। इस बीमारी के शुरुआत में सिर्फ कमजोरी महसूस होती है। फिर उसके बाद हाथ-पैर की हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। जोड़ों में सूजन, टिश्यूज में हेमोरैज, मसूढ़ों से खून आना, दांतों का कमजोर होना आदि परेशानियां भी विटामिन सी की कमी के लक्षण होते हैं।
विटामिन बी कॉम्पलेक्स : विटामिन बी1 की कमी से बेरी-बेरी नामक रोग होता है। विटामिन2 की कमी से हमारी जीभ में स्वेलिंग आ जाती है, वह मुलायम हो जाता है और उसका रंग बदल जाता है। इस बीमारी को ग्लोसिटिस कहा जाता है। इसके अलावा, होंठ रूखे हो जाते हैं। इसकी कमी से बच्चों का बिहेवियर एब्नॉर्मल हो जाता है। विटामिन बी3 की कमी से पेलाग्रा नामक रोग होता है। ग्लोसिटिस, डायरिया और त्वचा संबंधी परेशानी (डर्मेटाइटिस) इसके प्रमुख लक्षण होते हैं। बी6 की कमी से एनीमिया (हाइपोक्रोमिक माइक्रोसिस्टिक एनीमिया), स्लीप डिस्टर्बेंस, इरिटेबिलिटी और डिप्रेशन की परेशानी होती है। वहीं विटामिन बी12 की कमी के कारण एनीमिया (प्रेनिशियस एनीमिया) की शिकायत हो जाती है।
बायोटिन : इसकी कमी बहुत कम होती है, क्योंकि हमारे शरीर को इसकी बहुत कम जरूरत होती है।
फोलिक एसिड : प्रेग्नेंसी के दौरान इसकी कमी से महिलाओं में मेगानोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है।
हाइपरविटामिनोसिस
बहुत ज्यादा मात्रा में विटामिन के सेवन से टॉक्सिक सिंपटम्स दिखाई देने लगते हैं। इसे विटामिनोसिस कहते हैं। आमतौर पर इस तरह की परेशानी ज्यादा विटामिन सप्लीमेंट्स लेने के कारण होती है। डाइटरी सोर्स से लिए गए विटामिंस से इस तरह की परेशानी कम ही देखने को मिलती है। सामान्य तौर पर अधिक मात्रा में वाटर सॉल्यूबल विटामिंस लेने से हाइपरविटामिनोसिस की प्रॉब्लम नहीं होती है, क्योंकि ये हमारे शरीर में बहुत ज्यादा मात्रा में स्टोर नहीं रहते हैं। डेली डाइट के द्वारा हम जो कुछ भी लेते हैं, उसी से शरीर की जरूरत पूरी हो जाती है।
विटामिन के कार्य
काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट की तुलना में हमारे शरीर को बहुत कम मात्रा में विटामिंस और मिनरल्स की आवश्यकता होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे नजरअंदाज किया जाए। मेटाबॉलिज्म के लिए विटामिंस बहुत जरूरी होते हैं। इसके कई बायोकेमिकल फंक्शंस होते हैं। इनमें से कई विटामिंस तो हारमोन की तरह काम करते हैं। मिनरल मेटाबॉलिज्म रेगुलेटर, सेल-टिश्यू ग्रोथ एंड डिफरेंशिएशन रेगुलेटर सहित कई काम विटामिंस के ही जिम्मे होते हैं। जहां विटामिन ए, सी और डी एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर काम करते हैं, वहीं विटामिन बी के बिना किसी भी मेटाबॉलिज्म में एंजाइम बतौर कैटेलिस्ट काम ही नहीं कर सकता है। इन सबके अलावा भी कई ऐसे कार्य हैं, जिनमें विटामिन बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, विटामिन के प्रकार -
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