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WHO के दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं रक्त दान, ईबोला के ईलाज की भी जागी उम्मीद

इबोला से पीड़ित व्यक्ति हो सकेंगे ठीक ।

WHO के दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं रक्त दान, ईबोला के ईलाज की  भी जागी उम्मीद
नई दिल्ली.इबोला वायरस की बीमारी से ठीक हो चुके मरीज का संपूर्ण रक्त अथवा सीरम प्रभावित मरीजों के लिए इस्तेमाल हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक नया दिशानिर्देश जारी किया है, जिसमें ठीक हो चुके मरीज के संपूर्ण रक्त अथवा प्लाज्मा के संकलन और इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी है। इसे इबोला डिजीज यानी ईवीडी के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.केके अग्रवाल ने बताया कि जिन मरीजों का ईवीडी का इलाज हुआ है और वे पुन: स्वस्थ हो रहे हैं, उन्हें भविष्य के मरीजों के लिए रक्तदान अथवा प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
जानलेवा वायरस के बारे में उन्होंने बताया कि चूंकि इबोला वायरस के लिए अब तक कोई विश्वसनीय इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस बीमारी से ठीक होकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे मरीजों का संपूर्ण रक्त लेकर अन्य पीड़ितों में इसका इस्तेमाल कर इसके परिणाम देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि एक छोटे से समूह पर इस्तेमाल किए गए इस तरीके के काफी संतोषजनक परिणाम सामने आया हैं। बता दें इलाज के इस सिद्धांत का कई अन्य संक्रामक बीमारियों के इलाज में भी इस्तेमाल होता आया है।
डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश में इसके सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। ईवीडी से पीड़ित हो चुके वे मरीज जो स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं, वे डिस्चार्ज होने के 28 दिनों के भीतर अपना संपूर्ण रक्त अथवा प्लाज्मा दानकर अन्य मरीजों की जान बचाने में मददगार हो सकते हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार इस तरह के रक्तदान के लिए सिर्फ उन्हीं मरीजों को फिट माना जा सकता है, जो डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार बीमारी से मुक्त पाए जाएंगे। दो बार ईबीओवी आरएनए तकनीक से जांच में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई हो। इन दोनों जांचों के लिए सैंपल 28 घंटे के अंतराल में लिया जाना चाहिए और दोनो ही रिपोर्ट नेगेटिव होनी चाहिए।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, इबोला से जुड़ी खास बातें -
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