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यहां अस्पतालों में नहीं घरों में ही करवाई जाती है डिलीवरी, जानें इसके पीछे की वजह

ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि गर्भवती महिला की डिलीवरी डॉक्टरों की देखरेख में अस्पतालों में हो तो अच्छा रहता है। महिला को डिलीवरी के वक्त अस्पताल ले जाया जाता है, जिससे मां और शिशु को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत का एक राज्य ऐसा है, जहां ज्यादातर डिलीवरी घरों में होती हैं।

यहां अस्पतालों में नहीं घरों में ही करवाई जाती है डिलीवरी, जानें इसके पीछे की वजह

ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि गर्भवती महिला की डिलीवरी डॉक्टरों की देखरेख में अस्पतालों में हो तो अच्छा रहता है। महिला को डिलीवरी के वक्त अस्पताल ले जाया जाता है, जिससे मां और शिशु को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत का एक राज्य ऐसा है, जहां ज्यादातर डिलीवरी घरों में होती हैं।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बात की पुष्टि हुई है कि ज्यादातर बच्चों की डिलीवरी घरों में होती है।

यह रिपोर्ट सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) ने पेश की है। भारत के सबसे बड़े राज्य के रूप में जाने जाने वाले उत्तर प्रदेश में अस्पतालों में डिलीवरी कम और घरों में ज्यादा होती है।

ये है कारण

एनडीटीवी की न्यूज रिपार्ट के मुताबिक SRS की रिपोर्ट में इसकी वजह के पीछे अनुमान लगाया गया है कि इसकी वजह या तो अस्पतालों की कमी है या फिर घर में डिलीवरी कराने की परंपरा है।

2014-16 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्युदर में 30 प्रतिशत तक की कमी आई है। इतना ही नहीं पूरे देश में औसतन मातृ मृत्युदर 22% है।

अन्य रिपोर्ट

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 में मातृ मृत्युदर 1,00,000 जीवित प्रसव में 556 मामले सामने आए थे और 2016 में 1,00,000 जीवित प्रसव में यह मामले घटकर 130 हो गए है। यानि बीते सालों में मातृ मृत्युदर में 77 प्रतिशत की कमी हुई है।

की गई सराहना

मातृ मृत्युदर में इस भारी कमी के लिए यूनिसेफ की भारत की नेशनल रिप्रेजेंटेटिव यास्मीन अली हक ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह भारत की शानदार सफलता है।

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