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World Heritage Day 2019 : खूबसूरत वादियों से घिरे 'चैल' में लें सर्दी का मजा, जानें कैसे पहुंचें और कहां ठहरें सब कुछ

World Heritage Day 2019 :- कुदरत की पनाह में सुकून की सैरगाह हिमाचल प्रदेश में कुछ ऐसे भी पर्यटन स्थल हैं, जो ज्यादा प्रसिद्ध तो नहीं हैं, लेकिन वहां की प्राकृतिक खूबसूरती बेमिसाल है। ऐसा ही एक पर्यटन स्थल है-चैल। चारों ओर खूबसूरत वादियों से घिरे चैल में आपको ऐसा सुकून मिलेगा, जिसे कभी भुला नहीं पाएंगे।

World Heritage Day 2019 : खूबसूरत वादियों से घिरे

World Heritage Day 2019 :- आमिर खान स्टारर फिल्म '3 इडियट्स' अगर आपने देखी है तो आपको याद होगा कि इस फिल्म में जब आमिर यानी रेंचो के दोस्त उसे ढूंढ़ते हुए शिमला के 'चांचड़ विला' में पहुंचते हैं तो उस भव्य घर की रौनक देख कर सिर्फ वे ही नहीं बल्कि दर्शक भी हैरान हो उठते हैं।

आपको बता दें कि यह 'चांचड़ विला' असल में चैल पैलेस है। जी हां, वही चैल पैलेस जिसे कभी पटियाला के महाराजा राजिंदर सिंह ने अपने आराम करने के लिए बनवाया और जिसे 1972 में हिमाचल पर्यटन ने खरीद कर एक हैरिटेज होटल में बदल दिया । हिमाचल प्रदेश की ढेरों खूबसूरत जगहों में से एक है चैल।

हिमाचल के शिमला, मनाली, कुल्लू, धर्मशाला जैसी अन्य लोकप्रिय पर्यटक स्थलों से अलग चैल में पर्यटकों की संख्या अधिक नहीं होती, इसकी वजह है यहां की शांति। देखा जाए तो यही इस जगह की सबसे बड़ी खासियत भी है, जिसे करीब से देखने, महसूस करने के लिए टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं।


इतिहास पर नजर

वर्ष 1876 से 1900 तक पटियाला के राजा रहे राजिंदर सिंह काफी शौकीन मिजाज थे। उनकी 365 पत्नियां थीं। वे क्रिकेट, हॉकी, पोलो खेलने के शौकीन थे। कार खरीदने वाले चंद पहले भारतीयों में से एक महाराजा राजिंदर सिंह के बारे में कहा जाता है कि अंग्रेजों ने उनके शिमला में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। तब उन्होंने चैल में उस जमीन पर यह महल बनवाया, जो अंग्रेजों ने ही उनके पूर्वजों को नेपाल से हुई लड़ाई में मदद करने पर दी थी।

दिलचस्प बात यह है कि चैल से शिमला दिखता है लेकिन शिमला से चैल नजर नहीं आता। इसलिए है खास सच तो यह है कि चैल में देखने लायक कोई प्रसिद्ध स्थल या स्मारक नहीं है। हां, कुदरत की पनाह में महसूस करने लायक बहुत कुछ है। यही वजह है कि यहां ज्यादातर वही लोग आते हैं, जिन्हें भाग-दौड़ भरी जिंदगी से अलग कुछ पल के सुकून की तलाश होती है। एकांत पसंद लोगों को यह जगह खूब पसंद आएगी, साथ ही परिवार के साथ वक्त बिताना भी सुखद अहसास होगा।


यहां एक क्रिकेट ग्राउंड है, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड कहा जाता है। महाराजा भूपिंदर सिंह क्रिकेट के दीवाने थे और उन्होंने ही इसे बनवाया था। कैंट एरिया में होने के कारण अब इसकी देखभाल आर्मी के जिम्मे है। यहां एक अश्विनी झरना है, जिस पर साधु पुल बना है। यहां पानी में रखे गए टेबल-कुर्सी पर बैठ कर खाना खाने का लुत्फ लिया जा सकता है।

यहां के सबसे बड़े आकर्षण के केंद्र चैल पैलेस को देखे बिना यहां का भ्रमण अधूरा ही रहता है। लेकिन इसके अंदर जाने के लिए टिकट लेना पड़ता है। यहां आने वाले ज्यादातर पर्यटक तो इस पैलेस होटल में ठहरने के लिए ही चैल आते हैं। इस पैलेस की साज-सज्जा बेहद आकर्षक है। इस पैलेस के विशाल गार्डन में चहलकदमी करने पर काफी सुकून मिलता है।

यहां की एक पहाड़ की चोटी पर एक काली मंदिर स्थित है, जहां से आस-पास का अद्भुत नजारा दिखता है। एक सिद्ध बाबा का मंदिर है। इसके बारे में कहा जाता है कि अपने सपने में एक संत के आने पर महाराजा भूपिंदर सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यहां एक गुरुद्वारा भी है, जो सन 1907 में तैयार हुआ था। खास बात यह है कि दूर से देखने पर यह किसी चर्च जैसा लगता है।





यहां से थोड़ी ही दूरी पर चैल वन्यजीव अभ्यारण्य भी है, जहां कई किस्म के जानवर, पक्षी और उड़ने वाली गिलहरी को देखा जा सकता है। इधर कुछ समय से ट्रैवल कंपनियों ने यहां पर एडवेंचर स्पोर्ट्स का आयोजन भी शुरू कर दिया है। यहां से कुफरी, सोलन, कंडाघाट और शिमला आसानी से जा सकते हैं।

कब जाएं

वैसे तो चैल जाने के लिए हर मौसम उपयुक्त है। पर्यटक गर्मियों में यहां की हल्की ठंड का मजा उठा सकते हैं। शहर की गहमागहमी से अलग यह जगह गर्मियों में काफी सुकून देती है। लेकिन इन दिनों यहां काफी सैलानी आते हैं सो होटल आदि की बुकिंग पहले से करवा लेना सही रहता है।

सर्दियों में यहां से बर्फीली चोटियों के अद्भुत नजारे दिखाई देते हैं। लेकिन शाम के बाद हर तरफ सन्नाटा छा जाता है। बारिश में तो चैल जैसे खिल उठता है। सच तो यह है कि चारों तरफ चीड़ और देवदार के पेड़ों से घिरा यह छोटा-सा कस्बा, हर मौसम में सैलानियों का स्वागत करता दिखाई देता है। मार्च-अप्रैल और अक्टूबर-नवंबर के महीने में यहां की सैर करना ज्यादा आनंददायक होता है।


कैसे पहुंचें

चंडीगढ़ का हवाई अड्डा यहां से तकरीबन 115 किलोमीटर और शिमला का 45 किलोमीटर दूर है। सोलन से भी यह इतना ही दूर है। इन दोनों ही जगहों से बस या टैक्सी द्वारा चैल पहुंचा जा सकता है। कालका से इसकी दूरी करीब 85 किलोमीटर है। कालका तक ट्रेन से जाकर आगे बस या टैक्सी से चैल जाया जा सकता है। कालका से कंडाघाट तक टॉय ट्रेन से भी पहुंचा जा सकता है। यहां से चैल की दूरी 25 किलोमीटर रह जाती है। कई पर्यटक शिमला से आकर और दिन भर सैर करके शाम को लौट भी जाते हैं।

कहां ठहरें

आप चैल पैलेस में ही ठहर सकते हैं। इसमें करीब ढाई हजार से लेकर बीस हजार रुपए किराए तक के कमरे, सुइट और हट्स मिल जाते हैं। इसके अलावा यहां कई सारे होटल भी उपलब्ध हैं, जिनमें उचित किराए पर कमरे मिल जाते हैं। आस-पास बहुत सारे टूरिस्ट कॉटेज भी हैं।

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