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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख घूमने का है प्लान तो इन जगहों पर जाना मत भूलना

5 अगस्त को केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में 1947 से चले आ रहे अनुच्छेद 370 और 35A के विशेषाधिकार को खत्म करने का एतिहासिक फैसला लिया, इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर अब एक केन्द्र शासित प्रदेश बन गया है, इसके साथ ही जम्मू कश्मीर से अब तक जुड़ा हुआ लद्दाख भी एक अन्य केंद्र शासित प्रदेश के बन गया है, ऐसे में आज हम आपको धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर और लद्दाख की खूबसूरत वादियों की सैर करवाने के लिए वहां के बेस्ट टूरिस्ट प्लेसेस की लिस्ट लेकर आएं हैं।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख घूमने का है प्लान तो इन जगहों पर जाना मत भूलना
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देश-विदेश में हर कोई जन्नत की सैर करने की ख्वाहिश रखता है अगर आप भी कश्मीर और लद्दाख की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं और जवानों की शौर्यता को महसूस करना चाहते हैं, तो आज आपको दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र कारगिल, टाईगर हिल पर स्थित वॉर मैमोरियल और प्यार की खुशबू से सराबोर शालीमार गॉर्डन, बाहू का किला,तो आध्यात्मिकता के लिए शंकराचार्य टेंपल, हजरतबल तीर्थ और जामा मस्जिद जा सकते हैं। श्रीनगर में खूबसूरती के लिए डल झील, नगीन लेक और बोड डल की सैर मनमोहक पर्यटक स्थल जा सकते हैं। जबकि लद्दाख में पेंगोंग झील, जंजार वैली,त्सो मोरीरी,चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य घूमने जा सकते हैं, आइए जानते है कैसे पहुंचे और कब जाएं...




जम्मू के पर्यटन स्थल

जम्मू एक मैदानी क्षेत्र है। अगर आप जम्मू कश्मीर की यात्रा पर जा रहे हैं, तो ऐसे में जम्मू के रघुनाथ मंदिर और हिन्दूओं के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक मां वैष्णों मंदिर और शिव खोड़ी के दर्शन से यात्रा की शुरुआत करें। इसके लिए आप देश के हर शहर से जम्मू तवी स्टेशन और कटरा स्टेशन तक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा सड़क मार्ग और हवाई मार्ग भी से भी कटरा आसानी से जाया जा सकता है।




कश्मीर के पर्यटन स्थल

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। क्योंकि इसके एक तरफ जहां हरी भरी वादियां है, तो वहीं दूसरी और सैकड़ों मीलों तक बर्फ से ढकी चोटियां आसमान से गले मिल रही हैं। कश्मीर की खूबसूरती को कवियों और लेखकों ने अपनी कविताओं और कहानियों में विशेष स्थान दिया है। कश्मीर में देखने के लिए डल झील, शालीमार गॉर्डन, तो सोनमर्ग में केसर के लहलहाते खेत, कारगिल की ऊंची चोटी, पहलगाम में बर्फीली वादियां बाहें फैलाकर आपको बुलाती हैं।




सोनमर्ग - कश्मीर से लद्दाख तक जाने के लिए आपको सोनमर्ग के पास जोजिला दर्रा से होकर गुजरना होगा। इस दर्रे के अलावा सोनमर्ग आप वहां गंगाबल झील, कृष्णसर झील, विशनसर झील, नारनग, हरमुख पर्वत और प्रसिद्ध बालटाल और थजीवास ग्लेशियर देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं। सोनमर्ग से बालटाल की दूरी 15 किलोमीटर है इसलिए अमरनाथ य़ात्रा का एक बेस कैंप सोनमर्ग में भी लगाया जाता है।




पुलवामा - पुलवामा कश्मीर की सबसे सुंदर जगहों में से एक है, क्योंकि यहां केसर के खेत और सबसे मिलनसार लोग रहते हैं। इसके अलावा आप यहां नागबरन, टारसर झील, मार्सर झील, शिकारगढ़ और अरिपल नाग, अवंतीश्वर मंदिर आपके सहित दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। पुलवामा की दूरी त्राल सेक्टर से मात्र 11 किलोमीटर दूर है।




पहलगाम- पहलगाम कश्मीर का सबसे शांत और घास से हरे-भरे पहाड़ी वादियों वाली जगह है। यहां आप अरु घाटी, बेताब वैली, बिसरन, शेषनाग झील और तुलियन झील घूम सकते हैं, तो इसके साथ ही घुड़सवारी, ट्रेकिंग और गोल्फ का मजा भी उठा सकते हैँ। पहलगाम की चंदनबारी से दूरी सिर्फ 16 किलोमीटर है। जबकि अमररनाथ के पवित्र मंदिर से 30 किलोमीटर की दूरी है। पहलगाम को कश्मीर की घाटी का सबसे विकसित क्षेत्र माना जाता है।




जम्मू कश्मीर कैसे पहुंचे

जम्मू कश्मीर जाने के लिए रेल मार्ग, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग तीनों को अपनाया जा सकता है। आइए जानते हैं एनबीटी के मुताबिक ....

रेल मार्ग - जम्मू जाने के लिए आप किसी भी शहर से जम्मू तवी स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। जबकि मां वैष्णों देवी जाने के लिए कटरा स्टेशन पहुंच जा सकता है। जम्मू का जम्मू तवी स्टेशन देश के हर राज्य से जुड़ा हुआ है। जम्मू तवी तक दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु से सीधी रेल सेवा मौजूद है।

जबकि श्रीनगर के लिए कोई सीधी रेल लाइन नहीं हैं इसलिए वहां जाने के लिए जम्मू या उधमपुर के बाद सड़क मार्ग से आगे जाया जा सकता है। रेल से जम्मू जाने के लाभ भी कई सारे होते हैं। इसके बीच आप प्राकृतिक खूबसूरती का मजा उठा सकते हैं। श्रीनगर से उधमपुर की 200 किलोमीटर की दूरी है।

सड़क मार्ग - रेल मार्ग की तरह जम्मू और श्रीनगर सड़क मार्ग से भी पूरे देश से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से जाने के लिए आप कार या बस का उपयोग कर सकते हैं। क्योंकि देश के लगभग हर बड़े शहर से जम्मू तक जाने वाली सीधी बस सेवा उपलब्ध है। लेकिन अगर आप श्रीनगर जाना चाहते हैं, तो ऐसे में आपको जम्मू और होकर ही जाना पड़ेगा।

दिल्ली से श्रीनगर की दूरी 814 किलोमीटर, जम्मू से 266 किलोमीटर,चंडीगढ़ से 566 किलोमीटर, और लेह से 418 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क मार्ग से जाने पर आप पूरे रास्ते मनमोहक दृश्यों को कैमरे में कैद करते हुए चल सकते हैं।

हवाई मार्ग - अगर आप जम्मू और श्रीनगर कम समय में पहुंचना चाहते हैं, तो उसके लिए हवाई मार्ग सबसे बेस्ट है। लेकिन ये तरीका थोड़ा महंगा होता है। हवाई मार्ग से दिल्ली से श्रीनगर करीब 1.25-1.15 घंटे में पहुंचा जा सकता है। जबकि मुंबई और बैंगलुरु से श्रीनगर तक पहुंचनें में लगभग 5 घंटे का समय लगता है। दिल्ली, चंडीगढ़ आदि शहरों से जम्मू और श्रीनगर के लिए डायरेक्ट हवाई सेवा उपलब्ध है।

कब जाएं

जम्मू कश्मीर पहुंचने के लिए सबसे अच्छा समय गर्मी का मौसम होता है। क्योंकि सर्दियों में कश्मीर में बर्फबारी ज्यादा होने की वजह से कश्मीर का संपर्क पूरे देश से कट जाता है। ऐसे में आपको परेशानी हो सकती है। इसके अलावा रास्ते ब्लॉक होने से आप होटल में कैद हो सकते हैं। इसलिए जाने से पहले वहां केल मौसम की जानकारी जरुर लें।



















लद्दाख के पर्यटन स्थल

लद्दाख,जम्मू और कश्मीर के पूर्वोत्तर में स्थित है। ये वर्तमान में काराकोरम रेंज में सियाचिन ग्लेशियर से लेकर दक्षिण में हिमालय तक फैला हुआ है। यहां पर इंडो-आर्यन और तिब्बती मूल के लोग निवास करते है। यहां पेंगोंग झील, जंजार वैली,त्सो मोरीरी,चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य घूमने के लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हैं।




पेंगोंग झील - पेंगोंग झील, समुद्र तल से 43,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये एंडोर्फिक झील 12 किलोमीटर लंबी है जो भारत से तिब्बत तक फैली हुई है। पेगोंग झील का तापमान हमेशा -5 डिग्री सेल्सियस से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इस झील की खासियत ये है कि पूरे साल इसके पानी का रंग नीला ही नहीं रहता है बल्कि हल्का हरा और ग्रे रंग का भी होता है। इस झील की लोकप्रियता बहुत ज्यादा होने की वजह से ये एक टूरिस्ट स्पॉट होने के साथ ही कई फिल्मों की शूटिंग के लिए 'हॉट-स्पॉट' बन गई है।




हेमिस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी - Holidify.com के मुताबिक, लद्दाख में हेमिस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है। जो दुनिया की सबसे ऊंचाई पर मौजूद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और एशिया का सबसे बड़ा पार्क भी माना जाता है। यहां तेंदुओं की दुर्लभ प्रजाति पाई जाती हैं। इसके अलावा 73 प्रजाति के पक्षी, अल्पाइन और स्टेपी पेड़ों के साथ, यह जंगल और प्रकृति की सैर के लिए मनोरम दृश्य हैं। हेमिस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी समुद्र तल से 3,300 मीटर से 600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

लद्दाख केैसे पहुंचे

अगर आप लद्दाख जाने की सोच रहे हैं तो वहां जाने के लिए सड़क मार्ग और हवाई मार्ग सबसे उपयुक्त विकल्प है। लद्दाख आप हिमाचल प्रदेश के मनाली से पहुंच सकते हैं या फिर श्रीनगर के रास्ते लेह पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग - अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं और लद्दाख की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं, तो आप बाइक ट्रिप प्लान कर सकते हैं। क्योंकि श्रीनगर से लेह के रास्ते बेहद रोमांच पैदा करने वाले हैं। आप जम्मू, श्रीनगर और दिल्ली से लेह लद्दाख के लिए डायरेक्ट बस सेवा उपलब्ध है। आप लद्दाख जाने के लिए जम्मू कश्मीर स्टेट ट्रांसपोर्ट और हिमाचल प्रदेश ट्रांसपोर्ट की बसें लेह तक जाती हैं। श्रीनगर से लद्दाख जाने के लिए आपको जोजिला दर्रे से होकर गुजरना होगा। जबकि मनाली से लद्दाख रोहतांग पास से होकर पहुंचा ज सकता है। इसके अलावा आप दिल्ली से भी लेह के लिए बस सेवा का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन इसमें 4 दिन का समय लगता है। जो बेहद मुश्किल होता है।

सुझाव - अगर आप बाइक से लेह जा रहे हैं, तो अपनी बाइक में पेट्रोल फुल करवाकर चलें। क्योंकि रास्ते में बहुत कम पेट्रोल पंप हैं। जिनके खुलने का समय फिक्स नहीं है।

हवाई मार्ग - लद्दाख जाने के लिए हवाई मार्ग सबसे बेस्ट है। ये आसान होने ते साथ बेहद कम समय में पहुंचाने वाला साधन है। देश के हर बड़े शहर से लद्दाख के लिए सीधी हवाई सेवा उपलब्ध है। लेह में सिर्फ एक मिलिट्री एयरपोर्ट है। जो लेह कुशोक बकुला रिमपोची एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है, यहां आपको सघन जांच से गुजरना पड़ सकता है।

रेलमार्ग - अगर आप रेल मार्ग से लद्दाख जाना चाहते हैं, तो लद्दाख के सबसे करीब रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है, जिसकी दूरी 700 किलोमीटर है। इसके बाद आपको बस ये टैक्सी से आगे का रास्ता तय करना होगा। जिसमें 2 दिन का समय और 9-10 हजार का किराया लगेगा।

कब जाएं

लद्दाख जाने के लिए सबसे अच्छा टाइम गर्मियों में जून से अक्टूबर का है। जबकि अन्य महीनों में वहां भारी बर्फबारी होती है। लद्दाख में गर्मियों में भी -5 से -10 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। इसलिए लद्दाख जाने से पहले वहां के मौसम की जानकारी जरुर लें।

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