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Jagannath Rath Yatra 2019: जानें कैसे पहुंचे जगन्नाथ मंदिर और इससे जुड़े रोचक तथ्य

Jagannath Rath Yatra 2019: जगन्नाथ रथ यात्रा 2019 (When is Jagannath Rath Yatra in 2019) कब है। हर साल की तरह इस बार 4 जुलाई 2019 (4 July 2019) यानि गुरुवार को उड़ीसा के पुरी शहर में बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी। जगन्नाथ यात्रा में हर बार भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा का की रथ यात्रा निकाली जाती है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए लोग देश-विदेश से भारी संख्या में उड़ीसा के पुरी शहर में इकट्ठा होते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल रथ को खींचता है, उसे मनवांछित फल मिलता है साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए आज हम आपको जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी यानि जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास,जगन्नाथ रथयात्रा क्यों शुरु हुई, जगन्नाथ मंदिर के रोचक तथ्य आदि।

Jagannath Rath Yatra 2019: जानें कैसे पहुंचे जगन्नाथ मंदिर और इससे जुड़े रोचक तथ्यJagannath Rath Yatra 2019 how to reach Jagannath temple and Its History Interesting Facts In Hindi

Jagannath Rath Yatra 2019: जगन्नाथ रथ यात्रा 2019 (When is Jagannath Rath Yatra in 2019) कब है। हरसाल की तरह इस बार 4 जुलाई 2019 (4 July 2019) यानि गुरुवार को उड़ीसा के पुरी शहर में बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी। जगन्नाथ यात्रा में हर बार भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा का की रथ यात्रा निकाली जाती है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए लोग देश-विदेश से भारी संख्या में उड़ीसा के पुरी शहर में इकट्ठा होते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल रथ को खींचता है, उसे मनवांछित फल मिलता है साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए आज हम आपको जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी यानि जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास,जगन्नाथ रथयात्रा क्यों शुरु हुई, जगन्नाथ मंदिर के रोचक तथ्य आदि।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2019 कब शुरु होगी

हर साल उड़ीसा के पुरी शहर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। जो अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय से शुरु होकर 9दिन तक चलता है। इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 4 जुलाई को शुरु होगी।




जगन्नाथ रथयात्रा क्यों शुरु हुई

जगन्नाथ रथयात्रा, हर साल उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में स्थित है जगन्नाथ मंदिर से शुरु होती है। जगन्नाथ रथयात्रा अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय के दिनआरंभ की जाती है। शास्त्रों और पुराणों (ब्रह्म पुराण में, पद्म पुराण में, स्कन्दा पुराण में तथा कपिला समिथा में) के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर रहने जाते हैं।

जगन्नाथ रथयात्रा, जगन्नाथ मंदिर से शुरु होकर, उनके मौसी के घर यानि 2 Km दूर गुंडीचा मंदिरपर समाप्त होती है। जहां वो अगले 9 दिन रहते हैं। इसके बाद तीनों के रथ फिर से वापस जगन्नाथ मंदिर पहुंचती है जिसे 'बहुडा जात्रा' कहा जाता है।

जगन्नाथ रथयात्रा के रोचक तथ्य

1.'जगन्नाथ मंदिर' में केवल हिन्दुओं को ही प्रवेश दिया जाता है। लेकिन जगन्नाथ रथयात्रा के दिन हर जाति, धर्म और देश-विदेश से आए लोग भगवान जगन्नाथ दर्शन कर सकते हैं। इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का हिस्सा बन सकता है।

2.भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा को नंदिघोषा रथ, गरुडध्वजा और कपिलध्वजा नाम से पुकारा जाता है। जिसमें उनके सारथी मदनमोहन होते हैं। जबकि तालध्वजा रथ, भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वजा, नंगलध्वजा है। इसमें उनका साथ रामकृष्ण देते हैं। सुभद्रा के रथ का नाम है दर्पदलना, देवदलन, पद्मध्वज है। रथ में देवी सुभद्रा का साथ सुदर्शन देता हैं।

3.ब्रिटिश काल में जगन्नाथ रथ यात्रा में बड़े और वजनदार रथों के शामिल होने के कारण 'जुग्गेरनट' कहा जाता था।

4.जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी के अलावा, गुजरात के अहमादाबाद, तो विदेशों मे डबलिन, न्यूयॉर्क, टोरंटो और लाओस में पारंपरिक रुप से निकाली जाती है।

5. हर बार जगन्नाथ रथयात्रा दौरान बारिश हुई है। जो अपने आप में एक रिकार्ड और चमत्कार माना जाता है। क्योंकि ये यात्रा गर्मी के मौसम में निकाली जाती है। ऐसे में बारिश का होना शुभ संकेत माना जाता है।

6.जगन्नाथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को कुल 208 किलो ग्राम सोने से सजाया जाता है।




जगन्नाथ मंदिर का इतिहास

'जगन्नाथ मंदिर' देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। ये मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इसमें वो अपने बड़े भाई और छोटी बहन सुभद्रा के साथविराजते हैं। 'जगन्नाथ मंदिर' के इतिहास के बारें में अलग-अलग धारणाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। 'जगन्नाथ मंदिर' का स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और नारदपुराण के अलाव रामायण और महाभारत में भी विस्तार से उल्लेख मिलता है।

माना जाता है कि पांडवों ने भी 'जगन्नाथ मंदिर' में पूजा-अर्चना की थी। 'जगन्नाथमंदिर' प्राचीनता के बारे में माना जाता है कि ये मंदिर दूसरी सदी यानि कलिंग (ओडिशा का प्राचीन नाम) के सम्राट अशोक के समय का है। जबकि एक धारणा के मुताबिक गुरु शंकराचार्य नें देश को भ्रमण करते समय यहां देश के चार धाम में से एक पूर्वी धाम के रुप में गोवर्धन मठ को स्थापित किया जो जगन्नाथ मंदिर मेंस्थित है। हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, हर व्यक्ति को अपने जावन काल में एक बार चार धाम की यात्रा जरूर करनी चाहिए।





जगन्नाथ मंदिर के रोचक तथ्य

1. दुनिया में जगन्नाथ मंदिर अकेला ऐसा मंदिर है, जहां भगवान की मूर्ति को मंदिर से बहार निकाला जाता है।

2. पोडा पीठा जगन्नाथ मंदिर की मुख्य मिठाई है जो बहुत ही प्रसिद्ध है। भगवान जगन्नाथ को रोजाना इसी मिठाई का भोग लगाया जाता है।

3. जगन्नाथ मंदिर की वास्तु कला दुनिया में सबसे अनोखी और अतुलनीय मानी जाती है। जगन्नाथ मंदिर लगभग 30 छोटे और बड़े मंदिरों से घिरा हुआ है।

जगन्नाथ मंदिर के मुख्य गुंबद का निर्माण इस तरह से किया गया है कि उसकी परछाई कभी भी जमीन पर नहीं बनती हैं।

4. जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा हुआ झंडा / ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में उड़ता है।

5. जगन्नाथ मंदिर का कोई ना कोई एक पुजारी 1800 वर्ष से प्रतिदिन मंदिर के शिखर, जो 215 फीट (65मीटर) है। उस पर चढ़ कर ध्वज को बदलता है।

6. दुनिया में सभी जगह दिन के समय समुद्र से पवन धरती की ओर शाम से घरती से समुद्र की और चलती है परन्तु पूरी में इसका उल्टा होता है।

7. जगन्नाथ मंदिर के ऊपर आज तक न कोई पंछी या हवाई जहाज उड़ता हुआ नहीं देखा गया है। ये रहस्य अभी तक बरकरार है।

8.जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा के लिए हर साल नए रथों का निर्माण एक खास पेड़ की लकड़ी से किया जाता है। जिस वृक्ष पर चक्र और पद्म की आकृति बनी होतीहै।

9. जगन्नाथ मंदिर में प्रसाद में बनने वाला भोजन मिट्टी के 12 बर्तनों को एक के एक ऊपर रखकर पकाया जाता है। इसमें रहस्य कि बात ये है कि सबसे ऊपर के बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है।



जगन्नाथ मंदिर कैसे जाएं

उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर की जगन्नाथ यात्रा इस बार 4 जुलाई से शुरु हो रही है। इस वार्षिक उत्सव में शामिल होने का एक अलग अनुभव होता है। यहां पहुंचने के लिए भुवनेश्र्वर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से क्रमश: 30 और 60 किमी. की दूरी पर हैं रघुराजपुर और पीपली गांव (जहां रथयात्रा निकाली जाती है)। रेल मार्ग से पहुंचने के लिए भुवनेश्र्वर और पुरी में रेलवे स्टेशन हैं। जहां से बस और टैक्सी के जरिए सड़क मार्ग से जगन्नाथ मंदिर जा सकते हैं।




कहां ठहरें

भुवनेश्र्वर और पुरी में कई होटल और धर्मशाला मौजूद हैं। जहां आसानी से ठहरा जा सकता है। लेकिन रथयात्रा के दौरान भीड़ ज्यादा होने की वजह से जगह की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आप पहले से होटल की बुकिंग करवाएं। पुरी में नवेज खाने वालों के लिए बहुत से ऑप्शन मौजूद हैं। जबकि वेज यानि शाकाहारी लोगों के लिए दाल और आलू पोस्ता के साथ चावल का आनंद ले सकते हैं।

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