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उम्र के साथ कमजोर होती मांसपेशियों को ऐसे करें मजबूत, अपनाएं ये तरीके

बहुत से यंग और टीनएजर्स अपनी मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए बहुत कोशिश करते हैं। लेकिन स्ट्रॉन्ग मसल्स हेल्दी रहने के लिए हर एज में जरूरी होती है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स से आप बचे रह सकते हैं।

उम्र के साथ कमजोर होती मांसपेशियों को ऐसे करें मजबूत, अपनाएं ये तरीके

बहुत से यंग और टीनएजर्स अपनी मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए बहुत कोशिश करते हैं। लेकिन स्ट्रॉन्ग मसल्स हेल्दी रहने के लिए हर एज में जरूरी होती है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स से आप बचे रह सकते हैं। क्या है स्ट्रॉन्ग मसल्स का सीक्रेट और क्यों है ये जरूरी, इस बारे में अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली के सीनियर फिजीशियन डॉ़. राकेश कुमार पूरी जानकारी दे रहे हैं।

उम्र के साथ मांसपेशियों का कमजोर होना स्वाभाविक है, लेकिन हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां भी मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर का पूरा ख्याल नहीं रखने, फास्ट फूड का सेवन, देर रात तक जागना, पूरी नींद ना लेना, एक्सरसाइज न करना या अतिसक्रिय जीवन जीना मांसपेशियों को कमजोर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यह जानना बहुत जरूरी है कि हमारे स्वास्थ्य में स्वस्थ्य मांसपेशियों का क्या महत्व है और इन्हें समय से पहले कमजोर होने से कैसे बचाया जाए।

क्यों जरूरी हैं हेल्दी मसल्स

  • मांसपेशियां हमारे शरीर की एक महत्वपूर्ण संरचना होती हैं।
  • उनके बिना न तो हम खड़े हो सकते हैं न सीधे बैठ सकते हैं, इसलिए बहुत जरूरी है कि उनकी उचित देखभाल की जाए।
  • मांसपेशियों के कमजोर पड़ने से थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
  • कमजोर मांसपेशियों के कारण कुछ इस तरह स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं।
  • मांसपेशियों में दर्द होना।
  • अचानक सुन्नपन और संवेदना समाप्त हो जाना।
  • पैरों को हिलाने-डुलाने में समस्या होना, चलने, खड़े होने या सीधे बैठने में परेशानी होना।
  • चेहरे पर कोई भाव न आ पाना।
  • अत्यधिक थकान होना।
  • बोलने में समस्या होना, भ्रमित होना और चीजों को समझने में परेशानी होना।
  • छाती की मांसपेशियों के कमजोर पड़ जाने से सांस लेने में तकलीफ होती है और बेहोशी छा सकती है।

मसल्स वीक होने के कारण

  • मांसपेशियों के कमजोर होने के कईं कारण हैं।
  • गंभीर बीमारियों से लेकर खान-पान की गलत आदतें, मांसपेशियों को कमजोर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • एडिसन डिजीज. हाइपर थायरॉइडिज्म, क्रॉनिक फटिक सिंड्रोम, थायरोटॉक्सिकोसिस (यह महिलाओं में होने वाला एक डिसआर्डर है, जिसमें थायरॉइड ग्लैंड अचानक अतिसक्रिय हो जाती है)।
  • सेरिब्रल पालसी, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, स्ट्रोक जैसी बीमारियां मांसपेशियों को कमजोर कर देती हैं।
  • मांसपेशियों का कमजोर पड़ जाना, सिकुड़ जाना, मांसपोशियों में सूजन आ जाना।
  • शरीर में सोडियम या पोटेशियम का स्तर कम हो जाना।
  • क्लॉस्ट्रिडियम बोटुलिज्म बैक्टीरिया के कारण होने वाला फूड प्वायजनिंग।
  • पोस्ट पोलियो सिंड्रोम।
  • एनीमिया।
  • रूमैटिक फीवर।
  • लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहना।

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न्यूट्रिशस डाइट

मांसपेशियों के स्वास्थ्य पर हमारे खान-पान का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। संतुलित और पोषक भोजन का सेवन जरूरी है ताकि मांसपेशियों को समय पर पोषण उपलब्ध हो सके नहीं तो वो वीक हो जाएंगी।

ऐसा भोजन, जिसमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इससे शरीर में वसा जमा होने लगती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं।

एक्सरसाइज

सप्ताह में कम से कम 150 मिनिट एक्सरसाइज करना जरूरी है। नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों में संकुचन नहीं होता है। एक्सरसाइज करने से रक्त संचरण सुधरता है और मांसपेशियों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है, इससे वो बेहतर और मजबूत बनती हैं। नियमित रूप से एक्सरसाइज करना मांसपेशियों पर उम्र के प्रभाव को कम करता है।

पानी

मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए शरीर को उचित मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

इनका रखें ध्यान

धूम्रपान और शराब- धूम्रपान ऑक्सीजन को मांसपेशियों तक पहुंचने से रोकता है, जिससे उनमें टूट-फूट शुरू हो जाती है। जो लोग धूम्रपान नहीं करते उनका मसल्स टोन उनसे बेहतर होता है, जो धूम्रपान करते हैं। नियमित रूप से अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों को कमजोर बना देता है।

कैफीन- थोड़ी मात्रा में कैफीन का सेवन ठीक रहता है लेकिन अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने से प्रोटीन सिंथेसिस की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, जिससे मांसपेशियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन करने से आयरन के अवशोषण में भी रुकावट आती है, जिससे एनीमिया हो जाता है, इससे थकान और मांसपेशियों की कमजोरी महसूस होती है।

अनिद्रा- मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए 6-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद में एनर्जी का उपभोग कम हो जाता है, इसलिए जिन पोषक तत्वों का सेवन हम दिन में करते हैं, उनका उपयोग रात में मांसपेशियों के निर्माण में हो जाता है। जब हम गहरी नींद में होते हैं तब हमारी मांसपेशियों के रिकवर, रिपेयर और रिबिल्ड की प्रक्रिया चलती है। नींद की कमी से मांसपेशियों की टूट-फूट की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

ओवरएक्टिविटी- हमें स्वस्थ रखने में शारीरिक सक्रियता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन स्वस्थ रहने के लिए हमें यह समझना होगा कि शरीर को आराम की जरूरत भी होती है। अत्यधिक वर्कआउट करने, आउटडोर गतिविधियां करने या शारीरिक श्रम करने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

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