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लीवर कैंसर से ऐसे करें बचाव, अपनाएं ये नुस्खे

प्राइमरी लीवर कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ठोस ट्यूमर है।

लीवर कैंसर से ऐसे करें बचाव, अपनाएं ये नुस्खे
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लीवर कैंसर या तो लिवर में शुरू होता है (प्राइमरी लिवर कैंसर) या लीवर में शरीर के अन्य अंगों से फैलता है (सेकेन्डरी लिवर कैंसर)।

प्राइमरी लीवर कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला ठोस ट्यूमर है। जिसके एक मिलियन से अधिक मामलों का हर वर्ष निदान किया जाता है।

हालांकि यह संयुक्त राज्य और यूरोप में अपेक्षाकृत कम पाया जाता है।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुमान के अनुसार, हर वर्ष 17,000 से अधिक लोगों में प्राइमरी लीवर कैंसर का निदान पाया जाता है।

इनमें से अधिकतर की उम्र 40 वर्ष से अधिक होती है और 15,000 से ज्यादा लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है।

महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में लीवर कैंसर के दोगुने मामले पाए जाते हैं।

लक्षण-

वजन में अप्रत्याशित कमी, भूख न लगना, थोड़ा खाना खाने पर भी पेट भरा भरा लगना, दर्द या सूजन का होना, त्वचा और आंखों पर पीलापन होना, लीवर का फैल जाना या लीवर के क्षेत्र में किसी पिंड का बनना, क्राॅनिक हेपेटाइटिस या सिरोसिस की समस्या गंभीर हो जाना, रक्त में शुगर की मात्रा कम हो जाना।

कैसर का उपचार-

क्रॉयोसर्जरी

  • क्रॉयोसर्जरी में लीवर कैंसर को अत्यतधिक ठंडे मेटल प्रोब के द्वारा फ्रीज करके नष्ट किया जाता है।
  • इसे सामान्यत निश्चेतक के उपयोग के साथ किया जाता है और दोहराना पड़ सकता है।
  • इससे होने वाली समस्याएं सामान्यतया कम होती हैं और रिकवरी आमतौर से तेजी से होती है।

एथेनॉल

  • एथेनॉल एब्लेशन, इसे परक्यूटेनस एथेनॉल इंजेक्शन भी कहते हैं। इसमें सांद्र(कांसंट्रेटेड) एथेनॉल को सीधे लीवर कैंसर में डाला जाता है।
  • यह कैंसर कोशिकाओं को डिहाइड्रेट करके मार देता है। इसे लोकल एनेस्थेसिया के उपयोग द्वारा किया जा सकता है।
  • इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर कुछ मिनटों तक रहने वाला दर्द और इंजेक्शन के बाद बुखार इसके साइड इफेक्ट हैं।

कीमोथेरेपी

  • नई कीमोथेरेपी के आगमन ने हेपेटोसेलुलर कैंसर से ग्रस्त मरीजों के लिए नई संभावनाएं जगा दी हैं।
  • उच्च स्तरीय या मेटास्टेसटिक हेपेटोमा वाले मरीजों के उपचार के लिए हाल ही में सोराफेनिब नाम की एक दवा का अनुमोदन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा किया गया है, जो लीवर कैंसर में कुछ बेहतर प्रभाव प्रदर्शित करने वाली अपने प्रकार की पहली दवा है।
  • इसके अलावा दूसरी दवाएं, जो ट्यूमरों को रक्त आपूर्ति कम कर देती हैं, भी मददगार साबित हुई हैं।
  • कभी-कभी कीमोथेरेपी दवाओं को सीधे रक्त वाहिनियों में (हेपैटिक आर्टिरी) प्रवेश कराने पर भी विचार किया जा सकता है।

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