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कहीं आपको भी टेलीफोबिया तो नहीं

स्मार्टफोन के आने के बाद टेलीफोबिया की समस्या ज्यादा बढ़ गई है।

कहीं आपको भी टेलीफोबिया तो नहीं
नई दिल्ली. अक्सर आपने यह देखा होगा कि कुछ लोग फोन पर बात करने से बचते हैं। ऐसे लोगों को फोन पर बात करने के दौरान बेचैनी होने लगती है। वास्तव में यह एक तरह का फोबिया होता है। टेलीफोबिया या फिर फोन पर बात करने से ही घबराहट होना कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन स्मार्टफोन के आने के बाद टेलीफोबिया की समस्या ज्यादा बढ़ गई है।
टेलीफोबिया से पीड़ित लोगों को मैसेज के जरिए बात करने में कोई परेशानी नहीं होती है। ऐेसे लोगों की गतिविधियों का पता लगाकर उनके व्यवहार के बारे में पता लगाया जा सकता है। रिसर्च में यह भी साबित हुआ है कि स्मार्टफोन के आने के पहले भी कई लोग टेलीफोबिया की समस्या से पीड़ित थे, लेकिन तब तक यह फोबिया में तब्दील नहीं हुआ था।
टेलीफोबिया से पीड़ित व्यक्ति इसलिए फोन पर बात करने से कतराते हैं क्योंकि उन्हे ऐसा लगता है कि चर्चा के दौरान उसके हाव-भाव का आंकलन कर रहे हैं। उसे ऐसा लगता है कि बाद में उसके आस-पास मौजूद लोग उसकी बातें सुनकर मजाक उड़ाएंगे। आमतौर पर कई लोगों को पता नहीं होता है कि वह टेलीफोबिया से पीड़ित है।
ऐसे बचे टेलीफोबिया से

- अगर आपको भी फोन पर बात करने में परेशानी होती है तो पहले ही निर्धारित कर लें कि आपको कब फोन शुरु करना है और कितनी देर बातें करके फोन कब खत्म करना है।

- ये समझने की कोशिश करें कि आप ये कॉल जानकारी देने के लिए कर रहे हैं या जानकारी लेने के लिए। उसी के अनुसार आप कॉल पर बातचीत कर सकते हैं।

- फोन पर किसी ऐसे दोस्त से बात करें, जो गलतियां करने के बावजूद आपका मजाक न उडाएं। इस शख्स से गलतियों की परवाह किए बिना फोन पर खुल कर बातचीत करें। ऐसे में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप आसानी से फोन पर बात कर पाएंगे।

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