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Happy New Year 2019: हेल्थ सेक्टर में ऐसा रहा बीता साल, जानिए 2019 कैसा रहेगा

साल 2018 में चिकित्सा क्षेत्र में हुए बदलावों की वजह से चिकित्सा कारोबार की छोटी कंपनियों को लगातार कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी हो गई हैं कि साल 2019 यानि नए साल में इन कंपनियों का बाजार में टिके रहना बेहद मुश्किल हो सकता है।

Happy New Year 2019: हेल्थ सेक्टर में ऐसा रहा बीता साल, जानिए 2019 कैसा रहेगा

साल 2018 में चिकित्सा क्षेत्र में हुए बदलावों की वजह से चिकित्सा कारोबार की छोटी कंपनियों को लगातार कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी हो गई हैं कि साल 2019 यानि नए साल में इन कंपनियों का बाजार में टिके रहना बेहद मुश्किल हो सकता है। क्योंकि उद्योग जगत का मानना है कि नये साल में इस क्षेत्र की सरकारी और निजी कंपनियों की भागीदारी की वजह से चिकित्सा क्षेत्र में छोटी कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

चिकित्सा कारोबार के क्षेत्र में नियामकीय परिस्थितियां अधिक कठोर होने तथा प्रतिस्पर्धा बढ़ने के चलते नये साल में कंपनियों के आपस में विलय या अधिग्रहण का रुझान और तेज हो सकता है। बेहद प्रतिस्पर्धी बाजार में नियमन कड़े होने से छोटी हास्पिटल कंपनियों के लिए कम्पीटिशन में बने रह पाना मुश्किल हो रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि नये साल में इस क्षेत्र की सरकारी एवं निजी कंपनियों में और भागीदारियां देखने को मिल सकती हैं।
महीनों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद मलेशिया की आईएचएच हेल्थकेयर चार हजार करोड़ रुपये में फोर्टिस की 31.1 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद चुकी है और अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इसके अलावा केकेआर समर्थित रेडिएंट लाइफ केयर ने एक विलय के जरिये मैक्स हेल्थकेयर की बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की है। इससे 7,242 करोड़ रुपये की कंपनी का सृजन होगा।
मणिपाल हॉस्पिटल के चेयरमैन एच. सुदर्शन बल्लाल ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमने इस क्षेत्र में कई अधिग्रहण एवं विलय देखे हैं और नये साल में हमें चिकित्सा क्षेत्र में भी कई अन्य क्षेत्रों की तरह अलग अलग कंपनियों कारोबार के विलय/ अधिग्रहण देखने को मिल सकते हैं।'
बल्लाल ने कहा कि नोटबंदी, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), नकदी लेनदेन पर सख्ती तथा नियामकीय दिक्कतों ने निश्चित तौर पर कई छोटी कंपनियों का टिके रह पाना मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करने से क्षेत्र में संकुचन देखने को मिल सकता है।
वॉकहार्ड हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक जहाबिया खोरकीवाला ने कहा कि आने वाले साल में सरकारी एवं निजी क्षेत्र के बीच अधिक सार्थक भागीदारियां देखने को मिल सकती हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स की उपाध्यक्ष प्रीता रेड्डी ने कहा कि देश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र में अभी भी निवश का स्तर आवश्यकता से कम है।
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