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आपने कभी खुद से पूछे हैं कभी ये पांच सवाल..?, जिंदगी हो जाएगी आसान

जिंदगी सभी जीते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे बहुत आसानी से इसका पूरा मजा लेते हुए जीते हैं तो कुछ इसे बोझिल बना लेते हैं। सवाल है क्या आपको जिंदगी को सही ढंग से जीने की कला आती है? इस कला को सीखना भी आसान है।

आपने कभी खुद से पूछे हैं कभी ये पांच सवाल..?, जिंदगी हो जाएगी आसान
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हर रोज सुबह 5 बजे उठती हूं और रात 11 बजे बिस्तर मिलता है फिर भी किसी को चैन नहीं। कभी प्रशंसा करना तो दूर की बात है, कोई एक गिलास पानी के लिए भी नहीं पूछता। सबके काम करती रहती हूं, लेकिन किसी ने कभी यह नहीं पूछा कि ताप्ती तेरे लिए एक कप चाय बना दूं क्या।’

गुस्साई, झुंझलाई ताप्ती रुआंसी हो चुकी थी। उसे अपनी 16 वर्षीय बेटी वंशिका पर गुस्सा आ गया था, जिसने अभी उसे उलाहना देते हुए कहा था, ‘आप तो रोज दाल-चावल, तरकारी बना देती हो। मेरी सहेलियों की मम्मियां तो रोज कोई न कोई नई डिश बनाती हैं।’

अब वंशिका को क्या पता था कि जिनकी बात वो कह रही है, वे उसकी मम्मी ताप्ती की तरह पूरी दुनिया का बोझ अपने सिर पर लेकर नहीं चलतीं। उन्होंने अपनी जिंदगी को हल्का और आसान बना रखा है।

इसलिए उनके पास फुर्सत होती है, हर रोज कुछ अलग सोचने और अलग करने की। कहीं आपकी जिंदगी भी ताप्ती की तरह बोझिल, थकाऊ, उबाऊ और नीरस तो नहीं हो गई है? अगर ऐसा है, तो जिंदगी को हल्का-आसान बनाने के लिए अपनाएं कुछ उपाय।

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1.खुद से पूछें सवाल

रॉबर्ट रिंगर ने अपनी किताब ‘लुकिंग आउट फॉर नंबर-1’ में लिखा है, आप वो सारे काम कभी नहीं कर सकते, जो आपके सामने हैं। इसलिए उनमें से वे काम छांटें, जो आपके लिए फायदेमंद और उपयोगी हैं। इसके लिए खुद से कुछ सवाल पूछें, क्या मैं इस काम को सचमुच करना चाहती हूं? क्या इसे करने से मुझे कोई आर्थिक लाभ होगा या इससे मेरा कोई लक्ष्य हासिल होगा?

क्या इसे सिर्फ मैं ही कर सकती हूं? दूसरा कोई नहीं कर पाएगा? क्या मेरे पास इस काम को करने के लिए पर्याप्त समय है? क्या इसे करने पर मुझे आंतरिक खुशी मिलेगी? या फिर तकलीफ होगी? कहीं इस काम से मेरा व्यावसायिक, सामाजिक या व्यक्तिगत नुकसान तो नहीं होगा?

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2.जान लें-ठान लें

रॉबर्ट ब्लाई ने अपनी किताब ‘टाइम मैनेजमेंट’ में लिखा है, आप को हर वो काम नहीं करना है, जो हर कोई आपसे करने को कह देता है। आपको लोगों के बताने के तरीके से ही सारे काम नहीं करने हैं। इन्हें अपनी सुविधा और अपने तरीके से करें। हर काम दूसरे की समय सीमा में बंधकर करने का भी प्रयास न करें। हर काम खुद ही करने की कोशिश न करें। ऐसे बहुत से काम हैं, जो आप दूसरों से भी करवा सकती हैं।

दिन भर व्यस्त रहना बुरी बात नहीं है, लेकिन अस्त-व्यस्त रहना आपकी शारीरिक-मानसिक सेहत, प्रोफेशन और प्रोडक्टिविटी पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। केवल व्यस्त रहने से ही आप सफल नहीं हो सकतीं बल्कि उपयोगी काम को सही समय पर करने से सफल होते हैं।

3.चुनें उपयोगी काम

जब आप इन सवालों का जवाब हासिल कर लेंगी तो आप बेवजह के कामों से छुटकारा पा लेंगी। सुजेन राइट ने ‘अनक्लटर यूअर पर्सनल लाइफ’ में इस बाबत लिखा है, सबसे पहले वह काम चुनें जिससे आपको सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।

किसी भी काम या परिस्थिति को ‘रिवॉर्ड फैक्टर’ की कसौटी पर कसें और साथ ही उस नुकसान की कसौटी पर भी, जो उसके न करने से हो सकता है। एक बार किसी महत्वपूर्ण काम को शुरू करें, तो अपना पूरा ध्यान उसी पर लगाएं। काम का चयन करते वक्त टाइम फ्रेम का भी ध्यान रखें। जाहिर है जो जरूरी, पहले वही करना है।

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