Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

जानिए क्या होता है ''हेलिकॉप्टर पेरेटिंग'' और इसके साइड इफेक्ट्स

हेलिकॉप्टर पेरेटिंग पर बनी फिल्म से बॉलीवुड की मशहूर अदकारा काजोल एक बार फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं है। चलिए आज हम आपको बताते हैं पेरेटिंग के इस नए ट्रेंड और इससे बच्चों पर पड़ने वाले असर के बारे में ...

जानिए क्या होता है

आपको अपने बचपन में की गईं शरारतें याद हैं और उन शरारतों पर माता-पिता की डांट-फटकार तो जरूर याद होगी। सोचिये अगर आपसे वो सब शैतानियां और शरारतें करने का अधिकार छीन लिया गया होता तो...आप कहेंगे कि फिर उनके बिना जिंदगी का कोई मतलब नहीं रह जाता।

वक्त के साथ हर चीज में बदलाव आया है,और इस बदलाव की बयार से परवरिश यानि पेरेटिंग जैसा मुश्किल काम भी अब अछूता नही रह गया है। आजकल हेलिकॉप्टर पेरेटिंग का चलन काफी देखने को मिल रहा है। जिससे बच्चे बेहद परेशान रहते हैं।

हेलिकॉप्टर पेरेटिंग पर बनी फिल्म से बॉलीवुड की मशहूर अदकारा काजोल एक बार फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं है। चलिए आज हम आपको बताते हैं पेरेटिंग के इस नए ट्रेंड और इससे बच्चों पर पड़ने वाले असर के बारे में ...

यह भी पढ़ें : अगर आप में भी है ये 'हॉबी' तो हो जाएं सावधान, खुल जाते हैं ये राज

क्या है हेलिकॉप्टर पेरेटिंग

समय के साथ परवरिश के तौर-तरीकों में भी बदलाव आना स्वाभाविक है। आज के दौर में पेरेंट्स अपने बच्चे की जिंदगी से जुड़ा हर फैसला लेने को खुद की जिम्मेदारी समझने लगे हैं। पेरेंट्स के अपने बच्चे को लेकर ओवर प्रोटेक्टिव बिहेवियर को हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग कहते हैं।

हेलिकॉप्टर पेरेटिंग का बच्चों पर असर :

हेलिकॉप्टर पेरेटिंग में जब पेरेंट्स ही बच्चे की जरूरत की हर चीज के फैसले लेने लगते हैं, तो बच्चों का मानसिक विकास ठहर सा जाता है। बच्चे अपने हर काम को करने से पहले अपने पेरेंट्स की परमिशन का इंतजार करने लगते हैं जिससे वो न चाहते हुए भी अपने पेरेंट्स पर डिपेंड होने लगते हैं। इससे बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता की विकास नहीं हो पाता है। इसके अलावा बच्चा खुद को अंदर से खोखला समझने लगता है और धीरे धीरे पेरेंट्स से दूर होने लगता है ।

यह भी पढ़ें : Doctor Advice: बारिश में इन 5 बीमारियों से बचने के अचूक उपाय

हेलिकॉप्टर पेरेटिंग के नुकसान:

1.दोस्तों में हंसी का पात्र बनना - बच्चे पेरेंटस के ऐसे ओवर प्रोटेक्टिव बिहेवियर की वजह से अपने दोस्तों के बीच अक्सर हंसी का पात्र बनने लगता है । दोस्त ऐसे बच्चे को लूज़र जैसे नामों से चिढ़ाने लगते हैं।

2. निर्णय लेने की क्षमता का अभाव - ओवर प्रोटेक्टिव बिहेवियर वाले पेरेंट्स के बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता का अभाव देखा जाता है । क्योंकि कपड़े हों, खाना हों, बच्चे के दोस्तों और गतिविधियों का चुनाव करने से जुड़े सारे फैसले पेरेंटस ही लेते हैं।

3. आत्मविश्वास में कमी - जब बच्चे की जिदंगी का हर फैसला उनके पेरेंट्स करने लगें तो,धीरे-धीरे बच्चा खुद को दूसरों से कमतर समझने लगता है । जिससे उसके आत्मविश्वास में कमी आने लगती है।

4. मानसिक विकार होना - ओवर प्रोटेक्टिव बिहेवियर वाले पेरेंट्स के बच्चों में बार-बार कोई भी काम को करने से पहले रोकने पर, बच्चे में खुद के लिए नकारात्मक विचार आने लगते हैं। जिससे वो डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी का शिकार होने लगते हैं।

5. लोगों से दूरी बनाना - बार-बार हर काम के लिए पेरेंट्स से रोक-टोक और डांट पड़ने के डर से बच्चा लोगों से मिलना-जुलना बंद कर देता है और अकेला रहना ही सही समझने लगता है ।

Next Story
Top