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गले के सभी रोग दूर कर आवाज को सुरीली बनाती है शंख मुद्रा

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के लिए हर जगह तैयारियां हो रही हैं। योग दिवस 2018 का प्रमुख कार्यक्रम उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगा। आज की इस रिपोर्ट में हम आपको एक खास मुद्रा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे किसी भी समय बैठे-बैठे करने से गले से जुड़ी हर समस्या से फायदा मिलेगा।

गले के सभी रोग दूर कर आवाज को सुरीली बनाती है शंख मुद्रा

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के लिए हर जगह तैयारियां हो रही हैं। योग दिवस 2018 का प्रमुख कार्यक्रम उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगा। आज की इस रिपोर्ट में हम आपको एक खास मुद्रा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे किसी भी समय बैठे-बैठे करने से गले से जुड़ी हर समस्या से फायदा मिलेगा।

अच्छी-सुरीली आवाज और बोलने की प्रखर शक्ति हर कोई चाहता है। शंख मुद्रा इसमें सहायक है। इस मुद्रा से गले की ग्रंथियों पर असर पड़ने के कारण स्वर-तंतु ठीक होते हैं, वाणी में मधुरता आती है और वाक्शक्ति भी बढ़ती है।

वक्ताओं और शिक्षकों के लिए यह मुद्रा बेहद उपयोगी है। यदि इस मुद्रा के साथ अलग से केवल पांच मिनट के लिए उज्जायी प्राणायाम और सिंहासन भी कर लिया जाए तो आप आजीवन गले के रोगों से मुक्त रहेंगे और आपकी वाणी के सभी दोष दूर होंगे।

इस मुद्रा से मुट्ठी में अंगूठे का दबाव हथेली के बीच वाले हिस्से पर और मुट्ठी की तीन अंगुलियों का दबाव शुक्र पर्वत पर पड़ता है, जिससे हथेली में स्थित नाभि और थायरॉयड ग्रंथि के केंद्र बिंदु दबते हैं। इसलिए इस मुद्रा से आपकी थायरॉयड और पैरा-थायरॉयड ग्रंथि भी सदैव स्वस्थ रहेंगी।

कैसे करें

पहले बाएं हाथ के अंगूठे को दाएं हाथ की मुट्ठी में बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे को बाएं हाथ की तर्जनी या सबसे बड़ी मध्यमा अंगुली के अग्रभाग से मिलाएं।

बाएं हाथ की चारों अंगुलियां आपस में मिलाकर रखें। इसी प्रकार यही प्रक्रिया दूसरे हाथ से भी कर सकते हैं। जितनी देर सहजता से कर सकें उतनी देर तक इस मुद्रा को करें।

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