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''शनि‍वारवाड़ा'' बाजीराव पेशवा के पराक्रम एवं शौर्य का साक्ष्य

इस किला रूपी महल के निर्माण में 16,110 रुपए का खर्च आया था।

शनि‍वारवाड़ा बाजीराव पेशवा के पराक्रम एवं शौर्य का साक्ष्य
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पुणे. शनिवारवाड़ा बाजीराव पेशवा का राजमहल था जो उन्होंने अपने शासन काल में बनवाया था। इस इमारत को बहुत ज्यादा ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है। पुणे में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतें हैं जिनमे शनिवारवाड़ा अत्यधिक महत्व का स्थान रखता है। बाजीराव पेशवा के पराक्रम एवं शौर्य से भरपूर जीवनकाल का ये राजमहल साक्षी है। यहां पर कदम रखते ही एक अलग ही प्रकार की अद्भुत अनुभूति होती है।
बाजीराव पेशवा का जीवन हमें प्रेरणा देता है। महत्वाकांक्षा से ओतप्रोत व्यक्ति किस प्रकार अपने जीवन को उपलब्धियों से भरपूर बना सकता है इस बात के लिए बाजीराव पेशवा का जीवन एक उदहारण है। शनिवारवाड़ा के कई हिस्से इतने प्रेरणादायी प्रतीत होते हैं जैसे कहना चाहते हों कि हे वीरों अपना साधारण जीवन छोड़ कर एक महत्वकांक्षी जीवन अपनाओ।
शनिवारवाड़ा की नींव बाजीराव प्रथम ने शनिवार के दिन 10 जनवरी,1730 में रखी थी। इसलिए इसका नाम शनिवार वाड़ा पड़ा। उस समय इस किला रूपी महल के निर्माण में 16,110 रुपए का खर्च आया था। इस महल में एक साथ 1000 से ज्यादा लोग रह सकते थे। करीब दो साल बाद 22 जनवरी 1732 ई. में इस महल में हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक गृह प्रवेश किया गया। महल की दीवारों पर महाभारत और रामायण काल के दृश्य बने हुए हैं। जो इस महल को सब से खास बनाते हैं।

यह किला 1818 तक पेशवाओं की प्रमुख गद्दी रहा था। लेकिन इस किले के साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा है। इस किले में 30 अगस्त 1773 की रात को 18 साल के नारायण राव, जो की मात्र 16 साल की उम्र में मराठा साम्राज्य के पांचवे पेशवा बन थे, जिसकी षड्यंत्रपूर्वक ह्त्या कर दी गई थी।
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