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महिलाओं में छिपी अद्भुत शक्ति की कहानी है, ''सेवन डोर्स ऑफ सेटन''

''सेवन डोर्स ऑफ सेटन'' नामक इस नॉवेल में महिलाओं की वास्विक शक्ति को दर्शाया गया है। गुलामी की जंजीर में बंधी हुई एक लड़की जो अपने ताकतों से बिल्कुल अनभिज्ञ है, अपने कबीले को शैतानी पंजों से मुक्त कराती है।

महिलाओं में छिपी अद्भुत शक्ति की कहानी है, सेवन डोर्स ऑफ सेटन
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Seven Doors of Satan

वर्तमान समय में महिलाएं समान अधिकार के लिए पूरी दुनिया में अपनी आवाजें बुलंद कर रही हैं। अपनी क्षमता के बदौलत ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया की तस्वीर बदल रही हैं।

लेकिन फिर भी उन्हें अपने हर फैसले के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाओं की ऐसी ही परिवेश को काल्पनिक दुनिया में पिरोकर पूजा मिश्रा ने अपने पहले नॉवेल 'सेवन डोर्स ऑफ़ सेटन, में पेश किया है।

महिलाओं की वास्विक शक्ति को दर्शाती 'सेवन डोर्स ऑफ़ सेटन'

दरअसल 'सेवन डोर्स ऑफ सेटन' नामक इस नॉवेल में महिलाओं की वास्विक शक्ति को दर्शाया गया है। गुलामी की जंजीर में बंधी हुई एक लड़की जो अपने ताकतों से बिल्कुल अनभिज्ञ है, अपने कबीले को शैतानी पंजों से मुक्त कराती है।

यह कहानी किसी करिश्माई रेगिस्तान में रची गई है जहां के बाशिंदे विभिन्न कलाओं और तकनीकि में सिद्धहस्त हैं। वे अत्याधुनिक तकनीकि के मामले में आज दुनिया से काफी आगे है। शहरी वातावरण के सामने उनके आगे एक अलग ही दुनिया है जो लोगों की नजरों से ओझल है।

ऐसी ही जादुई संसार में जब सेटन अपना साम्राज्य फैलाना चाहता है तो उसका रास्ता रोककर खड़ी हो जाती है गुलाम ऑरा जिसकी आँखों में आजादी के सपने हैं। लेखिका पूजा मिश्रा का इस नॉवेल के बारे में कहना है कि हमारी दुनिया से परे भी एक दुनिया है जो आम लोगों की नजरों से दूर है।

सेवन डोर्स ऑफ सेटन: ये है कहानी

ये कहानी इसी दुनिया में रची-बसी किंगपिन और हिदाफी कबीलों के मध्य की है। जहां किंगपिन ट्राइब शांतिप्रिय है और कई कलाओं और विधाओं में माहिर है। वहीं हिदाफी एक जंगपसंद कबीला है जिसका मुखिया दुष्ट कैलैमिटस है।

कैलेमिटस की नजर किंगपिन ट्राईब की ऑरा नाम की गुलाम पर है जिसके पास अलौकिक शक्ति है लेकिन वो अपने ताकतों से अनभिज्ञ है। कैलैमिटस के साथ शांति बनाए रखने के लिए किंगपिन ऑरा को उसे सौंप देते हैं।

परंतु ऑरा कैलैमिटस की चाल को समझ जाती है कि वो शांति का नहीं बल्कि शैतान का दूत है जो उसके माध्यम से पूरी दुनिया पर अपना एकक्षत्र राज करना चाहता है। ऑरा के लिए ये जंग आसान नहीं है क्योंकि इसमें जीत उसकी ताकत नहीं बल्कि त्याग से ही संभव है जिसमें उसकी जान दांव पर लगी है।

कौन हैं पूजा मिश्र

मिर्जा गालिब और प्रेमचंद को पसंद करने वाली युवा लेखिका पूजा मिश्रा ने कॉलेज की पढ़ाई के साथ यह नॉवेल लिखा है। उनका कहना है कि ये सफर काफी मुश्किल रहा है।

उनका कहना है कि लिखना बिल्कुल भी आसान काम नहीं है, दो साल तक मैंने खुद को कमरें में बंद रखा और सिर्फ लिखने पर ध्यान दिया। यहां तक कि घरवाले भी शक करने लगे कि यह लड़की अपने कमरे में ही बंद क्यों रहती है, कुछ गड़बड़ तो नहीं? पूजा ने कहा कि इस किताब में सात साल से 70 साल के इंसान को अपनी छवि किसी न किसी चरित्र या स्थिति-परिस्थिति में अवश्य दिखेगी।

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