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Rose Day Poem : ये हैं रोज डे की टॉप 5 कविता

Rose Day Poem : 7 फरवरी को रोज डे है और 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे है। गूगल पर रोज डे (Rose Day) तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग गूगल पर रोज डे पर कविता (Rose Day Poem), रोज डे की शायरी (Rose Day Shayari / Rose Day Ki Shayari), रोज डे की फोटो (Rose Day Images) और रोज डे पर शायरी (Rose Day Par Shayari) जमकर सर्च कर रहे हैं। ऐसे में रोज डे की टॉप 10 शायरी (Rose Day Top 10 Shayari) हम आपके लिए लाये हैं और अगर आप अपने लवमैट को रोज डे पर शायरी भेजने या रोज डे पर कविता (Rose Day Poem) का प्लान बना रहे हैं तो ये आपके लिए मददगार साबित होंगी।

Rose Day Poem : ये हैं रोज डे की टॉप 5 कविता
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Rose Day Poem : 7 फरवरी को रोज डे है और 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे है। गूगल पर रोज डे (Rose Day) तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग गूगल पर रोज डे पर कविता (Rose Day Poem), रोज डे की शायरी (Rose Day Shayari / Rose Day Ki Shayari), रोज डे की फोटो (Rose Day Images) और रोज डे पर शायरी (Rose Day Par Shayari) जमकर सर्च कर रहे हैं। ऐसे में रोज डे की टॉप 10 शायरी (Rose Day Top 10 Shayari) हम आपके लिए लाये हैं और अगर आप अपने लवमैट को रोज डे पर शायरी भेजने या रोज डे पर कविता (Rose Day Poem) का प्लान बना रहे हैं तो ये आपके लिए मददगार साबित होंगी।

Rose Day Poem / रोज डे पर कविता

नैनों के अगणित सपनों-सी

शून्य धरा पर वह अपनों सी

दिव्य ज्योति की अनुपम आभा

में गुंजित होती नगमों-सी

उम्मीदों के संग सपनों से

खेले आंख मिचौली है

बूझ रहा हूँ जिसको हर पल

एक अनबूझ पहेली है

Rose Day Poem / रोज डे पर कविता

गहन लगन में वह डूबी-सी

पथ बाधाओं से ऊबी-सी

हर लेती अनुराग पिपासा

ऐसी है उसमें खूबी-सी

जीवन की कटुता में वो ही

इक मीठी-सी ढेली है

बूझ रहा हूँ जिसको हर पल

एक अनबूझ पहेली है

Rose Day Poem / रोज डे पर कविता

भावुकता उर में भरती-सी

कष्ट सभी के वह हरती-सी

पर व्याकुलता के सागर में

पल-पल रहती वह तरती-सी

स्वप्न नगर से आखिर क्यों वह

नीचे गई धकेली है

बूझ रहा हूँ जिसको हर पल

एक अनबूझ पहेली है

Rose Day Poem / रोज डे पर कविता

वह अंतर्मन की ज्वाला-सी

उन्मादित होती हाला-सी

जीवन के पलकों पर सजती

नयन नीर की वह माला-सी

उन अधरों पर बसी तृषा की

हाला मैंने पी ली है

बूझ रहा हूँ जिसको हर पल

एक अनबूझ पहेली है

Rose Day Poem / रोज डे पर कविता

गंगा के निर्मल जल-सी

चंचल लहरों की कलकल-सी

निर्झरिणी के अभिवादन में

है नतमस्तक वह द्रुमदल-सी

तन सोना, मन हीरा-से

वह लगती बड़ी रुपहली है

बूझ रहा हूँ जिसको हर पल

एक अनबूझ पहेली है

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