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रिश्तों की दूरियों को खत्म करने के लिए अपनाएं ये टिप्स...

रिश्ता कोई भी हो मधुर-प्रगाढ़ तभी बनता है, जब दोनों ओर से समान और सही ढंग से संवाद बना रहे। दांपत्य जीवन में यह बात और मायने रखती है। इसलिए बातों के माध्यम से एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान और उन्हें समझने का प्रयास निरंतर करते रहना जरूरी है।

रिश्तों की दूरियों को खत्म करने के लिए अपनाएं ये टिप्स...

आभा की बड़ी बहन मनोरमा उसके ससुराल आई हुई थी। उसने अनुभव किया कि आभा इन दिनों खिन्न-सी है। छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ा जाना, बिना जवाब दिए निकल जाना, उसकी आदत में शामिल हो रहा है। दीदी के कारण पूछने पर आभा ने बताया कि उसका पति सुधीर उसकी बात ही नहीं सुनता। ऑफिस से आने के बाद टीवी, मोबाइल में व्यस्त हो जाता है। इस संवादहीनता के कारण वह अकेलेपन का शिकार होती जा रही है। देखा जाए तो यह समस्या केवल आभा-सुधीर की नहीं बल्कि कई युगलों की है।

बना रहे संवाद

आज की भाग-दौड़ वाली जीवनशैली में लोगों के पास समय का अभाव होता जा रहा है। उस पर मोबाइल की लत ने स्थिति और विकट बना दी है।
परिणामस्वरूप रिश्तों में खाद-पानी का काम करने वाली आपसी बातचीत कम होने से, उसकी जड़ें दरकने लगती हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि संवाद की टूट रही लड़ी को जोड़ा जाए। अपने साथी पर सारा दोष डालने से पहले प्रयास अपने स्तर से किया जाए क्योंकि हो सकता है कि चीजें जैसी आपको दिख रही हैं, वैसी न हों! इसलिए अपनी बात सही तरीके से और सही समय पर करें।

भाषा हो सही

कई बार गुस्से में आकर पति या पत्नी अपने पार्टनर को आपत्तिजनक भाषा में कोई बात बोल देते हैं, जो सही नहीं है। इसलिए ऐसी भाषा से बचें और
चीजों को सुलझने का भी अवसर दें। संयम से, धीरे-धीरे शिष्ट ढंग से कही गई बात सामने वाले पर ज्यादा गहरा असर करती है। मन में गुस्सा हो तो चुप रहना ही उचित होता है।

एक-दूसरे को श्रेय दें

आपके बात करने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि आपका काम भी बन जाए और सामने वाले को बुरा भी न लगे। जैसे अगर आपको खाना बनाने में अपने पार्टनर की सहायता चाहिए तो इसको ‘तुम बैठे ही रहना, मेरी परवाह तो कभी रहती ही नहीं!’ के बदले यदि ‘जरा दाल को देखना, तब तक मैं रोटी की तैयारी कर लूंगी’ कहना ज्यादा उचित हो सकता है। यही नहीं आपके साथी ने जब कभी आपका सहयोग किया तो इसका श्रेय उसे देने में कंजूसी न करें।

जिद से रहें दूर

अपनी हर बात को मनवाने की जिद न करें। क्योंकि राजी न होने का मतलब ये कतई नहीं होता कि सुनने वाले को आपके भावनाओं की कद्र नहीं है। हर किसी का अपना-अपना नजरिया होता है। इसको जितनी जल्दी स्वीकार कर लेंगी, परेशानियां आधी तो उसी समय खत्म हो जाएंगी।

फीडबैक लेती रहें

किसी भी रिश्ते में बिना रुके अपनी ही कहते जाना सही नहीं होता। अपने साथी से पूछते रहें कि क्या उसने आपके सभी बिंदुओं को सुना? यदि हां तो उन पर उसकी क्या राय है? यदि आपको भी उनकी कही कोई बात समझ में नहीं आई हो तो सवाल पूछने से कतराएं नहीं। इससे सामने वाले को भी अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा और आप भी अपने मन की कह सकेंगी। इस तरह एक-दूसरे को समझने से दांपत्य के रिश्ते में कभी कोई खटास नहीं आएगी।
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