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अगर आप हैं स्ट्रोक की बीमारी से पीड़ित, तो खो सकते हैं मानसिक संतुलन

ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के रिसर्चर्स ने दुनिया भर के 3.2 मिलियन स्ट्रोक और डिमेंशिया के रिस्क वाले लोगों का अध्ययन किया और पाया कि स्ट्रोक और डिमेंशिया के बीच गहरा संबंध है।

अगर आप हैं स्ट्रोक की बीमारी से पीड़ित, तो खो सकते हैं मानसिक संतुलन
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ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के रिसर्चर्स ने दुनिया भर के 3.2 मिलियन स्ट्रोक और डिमेंशिया के रिस्क वाले लोगों का अध्ययन किया और पाया कि स्ट्रोक और डिमेंशिया के बीच गहरा संबंध है।

दरअसल डिमेंशिया किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं, बल्कि कई लक्षणों के समूह का नाम है, जो मस्तिष्क की हानि से संबंधित है। “Dementia” शब्द “de” (without) और “mentia” (mind) को जोड़ कर बनाया गया है। इसमें व्यक्ति का मानसिक संतुलन तक बिगड़ सकता है।

ब्लड प्रेशर,डायबिटीज और कार्डियोवेस्कुलर से संबंधित बीमारियों से तो डिमेंशिया होने का जोखिम रहता ही है, साथ ही स्ट्रोक से भी डिमेंशिया का खतरा रहता है। पहले किए गए शोध को आगे बढ़ाते हुए हाल में किए गए अब तक के सबसे विस्तृत अध्ययन में स्ट्रोक और डिमेंशिया के बीच संबंध उजागर हुआ है।

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शोध का दावा : स्ट्रोक से दोगुना हो जाता है डिमेंशिया का खतरा

1.शोधकर्ताओं ने दोनों के बीच संबंध को समझने के लिए 36 अध्ययन किए, जिसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिनको स्ट्रोक की प्रॉब्लम थी। इसमें 1.9 मिलियन लोगों के डाटा का अध्ययन किया गया।

2.यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के डॉक्टर लियाना लॉरिडा का कहना है, ‘अध्ययन के दौरान हमने पाया कि स्ट्रोक से ग्रसित लोगों में डिमेंशिया का खतरा 70 फीसदी तक बढ़ जाता है।

3.वहीं हाल में हुई स्ट्रोक प्रॉब्लम से डिमेंशिया का जोखिम दोगुना हो जाता है। हालांकि स्ट्रोक की रोकथाम के लिए किए गए उपाय और स्ट्रोक के बाद की देखभाल से डिमेंशिया का खतरा कम हो जाता है।

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4.वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार प्रत्येक वर्ष 15 मिलियन लोग स्ट्रोक के शिकार होते हैं। वहीं दुनियाभर में 50 मिलियन लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। इसके वर्ष 2050 तक बढ़कर 130 मिलियन हो जाने का अनुमान है।

लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें स्ट्रोक आने के बावजूद डिमेंशिया नहीं हुआ। ऐसे में स्ट्रोक के बाद देखभाल और जीवनशैली की भूमिका पर भी शोध किए जाने की आवश्यकता है।

5.यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के डॉक्टर डेविड लेवेलिन का कहना है कि डिमेंशिया के एक तिहाई मामले को रोका जा सकता है। हालांकि इस आंकड़े को स्ट्रोक से होने वाले डिमेंशिया के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।

शोध से जो निष्कर्ष निकले हैं, उनके अनुसार डिमेंशिया के एक तिहाई से अधिक मामलों की रोकथाम की जा सकती है। ब्रेन में ब्लड के सुचारु प्रवाह पर बल देकर दुनिया में डिमेंशिया के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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