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कंपैरिजन करने के होते हैं बहुत नुकसान, जानें इसके साइड इफेक्ट्स

दूसरों से इंस्पायर होना, मोटिवेट होना अच्छी बात है। लेकिन किसी से अपना कंपैरिजन करना बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए अगर आपको भी दूसरों से खुद का कंपैरिजन करने की आदत है तो इसे बदलना जरूरी है।

कंपैरिजन करने के होते हैं बहुत नुकसान, जानें इसके साइड इफेक्ट्स

शैली और अर्पिता स्कूल टाइम की फ्रेंड हैं। दोनों की दोस्ती सालों से बरकरार है। लेकिन शैली की पुरानी आदत रही है कि वह अर्पिता से हर बात में अपना कंपैरिजन करती है। वह सोचती है कि अर्पिता ज्यादा स्मार्ट, सक्सेसफुल है। जबकि अर्पिता के मुकाबले उसने कुछ अचीव नहीं किया। इस वजह से अकसर वह परेशान हो जाती है। इस तरह की समस्या कई लोग फेस करते हैं, जो अपने फ्रेंड्स, सिबलिंग्स, कुलीग्स से अपना कंपैरिजन करते हैं। धीरे-धीरे यह सोच उनका बहुत नुकसान करती है। इस आदत से जितनी जल्दी छुटकारा पाया जाए, उतना अच्छा है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों को अहमियत देनी चाहिए।




खुद को न समझें कमजोर

कई लोग मन ही मन सोच लेते हैं कि दूसरे लोग उन्हें कमजोर और कम प्रतिभाशाली समझते हैं। अगर आपके मन में यह हीन भावना आ गई तो आप दूसरों के सामने जाने या अपनी क्षमता का सही प्रदर्शन करने में हिचकने लगेंगी। यह सोच तरक्की की सबसे बड़ी बाधा होती है। इसलिए दूसरों से तुलना करते हुए आत्महीनता न पालें। इसकी बजाय खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करें, अपनी स्किल्स बढ़ाएं।




दूसरों की तरह न बनें

खुद से सवाल कीजिए आपको दूसरे जैसा क्यों बनना चाहिए? हर इंसान में कुछ ऐसी खासियतें होती हैं, जो दूसरों में नहीं होती। जैसे आप कुकिंग में इतनी माहिर हैं कि घर के सभी सदस्य आपके हाथ का बनाया खाना चाव से खाते हैं। लेकिन जिनसे अपनी तुलना करके आप परेशान हो रही हैं, भले ही वह किसी जॉब में कितनी परफेक्ट क्यों न हो, आपकी तरह भोजन अच्छा नहीं बना सकती है। कहने का मतलब है कि आप अपने आप में खास हैं, आपकी क्वालिटीज दूसरों से अलग हैं। जब इस बात को आप स्वीकार कर लेती हैं तो सुकून से रह पाती हैं।




अपनी उपलब्धियों के बारे में सोचें

दूसरों ने बहुत कुछ हासिल कर लिया और आपने कुछ भी हासिल नहीं किया, अगर आप ऐसा सोचती हैं तो गलत है। हर व्यक्ति अपने हिस्से में कई छोटी-बड़ी उपलब्धियां रखता है। आप घर का खर्च ठीक से चला रही हैं, सेहतमंद हैं, आपके बच्चे पढ़ने में औसत से अच्छे या आपके पास पसंद की नौकरी है तो आप बहुत सारे दूसरे लोगों से कहीं बेहतर स्थिति में हैं। इसलिए कभी भी दूसरों की उपलब्धियों से अपनी उपलब्धियों की तुलना न करें। इसकी बजाय अपनी एचीवमेंट्स पर प्राउड फील करें।




खास दोस्तों से बात करें

जब भी आप कंपैरिजन की वजह से लो फील करें या दूसरे की तुलना में खुद को नकारा समझकर उदास हो जाएं तो अपने खास दोस्तों से बात करें। उन्हें ईमानदारी से अपनी अच्छाई, बुराई, कमजोरी और ताकत बताने को कहें। इससे आप वास्तविकता से परिचित हो जाएंगी। दोस्तों से हुए इस डिस्कशन का फायदा उठाएं और अपनी कमियों को दूर करते हुए अपनी क्वालिटीज को लोगों के सामने खुद उजागर करें।

कहने का सार यही है कि तुलना या अपनी कमियों का जिक्र करने से नेगेटिविटी बढ़ती है। इसके बजाय सकारात्मक सोच रखें। अगर खुद में कोई कमी महसूस होती है तो उसमें सुधार लाने की कोशिश करें। इस तरह आप अपने अंदर बदलाव महसूस करने लगेंगी। धीरे-धीरे दूसरों से कंपैरिजन करने की आपकी आदत भी दूर होती जाएगी।

लेखिका - अंजू जैन

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