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Relationship Help - बच्चों के आपसी तकरार से हैं परेशान, तो करें ये छोटा सा काम

Relationship Help : टीनएज उम्र का बहुत ही नाजुक दौर होता है। बच्चों में हार्मोनल चेंज के साथ शारीरिक-मानसिक बदलाव आते हैं। बच्चे अपने आप को बड़ा समझने लगते हैं, वे आजादी और एक प्राइवेसी चाहते हैं, जबकि पैरेंट्स उन्हें अभी भी अपनी कड़ी निगरानी रखना चाहते हैं। नतीजा यह होता है, दोनों के बीच वाद-विवाद होते हैं, जबकि बच्चे की मन: स्थिति को समझते हुए पैरेंट्स उसके साथ सही ढंग से पेश आएं किसी भी प्रकार की टकराहट-तनाव से बचा जा सकता है।

Relationship Help - बच्चों के आपसी तकरार से हैं परेशान, तो करें ये छोटा सा काम
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Relationship Help For Parents to Control Kids Fight In Hindi

Relationship Help : अनिता देख रही है उसका सोलह वर्षीय बेटा गौरव आजकल उसकी सुनता नहीं, कुछ कहो पलट के जवाब दे देता है, 'मम्मी, कितना कंट्रोल में रखेंगे आप लोग? पापा पाएं तो पैरों में बेड़ियां डाल दें। मैं अब बड़ा हो गया हूं, मेरी भी अपनी लाइफ है। मैं नादान नहीं हूं, जो अपना बुरा-भला न सोच सकूं।' कुछ ऐसे ही अंदाज में मयूरी भी अपने मम्मी-पापा से पेश आती है। कुछ टोक दो तो कसकर बिगड़ जाती है।

एक दिन घर देर से पहुंची तो मम्मी ने टोक दिया, 'रात दस बजे घर लौटने का कोई समय है। अंधेरा होते ही घर में नजर आया करो।' उधर से पापा भी बोले, 'इस तरह लड़कियों का इतनी रात गए घूमना अच्छा नहीं।' बस फिर क्या था, मयूरी जोर से उखड़ गई, 'आप लोग मुझे क्या समझते हैं छह साल की बच्ची हूं, सत्तरह साल की हो रही हूं। अपना अच्छा-बुरा खूब समझती हूं। मुझे अपना करियर बनाना है, इसके लिए घर बैठे कुछ नहीं पता चलने वाला।

दस लोगों से मिलना होगा, जानना-समझना होगा। लड़कियां कहां से कहां पहुंच रही हैं, क्या नहीं कर रही हैं और आप लोग चाहते हैं कि मैं गूंगी गुड़िया बनकर घर में बैठी रहूं, तो यह मुमकिन नहीं हैं।' ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं हैं, ऐसे डायलॉग्स उन घरों में खूब सुनने को मिल जाएंगे, जहां टीनएज बच्चे हैं। सवाल है, पैरेंट्स और टीनएज बच्चों के बीच इस तरह की टकराहट किन कारणों से होती है, इससे कैसे बचा जा सकता है?

समझें बच्चे की मन:स्थिति

टीनएज बच्चों के स्वभाव में जल्दी-जल्दी आने वाले बदलाव की वजह से पैरेंट्स उन्हें आसानी से डिसिप्लीन में नहीं रख पाते। इससे वे अपने बच्चों से परेशान रहते हैं। बच्चों से परेशान रहने के कारण पैरेंट्स उनसे जरा-सी बात पर वाद-विवाद करने लगते हैं। उन्हें डराने-धमकाने की गलती करते हैं। उनके तमाम कामों में गलतियां निकालने की गलती करते हैं। इन सब बातों से बच्चे भी परेशान हो जाते हैं।

पैरेंट्स होने के नाते यह समझिए कि आपका बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, वह आपके और दूसरों के साथ भी एडजस्ट करना सीखता है। हम यह न भूलें कि टीनएज एक संधिकाल है। इस दौरान जब बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से विकसित होता है, अगर उसके साथ छोटे बच्चे की तरह व्यवहार किया जाए तो वह इसका विरोध करता है। टीनएज में अगर बच्चे को ज्यादा कुछ समझाया जाए तो बुरा मानता है, गुस्सा भी हो जाता है।

वह जताना चाहता है कि वह आपकी मदद के बिना भी अपने कामों को करने में सक्षम है। आपका आदेश और कमांड उसे इस बात का अहसास दिलाते हैं कि आप अभी भी उसके साथ बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं। जबकि वह उम्मीद करता है कि उसके साथ बड़ों की तरह व्यवहार किया जाए।




उन्हें चाहिए प्राइवेसी

टीनएज में बच्चे अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्हें नहीं लगता कि आपको हर बात बतानी चाहिए। वह इस बात पर भी गुस्सा हो सकते हैं कि आप उस पर विश्वास क्यों नहीं करते? बच्चे आप पर इस बात का आरोप लगा सकते हैं कि आप उन्हें समझने के लिए तैयार नहीं हैं?

उनकी इन तमाम क्रिया-कलापों का मकसद यह होता है कि आप समझें कि वे अब बड़े हो चुके हैं। टीनएज में बच्चे अपना ज्यादा समय दोस्तों के साथ गुजारना चाहते हैं। वे अपने दोस्तों के साथ रिश्तों में आपकी कोई दखलंदाजी नहीं चाहते। बच्चे अपने रिश्ते अपने ढंग से जीना चाहते हैं।

टीनएज में इनसिक्योर फीलिंग्स

टीनएज बच्चों के दिलो-दिमाग में होने वाले हार्मोनल चेंजेस के कारण कई तरह की इनसिक्योर फीलिंग्स पैदा होती हैं। उनके पास इन सबको लेकर तमाम सवाल होते हैं। इन उलझनों के बीच बच्चे चुप रहने लगते हैं लेकिन पैरेंट्स यह सब नहीं समझते। उन्हें लगता है कि उनका बच्चा अचानक कम बातचीत करने लगा है। इससे माता-पिता के मन में कई शंकाएं जन्म लेती हैं। ये आशंकाएं बच्चे और पैरेंट्स के बीच में मतभेद पैदा करती हैं। बच्चे के किसी गलत राह में जाने की आशंका से मां-बाप उससे अलग किस्म का व्यवहार करते हैं।

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