Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Parenting Tips: रखें इन तीन बातों का ध्यान, बच्चा कभी नहीं बनेगा शैतान

Parenting Tips : कई पैरेंट्स बच्चों के गलत व्यवहार और जिद्दीपन से परेशान रहते हैं। उन्हें समझ नहीं आता है कि बच्चे ने छोटी सी उम्र में ऐसा व्यवहार करना कहां से सीखा? लेकिन वे अपने व्यक्तिगत व्यवहार और परवरिश के तरीकों पर गौर नहीं करते हैं। जानिए, कैसे माता-पिता का व्यवहार और परवरिश का गलत तरीका, बच्चे के व्यवहार को प्रभावित करता है।

Parenting Tips: रखें इन तीन बातों का ध्यान, बच्चा कभी नहीं बनेगा शैतान
X

Parenting Tips : कई बच्चे बात-बात पर रोते हैं, जिद करते हैं, पैरेंट्स का कहना नहीं मानते हैं, दूसरों के सामने तेज आवाज में बात करते हैं। उनके इस तरह के व्यवहार पर पैरेंट्स अकसर दूसरों के सामने शर्मिंदा होते हैं, इसके लिए बच्चे को ही दोषी ठहराते हैं। कई बार तो पैरेंट्स इस तरह के व्यवहार पर बच्चों को कड़ी सजा भी देते हैं।

लेकिन ऐसा करते समय पैरेंट्स भूल जाते हैं कि बच्चे के इस व्यवहार की वजह घर में ही छिपी होती है। बच्चा अपने आस-पास और घर के माहौल में जो कुछ देखता है, उसी का अनुसरण करता है। ऐसे में माता-पिता को पहले अपना व्यवहार ठीक रखना चाहिए, बच्चों के लिए आइडल बनना चाहिए। इसके अलावा बच्चे के बुरे व्यवहार को सुधारने के लिए कुछ जरूरी बातों पर अमल करें।

बच्चे के सामने न लड़ें

बच्चे की परवरिश के शुरुआती साल बहुत अहम होते हैं। इस दौरान अगर वह घर का माहौल प्यार और अपनेपन से भरा देखता है तो उसका व्यवहार भी ऐसा ही बनता है। वहीं अगर बच्चा अपने घर-परिवार के लोगों को, माता-पिता को लड़ाई-झगड़ा करते देखता है तो इससे तनावग्रस्त रहने लगता है।

ऐसे में पैरेंट्स को चाहिए कि कभी भी बच्चे के सामने अपने मनमुटाव जाहिर ना करें, ना ही झगड़ा या बहस करें। पैरेंट्स को चाहिए कि बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण का जो दायित्व है, उसे वह अच्छी तरह निभाएं। बच्चे का खान-पान ही नहीं उसकी आदतें, व्यवहार, बात करने का तरीका और उसके विचारों को नई दिशा देने का काम करें।

प्यार का सहारा लें

बच्चे की शारीरिक ही नहीं बल्कि उसकी मानसिक जरूरतों को भी मां-बाप को समझना चाहिए। अगर उसे किसी बात से रोकना हो तो उसे डांटने-डपटने की बजाय प्यार से उस काम को ना करने का या उससे होने वाले नुकसान के बारे में बताना चाहिए। बच्चा अगर कोई गलती करता है तो उसका अपमान नहीं करना चाहिए।

पैरेंट्स को उसकी गलती पर उसे बुरा साबित करते हुए अपने से अलग-थलग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय उससे हुई गलती को, उसके साथ मिलकर सुधारना चाहिए। इससे अगली बार वह अपनी गलती को छिपाएगा नहीं बल्कि सामने से आकर बताएगा। ऐसा होने पर कभी भी गलत व्यवहार करने का ख्याल उसके दिमाग में नहीं आएगा।

हर जिद पूरी न करें

घर के तनावग्रस्त माहौल में या ज्यादा लाड़-प्यार में बच्चा अगर जिद्दी हो जाता है तो उसे प्यार से सुधारने का काम भी पैरेंट्स पर ही है। लेकिन ऐसा अकसर होता नहीं है। जिन घरों के बच्चे जिद्दी होते हैं, उसका कारण भी माता-पिता होते हैं। दरअसल, बच्चे के थोड़ा सा रोने पर, गुस्सा होने पर, जिदकरने पर माता-पिता या घर के लोग, उसकी बात मान लेते हैं।

जब कभी नहीं मानते तो बच्चा अशिष्ट व्यवहार करने लगता है। जबकि होना यह चाहिए कि उसकी बात मानी नहीं जा सकती तो उसके लिए तर्क देते हुए पैरेंट्स मना करें। अपनी बात मनवाने के लिए अगर बच्चा जिद करता है या रोता है औरउसकी मांग गलत हो तो थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए। इससे बच्चे को यह जाहिर होगा कि वह रोकर अपनी बात नहीं मनवा सकता।

इससे अगली बार वह आपसे गलत बात पर जिद नहीं करेगा। इसके अलावा उसके जिद्दी स्वभाव को बदलने के लिए उसके साथ संवाद बनाकर रखें। इन सभी बातों का ख्याल रखकर पैरेंट्स, बच्चे के बुरे व्यवहार में बदलाव ला सकते हैं, ऐसा होने पर ही उसके व्यक्तित्व का सही, सकारात्मक विकास होगा।

- नीलम अरोड़ा

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story