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सावधान ! अगर आपका बच्चा भी देखता है डरावनी और हिंसक चीजें, तो जानें इसके नुकसान और रोकने का तरीका

Parenting Tips: बच्चों का कभी-कभी गुस्सा करना सामान्य बात हो सकती है। लेकिन वह लगातार ही वॉयलेंट, एग्रेसिव बिहेव करे तो इसके पीछे हॉरर-वॉयलेंट कंटेंट जिम्मेदार हो सकता है। जानिए, किस तरह ऐसा कंटेंट बच्चों के बिहेवियर पर बुरा असर डालता है और इससे बच्चों को दूर कैसे रखा जाए?

सावधान ! अगर आपका बच्चा भी देखता है डरावनी और हिंसक चीजें, तो जानें इसके नुकसान और रोकने का तरीका
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Parenting Tips: How to children away from Horror-Violent Content and its Side Effects

Parenting Tips: पिछले कुछ समय में बच्चों में वॉयलेंट बिहेवियर बढ़ता जा रहा है। व्यवहार विशेषज्ञ और मनोविज्ञानी इसकी सबसे बड़ी वजह हॉरर-वॉयलेंट वीडियो गेम्स, फिल्मों और टीवी सीरियल्स को बताते हैं। उनका कहना है कि पैरेंट्स का बच्चों पर ध्यान न देने, स्कूल में टीचर्स का घटता अपनेपन का व्यवहार, बच्चों का कम होता सोशल इंटरेक्शन भी इसकी वजह है। जब वे अकेले हो जाते हैं तो टाइम पास करने के लिए दिन-रात स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं, जहां उन्हें हॉरर-वॉयलेंट फिल्म, टीवी सीरियल और वीडियो गेम्स आसानी से देखने को मिल जाते हैं। जल्दी ही बच्चों को इस तरह के कंटेंट की लत लग जाती है। लेकिन बच्चों को इस तरह के कंटेंट से दूर रखना जरूरी है, वरना उनकी लाइफ पूरी तरह डिस्टर्ब हो सकती है, उनके बिहेवियर पर बहुत ही नेगेटिव असर पड़ सकता है।




होती हैं कई समस्याएं

एग्रेशन : मनोविज्ञानी अल्बर्ट बंडूरा ने सबसे पहले 1961 में अपनी रिसर्च के बाद मीडिया वॉयलेंस को बच्चों के बिगड़ते स्वभाव से जोड़ा था। उन्होंने अपने शोध में पाया कि बच्चे अपने फेवरेट हीरो की नकल करना चाहते हैं। इसीलिए खेलकूद के दौरान वे अपने साथियों पर हावी होने और उन पर अपना रौब जमाने की कोशिश करते हैं।

सेंसेटिव नहीं रह पाते : लगातार हिंसक, डरावने सींस, कंटेंट देखते-देखते बच्चे इन्हें देखने के आदी हो जाते हैं। इस वजह से वे सेंसेटिव नहीं रह पाते हैं। किसी तरह की हिंसा करने या देखने में उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगता। ऐसे बच्चों में सिंपैथी की फीलिंग भी खत्म होने लगती है। उन्हें दूसरों के दुख दर्द की परवाह नहीं रहती।

नेगेटिव थिंकिंग : वॉयलेंट, हॉरर कंटेंट देखने से बच्चों में नेगेटिविटी बढ़ती है। उन्हें लगता है कि कोई समस्या होने पर या किसी से मतभेद होने पर वॉयलेंट बिहेव करना ही सॉल्यूशन है। इस बात का उनके बिहेवियर पर बहुत बुरा असर पड़ता है।




संभव है समाधान

कोलकाता के फोर्टिस हॉस्पिटल में सीनियर साइकिएट्रिस्ट डॉ. संजय गर्ग कहते हैं, 'बच्चों को पूरी तरह हिंसक कंटेंट (मूवी/सीरियल) से दूर रखना संभव नहीं लेकिन हम यथासंभव इसे कम करने की कोशिश तो कर ही सकते हैं। इसके लिए हमें सधे हुए शब्दों में उनके सामने वॉयलेंट बिहेवियर के नेगेटिव आस्पेक्ट के बारे में बताना होगा, जो तर्कपूर्ण होना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को टीवी, वीडियो गेम की बजाय इनडोर, आउटडोर गेम्स में बिजी रखना जरूरी है। उनमें क्रिएटिव एक्टिविटीज, हॉबीज को लेकर इंट्रेस्ट भी पैदा करना होगा। पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों को मोटिवेशनल बुक्स, मैगजीन पढ़ने के लिए मोटिवेट करें।'

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