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Mothers Day 2019 : मदर्स डे पर मां की स्वयं से पहचान कराने का तरीका

Mothers Day 2019 : मदर्स डे 2019 में कब मनाया जाएगा (Mother's Day 2019 Date) अगर आप ये नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इस साल 12 मई (12 May)यानि रविवार (Sunday) को मदर्स डे (Mothers Day 2019) मनाया जाएगा। अपनी संतान के लिए मां के प्यार की कोई सीमा नहीं होती। मां के आंचल की छांव तले बच्चे का जीवन जितना सुरक्षित, खुशहाल होता है, उतना और कहीं नहीं होता। एक मां ही है, जो बच्चे की परवरिश करने के लिए अपने सपनों तक को भूल जाती है।

Mothers Day 2019 : मदर्स डे पर मां की स्वयं से पहचान कराने का तरीका
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Mothers Day 2019 : मदर्स डे 2019 में कब मनाया जाएगा (Mother's Day 2019 Date) अगर आप ये नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि इस साल 12 मई (12 May)यानि रविवार (Sunday) को मदर्स डे (Mothers Day 2019) मनाया जाएगा। अपनी संतान के लिए मां के प्यार की कोई सीमा नहीं होती। मां के आंचल की छांव तले बच्चे का जीवन जितना सुरक्षित, खुशहाल होता है, उतना और कहीं नहीं होता। एक मां ही है, जो बच्चे की परवरिश करने के लिए अपने सपनों तक को भूल जाती है।

उसका बस एक ही सपना रह जाता है, बच्चे का खुशहाल जीवन और उसकी सफलता के लिए प्रयास करना। लेकिन एक दौर आता है, जब बच्चे सफल हो जाते हैं, अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं और मां अकेली पड़ जाती है। उसे अपना जीवन उद्देश्यहीन लगने लगता है। यही वो वक़्त है, जब मां को संभालने की जिम्मेदारी, उनके जीवन से खुशियां लाने की कोशिश बच्चों को करनी होती है। साथ ही मां के अधूरे सपनों को पूरा करने की भी कोशिश करनी चाहिए।

सपनों को दें नई उड़ान

बच्चों की परवरिश करने के लिए मां अपने सपनों को भूल जाती है या उन्हें नजरअंदाज कर देती है। इस बात का उन्हें कोई मलाल भी नहीं रहता है। ऐसे में मां को दोबारा से अपने सपनों को पूरा करने के लिए आप मोटिवेट कर सकती हैं।

हो सकता है कि उनके लिए यह मुश्किल भरा काम होगा लेकिन यही वक्त है जब मां के सपनों को नई उड़ान मिल सकती है। बचपन में मां ने जिस तरह हमारे सपनों में रंग भरने के लिए मेहनत की थी, उसी तरह अब उनके सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी हमारी है।

मोटिवेट करें

मां मल्टीटास्कर होती है, वह घर-परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी एक साथ निभाती है। लेकिन बहुत व्यस्त होने के कारण मां को अपने शौक, हुनर को बनाने-संवारने का मौका नहीं मिलता है। जब मां अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर चुकी हैं तो आपको चाहिए कि उन्हें अपने हुनर को, शौक को फिर से संवारने के लिए प्रेरित करें।

जैसे मां यूनीक डिशेज बनाती हैं या आर्ट क्राफ्ट वर्क करती हैं तो उनके ऐसे हुनर को उनकी पहचान बनाने का जरिया बनाएं। वह चाहें तो अपने हुनर को ही बिजनेस, स्टार्टअप के तौर पर स्टैबिलिश कर सकती हैं। इस सफर में कदम-कदम पर मां का साथ दें, उनका आत्मविश्वास बढ़ाएं।

जॉब में दूसरी पारी की शुरुआत

पढ़ी-लिखी महिलाएं भी अपने बच्चों की परवरिश के लिए अकसर जॉब छोड़ देती हैं या जॉब करने की ख्वाहिश होने के बावजूद इसे दबा देती हैं। ऐसे में जब मां सब जिम्मेदारियों को पूरा कर चुकी हैं तो उन्हें अपनी पसंद की जॉब करने के लिए मोटिवेट करें। इससे वह आर्थिक रूप से भी किसी पर निर्भर नहीं रहेंगी और अपने करियर को एक बार फिर से संवार सकेंगी।

सोशल सर्कल में एक्टिव करें

तमाम जिम्मेदारियां निभाते हुए मां घर तक ही सिमट जाती है। उनका सामाजिक मेल-जोल कम हो जाता है। ऐसे में अब अपनी मां को सामाजिक गतिविधियों में ज्यादा से ज्यादा शामिल होने को कहें। किसी सामाजिक संस्था का हिस्सा बनाएं। लोगों से मेल-जोल बढ़ने से उनका व्यक्तित्व भी निखरेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

याद रखिए मां अगर खुश है तो आपका जीवन भी खुशहाल रहेगा, किसी जन्नत से कम नहीं होगा। मशहूर शायर मुनव्वर राना अपने एक शेर में इस बात को बड़ी ही खूबसूरती से बयां करते हैं- 'चलती फिरती आंखों से अजां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है।'

फिटनेस कॉन्शस बनाएं

अकसर मां, बच्चों का ख्याल रखते-रखते अपनी हेल्थ को लेकर लापरवाह हो जाती है। जिससे न सिर्फ वह शारीरिक रूप से अस्वस्थ बल्कि मानसिक अवसाद की भी शिकार हो जाती है। ऐसे में बढ़ती उम्र में मां को किसी फिटनेस क्लब को ज्वाइन करवाएं या किसी योगा की क्लास की मेंबरशिप दिलाएं। इससे वह स्वस्थ भी रहेंगी और अपने समय का सही इस्तेमाल भी कर सकेंगी।

लेखिका - बुशरा फातमा

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