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Karwa Chauth 2019 : करवा चौथ की सरगी में महिलाएं इन चीजों का करें सेवन, दिखें खूबसूरत और एनर्जेटिक

Karwa Chauth 2019 17 अक्टूबर को सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा त्यौहार यानि करवा चौथ मनाया जाएगा। करवा चौथ पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ के दिन पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में सरगी देने और खाने की परंपरा रही है। सरगी, खाने के बाद ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं सरगी का महत्व, सरगी की सामग्री, सरगी खाने का समय और सरगी में क्या खाएं, क्या नहीं...

Karwa Chauth 2019 : करवा चौथ की सरगी में महिलाएं इन चीजों का करें सेवन, दिखें खूबसूरत और एनर्जेटिक
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Karwa Chauth 2019 Sargi In Hindi

Karwa Chauth 2019 : करवा चौथ पर सास की ओर से बहु को दी जाती है, जिसमें सुहाग से जुड़े प्रतीक और खाने की सामग्री शामिल होती हैं। इसलिए करवा चौथ 2019 के आने से पहले हम आपको करवा चौथ की सरगी से जुड़ी जानकारियां सरगी का महत्व, सास के अलावा सरगी कौन दे सकता है, सरगी खाने की वजह के बारे में बता रहे हैं।




क्या होती है सरगी

करवा चौथ के व्रत के शुरु होने यानि सूर्योदय से पहले (सुबह 4 से 5 बजे) किया जाने वाला एक प्रकार का भोजन होता है। जिसे हर सास अपनी बहु को देती है। जिसे बहु सासू मां का आशीर्वाद समझकर अपने करवा चौथ के व्रत का शुभारंभ करती है। सरगी का सेवन करने के बाद अधिकांश महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं।

सास के अलावा कौन दे सकता है सरगी

प्राचीन परंपरा के मुताबिक, सास ही अपनी बहु को करवा चौथ की सुबह या एक दिन पहले अपनी बहु को सरगी आशीर्वाद के रुप में देती है, लेकिन अगर सास न होने या सास के कहीं दूर होने की स्थिति में ये कार्य सास समान कोई बुजुर्ग महिला बहु को सरगी दे सकती है। आज के दौर में सास के घर से दूर होने सरगी का सामान कुरियर कर दें या सरगी के सामान के पैसे बहु को भेज दें। ऐसा करने पर बहु उनसे सरगी लेकर अपनी व्रत शुरु कर सकती है।




सरगी की सामग्री

सरगी में आमतौर पर ड्राईफ्रूट्स (किशमिश,फल, मिठाई, मीठी मट्ठी,काजू, बादाम) आदि रखे जाते हैं। इसके अलावा सरगी में बहु के कपड़े, सुहाग का सामान (बिंदी,मेंहदी, सिंदूर, चूड़िया, पजेब, बिछिए) आदि रखे जाते हैं। इन सब सामग्री का उपयोग करके ही बहु अपने व्रत की शुरुआत करती है।

सरगी खाने की वजह

करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन का निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चन्द्र दर्शन के बाद ही उपवास खोलती हैं। शरीर में पानी की कमी और ऊर्जा की कमी से शरीर में थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। इसलिए शरीर को पूरे दिन एनर्जी को बरकरार रखने और थकान से बचाने के लिए सुबह 4 बजे सरगी खाने की परंपरा बनाई गई।

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