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बुजुर्गों के लिए जरूरी है सोशल लाइफ, नहीं होती मानसिक बीमारी

आपने अक्सर बच्चों को अपनी सोशल लाइफ इंज्वॉय करते हुए देखा और सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों की तरह बुजुर्गों को भी सोशल लाइफ की बेहद जरूरत होती है। ये उनको इमोशनली और फिजीकली स्ट्रांग बनाने में मदद करती है। चलिए आपको बताते हैं बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ के फायदे...

जानिए बुजुर्गों के लिए क्यों जरूरी है सोशल लाइफ
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जानिए बुजुर्गों के लिए क्यों जरूरी है सोशल लाइफ

माता पिता बचपन में बच्चों में सोशल लाइफ को डेवलप करने के अनगिनत प्रयास करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में सामाजिक व्यवहार सोशल लाइफ से जुड़ाव स्थापित करवाना होता था, लेकिन समय के बदलाव और बच्चों के बड़े होने पर पेरेंट्स घर की चारदीवारी में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जो उन्हें मानसिक और शारीरिक रुप से बीमार बनाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में अगर आप अपने पेरेंट्स को हमेशा खुश और स्वस्थ देखना चाहते हैं, तो उनकी सोशल लाइफ की शुरुआत करवाएं। आइए जानते हैं बुजुर्गों की सोशल लाइफ क्यों जरुरी होती है (Importance of Social life for Elderly ?)

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ के फायदे (Benefits of Social Life For the Elderly)

1. नए फ्रेंडस बनते हैं

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि वो घर के अलावा अनजान लोगों को फिर से पहले की तरह नए तरीके से जान और समझ पाते हैं, जिससे वो बच्चों और रिश्तेदारों के अलावा नए दोस्त बना पाते हैं। जो उनके सुख-दुख में साथ देते हैं और उनके बीमार पड़ने पर घर में हालचाल जानने के साथ जरुरत पड़ने पर अस्पताल भी ले जाते हैं। इससे बुजुर्ग लोग खुद को खुश महसूस करते हैं।


2. इमोशनली मजबूत होते हैं

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ का दूसरा बड़ा फायदा ये होता है कि वो अपने आपको इमोशनली फिट महसूस कर पाते हैं, क्योंकि आज के दौर में सभी बच्चे काम पर जाते हैं, जिससेबुजुर्ग घर पर अकेले रह जाते हैं, लेकिन ऐसे में अगर वो कोई सोशल ग्रुप या नए दोस्त बनाते हैं, तो अपनी फीलिंग्स और प्रॉब्लम्स उनसे शेयर करके खुद को हल्का महसूस करते हैं और कई बार गंभीर परेशानियों को भी चुटकियों में सॉल्व कर देते हैं। जिससे तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों के होने का खतरा कम होता है।

3. अकेलापन होता है दूर

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ का तीसरा बड़ा फायदा होता है उनका अकेलेपन को महसूस न करना। जी हां, सोशल लाइफ यानि नए लोगों से मिलने और अपने मनपसंद काम करने से उन्हें अपनी ढलती उम्र में भी बच्चों की कमी कम महसूस होती है। इससे वो डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से खुद को बचा पाते हैं। सोशल गैदरिंग वो हम उम्र के लोगों के अलावा बच्चों और जानवरों के साथ भी अपने टाइम को स्पेंड करना पसंद करते हैं।


4. हॉबीज को इंज्वॉय करने में मिलती है मदद

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ का चौथा फायदा ये होता है कि कई लोगों को पेटिंग बनाने, कुकिंग करने और सिलाई कढ़ाही या मिट्टी की चीजों को बनाने का शौक होता है, जिसे समय की कमी और परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी हॉबीज को इंज्वॉय नहीं कर पाते हैं। ऐसे में बुढ़ापा यानि बढ़ती उम्र उन हॉबीज को इंज्वॉय करने का सबसे बढ़िया समय होता है, ऐसे में सोशल लाइफ की मदद मिलना सोने पर सुहागा साबित होता है।

5. शारीरिक रुप से बनते हैं मजबूत

बुजुर्गों के लिए सोशल लाइफ का पांचवा फायदा ये होता है कि वो मानसिक रुप के साथ शारीरिक रुप से भी मजबूत बन सकते हैं। बढ़ती उम्र में अक्सर लोगों को हाई बी पी, डायबिटीज, दिल की बीमारी, ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया रोग जैसे गंभीर रोग हो जाते हैं ऐसे में अगर वो सोशल लाइफ में एक्सरसाइज, लाफिंग एक्सरसाइज आदि करते हैं जिससे वो शारीरिक और मानसिक रुप से फिट महसूस कर पायेगें।

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