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सुखद दांपत्य के सूत्र

शादी का बंधन दो अलग-अलग व्यक्तित्व के लोगों को ताउम्र के लिए साथ ले आता है। नवदंपती साथ में एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं। लेकिन उनका दांपत्य जीवन तभी खुशियों से भरा, प्यार के रंग में रंगा रहता है, जब वे कुछ जरूरी सूत्रों को अपने दांपत्य जीवन में महत्व देते हैं।

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विवाह को हमारी भारतीय संस्कृति में एक पवित्र बंधन माना गया है। कहा जाता है कि शादी के सात वचनों के संग पति-पत्नी एकाकार हो जाते हैं। वह दो अलग व्यक्तित्व जरूर होते हैं लेकिन मन से एक हो जाते हैं। सात फेरे, उन्हें ताउम्र के लिए जोड़ देते हैं। सात फेरों, सात वचनों को लेने के बाद भी जीवन भर पति-पत्नी को कुछ जरूरी और व्यावहारिक सूत्रों का भी ध्यान रखना चाहिए, तभी उनका रिश्ता खुशहाल बना रहता है। आप भी अपने वैवाहिक जीवन में इन बातों को अहमियत दीजिए और दांपत्य जीवन की बगिया हमेशा महकाए रखिए।

हमेशा निभाएं साथ

पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार तब गहरा होता है, जब दोनों हर पल एक-दूसरे का साथ निभाते हैं। साथ निभाने का मतलब है कि जीवनसाथी पर जब कोई संकट-मुश्किल आए तो उसका संबल बनें। वह बीमार, असहाय हो तो उसकी देखभाल करें। मुश्किल में उसका साथ न छोड़ें। कोरोना काल में तो अपनों का, जीवनसाथी का संबल पाकर हम निराशा और अवसाद से दूर रहे। इस दौर में ही कई पतियों ने अपनी जीवनसंगिनी के साथ रसोई में सहयोग दिया, प्यारे पल बिताए। वहीं मुश्किल घड़ी में पतियों की परेशानी को पत्नी ने समझकर, सहयोग और संबल दिया। दोनों ने एक-दूसरे का साथ निभाकर इस मुश्किल घड़ी का सामना किया, उसे आसान बनाया। इससे उनके संबंधों में प्रगाढ़ता भी आई। इसी तरह हर मुश्किल समय में पति-पत्नी को एक-दूसरे का साथ निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इससे उनका रिश्ता मधुर और मजबूत होता है।

एक-दूसरे की करें बेहतरी के प्रयास

एक-दूसरे का साथ निभाने के साथ, एक-दूसरे की बेहतरी के लिए प्रयास भी पति-पत्नी को मिलकर करने चाहिए। हमेशा इस बात को याद रखना चाहिए कि विवाह कोई समझौता नहीं, जिसमें स्त्री या पुरुष को अपनी इच्छाओं को दबाकर रहना पड़े। विवाह का मतलब किसी की आजादी पर पाबंदी भी नहीं है। यह तो एक मर्यादित जीवन की तरफ अपने कदम बढ़ाना है। शादी तो एक-दूसरे की काबिलियत, सामर्थ्य को और बेहतर करने का माध्यम है। स्त्री पर जिम्मेदारी है कि वह अपने पति के सपनों को पूरा करने में सहयोग दे, वहीं पुरुष की भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी पत्नी के सपनों को पूरा करने में, उसकी प्रतिभा को निखारने में कोई कसर न छोड़े। ऐसा होने पर पति-पत्नी खुश रहेंगे। उनके मन की यह खुशी रिश्ते को मधुर और मजबूत बनाएगी।

खुश रहने-रखने के लिए जतन

दांपत्य जीवन में एक-दूसरे को सहयोग करना, एक-दूसरे की बेहतरी की कोशिशें जितनी जरूरी हैं, उतनी ही जरूरी पति-पत्नी की खुशी भी है। दो अलग तरह के लोग जब शादी के बंधन में बंधते हैं तो इस आशा से कि वे एक-दूसरे के साथ खुश रहेंगे। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों लेकिन अगर आप एक-दूसरे के साथ खुश रहते हैं तो जीवन में आने वाली मुश्किलों का सामना आसानी से कर सकते हैं। लेकिन एक-दूसरे की खुशी और खुश रखने के प्रयास दोनों को ही करने होंगे। इसके लिए जरूरी है कि खुश रहने की राह में जो बाधाएं हैं, उन्हें समझदारी से दूर करते जाएं।

जीवनसाथी के बनिए दोस्त

कहते हैं कि अगर किसी रिश्ते में दोस्ती भी शामिल हो जाए तो वह रिश्ता और खूबसूरत और मजबूत हो जाता है। दांपत्य जीवन में भी दोस्ती का भाव जरूरी है। दार्शनिक नीत्से ने कहा था, 'प्यार की कमी असफल शादियों की वजह नहीं है बल्कि दोस्ती की कमी असल वजह है।' एक पत्नी तो अपने जीवनसाथी में हमेशा एक अच्छे दोस्त की तलाश करती है। दरअसल, शादी के बाद जीवनसाथी ही स्त्री के जीवन में सबसे अहम हो जाता है। पति भी चाहता है कि उसकी पत्नी, उसके मन की बातों को बिना कहे, जान-समझ ले। लेकिन पति-पत्नी दोस्त तभी बन सकते हैं, जब दोनों एक-दूसरे की बातों को पूरा महत्व दें। अपनी बातें खुलकर कहें। एक-दूसरे से कुछ छिपाएं नहीं ।

दें पूरा समय

दांपत्य जीवन में प्रगाढ़ता तभी आती है, जब इसे संवारने के लिए पूरा समय दिया जाए। अकसर पत्नियों को अपने पति से शिकायत रहती है कि उनके पास तो मेरे लिए वक्त ही नहीं है। वहीं पति भी गृहस्थी की गाड़ी को आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने में इस कदर व्यस्त हो जाते हैं कि दांपत्य जीवन की खुशियों को महसूस करना ही भूल जाते हैं। जबकि एक-दूसरे के लिए समय निकालना, सुख-दुख पूछना, बातें करना संबंध में ताजगी बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। आजकल जब पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तब यह और भी जरूरी है कि एक-दूसरे को पूरा समय दें। तभी वे एक-दूसरे को समझ पाएंगे, खुशियों के पलों को जी पाएंगे।

इन सभी बातों को पति-पत्नी ताउम्र अपने रिश्ते में अहमियत दें, तो उनका दांपत्य जीवन बहुत ही सहज और खुशियों से भरा रहेगा।

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