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जियो जी भर के : जिंदगीं में भरे खुशियों के रंग, ऐसे कहें मन की बात खुलकर

Jiyo ji Bhar ke : आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में हमारे रिश्ते बहुत पीछे छूट जा रहे हैं, हम रिश्तों का निर्वाह उस तरह नहीं कर पा रहे हैं, जैसे किया जाना चाहिए, जबकि रिश्ते का जुड़ाव हमारा संबल होते हैं, हमें जीने की ताकत देते हैं। इसलिए रिश्तों के अपनेपन के अहसास को हमेशा बनाए रखिए और अपनों के साथ ऐसा कुछ न कीजिए कि बाद में अफसोस हो कि हमसे यह भूल कैसे हो गई? इसलिए जिंदगी में रिश्तों को खूबसूरती से जिएं और स्वयं भी खुश रहें।

जियो जी भर के : जिंदगीं में भरे खुशियों के रंग, ऐसे कहें मन की बात खुलकर
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Happy Life Tips with relationship in hindi

Happy Life Tips : वक्त किसी के लिए नहीं रुकता। जिंदगी हर मोड़ पर कुछ नया अपनी झोली में लिए मिलती है। कभी खुशियां तो कभी गम। ऐसे में जिंदगी को इंद्रधनुषी बनाने वाले रंगों को छोड़कर अगर आप भी दौड़ती-भागती जीवनशैली का हिस्सा बन गई हैं या स्मार्ट गैजेट्स की मायावी दुनिया में उलझ गई हैं तो ठहरकर सोचिए। जी हां, रिश्तों में अपनेपन से जुड़ा कितना कुछ सहज-सरल है, जो खुशियां बांटने का जरिया बन सकता है। अपनों के साथ ऐसे जुड़े कई अनमोल पल हैं, जिन्हें जीने के लिए कोई महंगा मोल नहीं चुकाना पड़ता। इस व्यस्त जीवन में कितना कुछ रिसता रहता है, रिश्तों से कि हम जान ही नहीं पाते। कई छोटी-छोटी बातें, जो आप अपनों से कहना चाहती हैं, भूल ही जाती हैं। कई ऐसे प्यारे लम्हे, जो आप अपनों के साथ जीना चाहती हैं, छूट ही जाते हैं। एक समय के बाद ऐसा बीता हुआ कल मन में अपराधबोध लाता है। खुद से ही शिकायत होती है कि समय रहते हम रिश्तों को खूबसूरती से क्यों नहीं जी पाए? हम तो यही कहेंगे कि ऐसे इंसान बनने से बचिए, जिसे बाद में पछतावे के सिवा कुछ हाथ ना आए, सो मन के किसी भी भाव को जीने में देर ना कीजिए।

कहें मन की बातें खुलकर

रिश्तों में दिल से कुछ कहने और सुनने के मायने बहुत गहरे होते हैं। असल में देखा जाए तो ये संवाद ही हर रिश्ते की जान हैं। ऐसे में जरूरी है, जिंदगी कीभागम-भाग में कल यह ना सोचना पड़े कि अपनों से मन की कह पाते तो कितना अच्छा होता। समय रहते अपने मन की बात अपनों से कहें। आभार जताना होया कोई शिकायत करनी हो, कह डालिए। बिना लाग-लपेट के दिल की बात कहना, रिश्तों के लिए संजीवनी का काम करता है।

इस जुड़ाव को और मजबूती देता है।भविष्य में यह पछतावा ना रहे कि कभी मिल-बैठ बतिया लेते तो अच्छा रहता। इसीलिए मन की बात खुलकर कहें और सुनें भी। आपके आस-पास ऐसे कई लोगमिल जाएंगे, जो इसी बात का पछतावा लिए हैं कि उन्होंने अपनों से समय रहते मन के भाव साझा नहीं किए। सोच-विचार में उलझे रहने से बेहतर है कि रिश्तोंमें संवाद के प्यारे-प्यारे रंग भरें।

अपनों की सेहत का रखें ख्याल

अपनों की सेहत की संभाल-देखभाल में देर या चूक हो जाए तो मन अपराधबोध से भर जाता है। कई बार तो यह देरी सदा के लिए एक अफसोस दे जाती है।इसीलिए समय रहते संभलें और अपनों की सेहत संभालें। यह एक बड़ा सच है कि कोई खुद अपने आपकी देखभाल नहीं कर सकता। खासकर तब जब किसीबीमारी से जूझने के हालात हों। ऐसे समय पर रिश्ते-नाते ही काम आते हैं। उनका साथ ही संबल बनता है। इसीलिए ऐसी परिस्थितियों में खुद अपनों के आस-पासरहिए।

जिंदगी की भागम-भाग में किसी अपने को तब इग्नोर करने की गलती ना करें, जब उसको आपकी जरूरत हो। अपनों की हेल्थ की केयर के मामले मेंजरा-सी भी देरी सही नहीं है। कभी-कभी दवा देने या डॉक्टर के मिलने की सलाह देने भर से काम नहीं चलता। आपको समय निकालकर उनके साथ समय बितानाहोगा। बुरे दौर में उनका हौसला बढ़ाना होगा, जब खुद उनकी हिम्मत जवाब देने लगती है। काश, हम समय रहते किसी अपने की सेहत संभाल लेते, इसअपराधबोध से बचें और अपनों की हेल्थ सहेजने में कभी देर ना करें।

मेलजोल बनाए रखें

कभी-कभी बरसों के मनमुटाव के बाद लगता है कि काश, हम आपसी मेल-जोल तो रखते। यकीन मानिए, रिश्तों में आए छोटे-छोटे मन-मुटाव जब बड़े बन जाते हैंतो पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं आता। कई बार करीबी संबंधों में आपसी समझ की कमी के चलते ऐसे हालात आ जाते हैं कि बोलचाल बंद हो जाती है। कईबार गलतफहमियां भी रिश्तों में दरार डाल देती हैं। जो कभी-कभी उम्रभर ना पाटी जा सकने वाली खाई बन जाती है।

ऐसे में रिश्ते सदा के लिए उस मोड़ में चलेजाते हैं, जहां ना तो जुड़ाव बाकी रहता है और ना ही आपसी बातचीत। लेकिन समय के साथ ये दूरियां भी मन में अपराधबोध लाती हैं। अकसर लोगों को बाद मेंअफसोस होता है कि काश, वे आपसी मेलजोल को खत्म न करते।

एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर उलझनों को समय रहते सुलझा लेते तो जिंदगी के सफरमें किसी अपने का हाथ यूं ना छूटता। इसीलिए गलती है तो माफी मांगने में कोई हर्ज नहीं है। साथ ही आप अपनी जगह सही हैं तो किसी अपने को दिल खोलकरगले लगाने में भी देरी ना करें। कभी ना भूलें रिश्ते एक नियामत होते हैं।

अपनों की सराहना करें

रिश्तों में स्नेह ही नहीं, समझ और स्वीकार्यता भी आपसी जुड़ाव को मजबूती देती है। यह जुड़ाव और गहरा हो जाता है, जब अपनों को उनकी खासियत बताईजाए, उनकी सराहना की जाए। आप उनके साथ का मोल समझते हैं, यह उन्हें एक मिठास के साथ बताएं। लेकिन देखने में आता है कि हम अपनों से यह कहनेमें चूक जाते हैं।

मन में उनके प्रति सराहना के भाव रखते हैं लेकिन कहना जरूरी नहीं समझते। यूं ही कई उलझनों में जिंदगी बीत जाती है। अगर आप भी यहगलती करती हैं तो ऐसा ना करें। अपनों को उनके गुण बताएं।

आपके लिए रिश्तों की क्या अहमियत है, यह खुलकर बताएं। अपनी जिंदगी में उनकी भागीदारी कोसराहें। उनके साथ के लिए आभार जताएं। ऐसे सकारात्मक भाव को जीने में कभी देरी ना करें, जो रिश्तों को और मजबूत बनाए।

लेखिका - डॉ. मोनिका शर्मा

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