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Happy Father's Day 2019: फादर्स-डे की कहानी, पिता-पुत्री का प्रेम- पढ़कर छलक जाएंगे आंसू

Happy Fathers Day 2019 Story : पिता दिवस कब है 2019 (When Is Fathers Day 2019) में अगर आपके भी मन में भी यह सवाल है तो आपको बता दें कि 16 जून (16 June) को फादर्स डे 2019 (Father's Day 2019) विश्वभर में मनाया जाएगा। फादर्स डे पर सभी बच्चे अपने पिता को फादर्स डे की शुभकामनाएं (Father's Day Wishes) और गिफ्ट्स (Father's Day Gifts) देकर उन्हें स्पेशल फील करवाते हैं, लेकिन हम आपके लिए लाये हैं लेखिका पूनम बर्त्वाल द्वारा लिखी फादर्स-डे की कहानी 'मेरे प्यारे पापा... (Fathers Day Story)'

Happy Fathers Day 2019: फादर्स-डे की कहानी, पिता-पुत्री का प्रेम- पढ़कर छलक जाएंगे आंसू
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Happy Fathers Day 2019 Story : पिता दिवस कब है 2019 (When Is Fathers Day 2019) में अगर आपके भी मन में भी यह सवाल है तो आपको बता दें कि 16 जून (16 June) को फादर्स डे 2019 (Father's Day 2019) विश्वभर में मनाया जाएगा। फादर्स डे पर सभी बच्चे अपने पिता को फादर्स डे की शुभकामनाएं (Father's Day Wishes) और गिफ्ट्स (Father's Day Gifts) देकर उन्हें स्पेशल फील करवाते हैं, लेकिन हम आपके लिए लाये हैं लेखिका पूनम बर्त्वाल द्वारा लिखी फादर्स-डे की कहानी 'मेरे प्यारे पापा... (Fathers Day Story)' पिता के अहसास, उनकी बातें, सीखें दिलो-दिमाग में हमेशा बसी रहती हैं, जो जीवन की डगर पर सही ढंग से चलना सिखाती हैं और ऐसी राहें बनाती हैं, जो कामयाबी दिलाएं, खुशियां दें। इतना ही नहीं पिता की सीखें रिश्तों को प्रेम के धागे में बंधना भी सिखाती हैं। अपने पिता के जीवन मूल्यों को सहेजे एक बेटी, पत्र के माध्यम से आभार प्रकट कर रही है अपने पिता को...

मेरे प्यारे पापा...

बहुत दिनों से सोच रही थी पापा आपको पत्र लिखूं। फादर्स-डे निकट आया तो लगा यही सही मौका है, आपके लिए दिल में बैठी अपनी भावनाओं को साझा करने का। पापा, शादी के बाद मैं आपसे दूर जरूर हो गई हूं लेकिन आपकी सीखें.. इनसे जुड़े अहसास मुझे थपथपाते रहते हैं। जीवन जीने की कला बताती थीं आपकी बातें, ताकि मैं जीवन-डगर पर कभी डगमगाऊं ना, सही ढंग से आगे बढ़ती जाऊं। आपकी कही छोटी-छोटी बातों में भी बड़ी-बड़ी नसीहतें छुपी होती थीं। यह बात मैं आज महसूस करती हूं। इन नसीहतों पर चलकर मैंने अपना जीवन और परिवार संवारा है। आपने जिस तरह मेरे जीवन को गढ़ा है, उसे दिशा दी है, उसके प्रति आज मैं आपका आभार व्यक्त करना चाहती हूं। पापा, आपका साथ, प्यार मेरे जीवन की सबसे अनमोल पूंजी है। मैं आपके बारे में जितना कहूं, वह कम है। मैंने आपके व्यक्तित्व से बहुत कुछ जाना और सीखा है, वो मेरे जीवन के मंत्र हैं, इनमें मेरी सफलता की राहें छिपी हैं।


आपसे जाना रिश्तों को निभाना : हमारे जीवन में प्रेम-स्नेह, अपनापन तभी बना रहता है, जब हम इसकी कोशिश में होते हैं, यह मैंने आपसे सीखा। मैंने आपसे ही जाना कि तमाम व्यस्तताओं के बाद भी अपनी घरेलू जिम्मेदारियां कैसे निभाई जा सकती हैं, रिश्तों को कैसे सहेजा जा सकता है। मुझे याद है, आप ऑफिस से थके-हारे आते थे, लेकिन आराम करने की बजाय घर के कामों में मां का हाथ बंटाया करते थे। दादी के साथ रात के खाने के बाद खूब बतियाते थे। समय निकालकर मुझसे भी बातें करते थे। मेरे तरह-तरह के अजीबो-गरीब सवालों का जवाब देते थे। मैं पूछती थी-'पापा, हवाई जहाज कैसे उड़ता है, पर्वत इतने ऊंचे-ऊंचे क्यों होते हैं? समुद्र में इतना पानी कहां से आता है? चिड़िया कैसे इतने हल्के पंखों के साथ उड़ती है?' आप मेरे सभी सवालों का जवाब बड़े प्यार से देते थे, मेरी सारी जिज्ञासाओं को शांत करते थे।

आप मजेदार कहानियां भी सुनाया करते थे। आप सिर्फ अपने परिवार तक ही सीमित नहीं थे। आप गांव, आस-पड़ोस से भी जुड़े थे। मुझे याद है, आप समय-समय पर गांव में रह रहे चाचा जी का भी हाल-चाल लेते रहते थे, मुश्किल में उनका संबल भी बनते थे। आस-पड़ोस में जब कोई किसी परेशानी-मुश्किल में होता था तो सबसे पहले आप उसकी मदद को तैयार होते थे। यही वजह रही कि आपसे जुड़ा हर व्यक्ति आपसे बहुत प्रेम करता है, आपका सम्मान करता है। आज मैंने भी आपके व्यक्तित्व के इन गुणों को अपना रखा है और महसूस करती हूं कि मेरे हर रिश्ते में, ढेर सारा प्यार और अपनापन है। रिश्तों को खूबसूरती से निभाना, मुझे आपसे ही विरासत में मिला है। आपसे सीखा धैर्यशीलता का पाठ: पापा, मैं देखती थी कि आपकी हमेशा यह कोशिश रहती थी, परिवार के सदस्यों के जीवन को आप हमेशा खुशियां से भरे रखें, किसी को कोई तकलीफ न रहे।

इसके लिए आप हर संभव प्रयास करते थे। अपनी क्षमता से अधिक जी-तोड़ मेहनत करते थे, जिससे कभी कोई अभाव हमें न देखना पड़े। लेकिन मुश्किल तो हर किसी के जीवन में आती है, हमारे जीवन में भी आई। एक वक्त ऐसा आया, जब कई सारी परेशानियां एकसाथ घर-परिवार और आप पर आ गईं। अचानक आपकी कंपनी को नुकसान हुआ, सैलरी समय पर नहीं मिल रही थी, घर को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। इसी बीच दादी का स्वास्थ्य भी खराब हो गया। लेकिन इतनी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी आपने बहुत ही धैर्य से काम लिया। ऑफिस में पहले की तरह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करते रहे। दादी की सेवा में, इलाज में कोई कमी नहीं आने दी। मुझे और मां को भी किसी प्रकार के अभाव का अहसास नहीं होने दिया। पापा, मुश्किल समय में मैंने आपको कभी विचलित नहीं देखा।


हां, मां जब कभी परेशान होतीं तो आप उन्हें ढांढ़स देते-'सुख-दुख तो जीवन में आने-जाने हैं, इनसे घबराना क्या? इनका सामना हमें हिम्मत से करना चाहिए। यही हमारे जीवन की असल परीक्षा होती है कि हम मुश्किल घड़ी में कैसे खुद को संभालते हैं।' इन बातों से मां का मनोबल बढ़ता था। वह शांत-भाव से आपको पूरा सहयोग देतीं। आपकी बात सच ही साबित हुई, कुछ ही समय बाद सब ठीक हो गया। दादी का स्वास्थ्य अच्छा हो गया, ऑफिस में भी सब कुछ सामान्य हो गया, कंपनी अच्छा बिजनेस करने लगी, सभी को सैलरी समय पर मिलने लगी। आपको तो बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए प्रमोशन भी मिला। बाद में मुझे अहसास हुआ कि यह सब मुमकिन हुआ, आपके कभी न धैर्य खोने की वजह से। आपके इस गुण को मैंने भी अपना जीवन-मंत्र बना लिया। जब कभी मेरे जीवन में मुश्किल घड़ी आती है तो मैं भी धैर्य से काम लेती हूं।

मुश्किलों का सामना डटकर करती हूं। ज्यादा वक्त भी नहीं गुजरता कि मुश्किलें अपने आप खत्म हो जाती हैं। सबक लिया कभी न हारने का : पापा, मैंने आपसे सिर्फ धैर्यशीलता ही नहीं, कभी न हारने का हौसला बनाए रखना भी सीखा। मुझे याद है, जब मैंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में पहली जॉब शुरू की तो सैलरी बहुत कम थी। मैं इस बात से दुखी रहती थी। एक दिन आपने बड़े प्यार से समझाया था,'बेटी, पहले काम सीखो, खुद को सक्षम बनाओ, सार्थक भूमिका में आओ, अपने आप सैलरी अच्छी हो जाएगी। आपकी बात को मैंने समझा। धीरे-धीरे मैं आगे बढ़ती गई।

सैलरी भी एक समय बाद ठीक हो गई। दो-तीन साल प्राइवेट जॉब के बाद मैंने गवर्नमेंट जॉब के लिए कॉम्पिटीटिव एग्जाम देना चाहा तो आपने प्रोत्साहित किया, बोले, 'जहां चाह होती है, राह निकल ही आती है।' मैं दो बार एग्जाम देने के बाद जब सफल नहीं हुई तो बुरी तरह निराश हो गई। आपने एक दिन कंधे पर हाथ रखकर हौसला बढ़ाया, 'बेटी, हारो नहीं, हौसला बनाए रखो, कामयाबी एक दिन जरूर कदम चूमेगी।' ऐसा ही हुआ। मुझे सफलता मिली। पापा, अंत में मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि आपने जिस तरह मेरा जीवन संवारा, मुझे जीवन जीने की कला सिखाई, ढेर सारी खुशियां दीं, उसके लिए शुक्रिया.. बहुत-बहुत शुक्रिया।

-आपकी बिटिया

आप की सीखें मेरे जीवन मूल्य हैं

कहते हैं कि पिता बाहर से कितने ही कठोर लगें लेकिन उनका मन बहुत ही सुकोमल होता है, खासकर बेटियों के लिए। पापा आप तो हमेशा ही मेरे लिए कोमल-हृदय रहे, बाहर से भी और भीतर से भी। समय-समय पर आप मुझे लेकर बहुत भावुक हुए, खासकर तब जब मेरी शादी के दिन पास आने लगे। आप हर दिन मुझसे बैठकर देर-देर तक बातें करते। बात करते-करते आपकी आंखें नम होने लगतीं, किसी तरह आप उन आंसुओं को थाम लेते। उन दिनों जब आप मुझसे बैठकर बात करते तो उन बातों में मेरे भावी वैवाहिक जीवन से जुड़ी जरूरी सलाहें होती थीं कि आगे हमें अपने रिश्ते कैसे निभाने हैं, अपने परिवार में कैसे खुशियां बिखेरनी हैं। विदाई के समय आपने अटूट विश्वास के साथ कहा था,'बेटी, मुझे यकीन है अपनी ससुराल में तुम हर रिश्ते को प्यार और अपनेपन से सहेजकर रखोगी।' पापा आज मेरी शादी को कई साल बीत गए हैं। सच में आपकी सीखें, मेरे जीवन-मूल्य हैं। इन्हीं की बदौलत ससुराल में सभी रिश्ते-नाते प्रेम के धागे में बंधे हैं। हमारे परिवार में खुशियां गुनगुनाती रहती हैं।

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