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Father's Day 2019 Date : फादर्स डे कब है 2019, फादर्स डे पर निबंध- जानें पिता का महत्व

Fathers Day 2019 : फादर्स डे कब है 2019 (Fathers Day Kab Hai 2019) में अगर आपको नहीं पता तो बता दें कि फादर्स डे 2019 (Fathers Day ) में 16 जून को मनाया जाता है। पितृ दिवस हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। गूगल ट्रेंड में पिता दिवस खूब ट्रेंड कर रहा है। ऐसे में लोग पिता दिवस 2019 (Father's Day 2019) को मानाने के लिए गूगल पर फादर्स डे कब आता है (Fathers Day kab ata hai), फादर्स डे पर निबंध (Fathers Day Essay), फादर्स डे पर हिंदी में निबंध (Fathers Day Par Nibandh Hindi), फादर्स डे कब है (Fathers Day Kab Hai), फादर्स डे कब मनाया जाता है (Fathers Day Kab Manaya Jata Hai), मदर्स डे कार्ड (Fathers Day Card), फादर्स डे की शुभकामनाएं (Fathers Day Shubhkamnaye), फादर्स डे स्टेटस हिंदी (Fathers Day Status), फादर्स डे सोंग (Fathers Day Song), फादर्स डे शायरी (Fathers Day Shayari), फादर्स डे के गाने (Fathers Day Ke Gane), फादर्स डे इमेजेज (Fathers Day Images), फादर्स डे विशेस (Fathers Day Wishes) और फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं (Fathers Day Ki Hardik Shubhkamnaye) सर्च कर रहे हैं। लेकिन हम आपके लिए लाये हैं लेखिका नेहा सांकला द्वारा लिखित सबसे बेस्ट फादर्स डे पर निबंध (Fathers Day Nibandh), इस पितृ दिवस पर निबंध को आप स्कूल, कॉलेज या किसी मंच पर पढ़ सकते हैं।

Fathers Day 2019 Date : फादर्स डे कब है 2019, फादर्स डे पर निबंध- जानें पिता का महत्व
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Fathers Day 2019 : फादर्स डे कब है 2019 (Fathers Day Kab Hai 2019) में अगर आपको नहीं पता तो बता दें कि फादर्स डे 2019 (Fathers Day ) में 16 जून को मनाया जाता है। पितृ दिवस हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। गूगल ट्रेंड में पिता दिवस खूब ट्रेंड कर रहा है। ऐसे में लोग पिता दिवस 2019 (Father's Day 2019) को मानाने के लिए गूगल पर फादर्स डे कब आता है (Fathers Day kab ata hai), फादर्स डे पर निबंध (Fathers Day Essay), फादर्स डे पर हिंदी में निबंध (Fathers Day Par Nibandh Hindi), फादर्स डे कब है (Fathers Day Kab Hai), फादर्स डे कब मनाया जाता है (Fathers Day Kab Manaya Jata Hai), मदर्स डे कार्ड (Fathers Day Card), फादर्स डे की शुभकामनाएं (Fathers Day Shubhkamnaye), फादर्स डे स्टेटस हिंदी (Fathers Day Status), फादर्स डे सोंग (Fathers Day Song), फादर्स डे शायरी (Fathers Day Shayari), फादर्स डे के गाने (Fathers Day Ke Gane), फादर्स डे इमेजेज (Fathers Day Images), फादर्स डे विशेस (Fathers Day Wishes) और फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं (Fathers Day Ki Hardik Shubhkamnaye) सर्च कर रहे हैं। लेकिन हम आपके लिए लाये हैं लेखिका नेहा सांकला द्वारा लिखित सबसे बेस्ट फादर्स डे पर निबंध (Fathers Day Nibandh), इस पितृ दिवस पर निबंध को आप स्कूल, कॉलेज या किसी मंच पर पढ़ सकते हैं।

फादर्स डे पर निबंध / Fathers Day Essay In Hindi

आमतौर पर समाज में, साहित्य में या विभिन्न किस्म की संवेदनाओं के बीच यही मान्यता है कि संतान के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका 'मां' की है। इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया में 'मां' की जगह कोई नहीं ले सकता। लेकिन इतना ही बड़ा सच यह भी है कि दुनिया में 'पिता' की भी कोई जगह नहीं ले सकता।

भले मुहावरों में, कविताओं में पिता की भूमिका ने वह जगह न पायी हो, जो जगह मां की भूमिका को हासिल है लेकिन सच्चाई यही है कि जीवन में जितनी जरूरी मां की सीखें हैं, उतनी ही जरूरी पिता की मौन देखरेख है।

भले पिता मां की तरह अपने बच्चों को दूध न पिलाए, उन्हें दुलराए न, उनके साथ बहुत देर तक मान मनौव्वल का खेल न खेले, लेकिन वह भी अपनी संतान से उतना ही प्यार करता है और जीवन में उसकी उतनी ही महत्ता भी है।

Happy Fathers Day 2019 : हैप्पी फादर्स डे 2019


जिन बच्चों के सिर से बचपन में ही पिता का साया उठ जाता है, उन बच्चों में 90 फीसदी से ज्यादा बच्चे अंतर्मुखी हो जाते हैं। ऐसे बच्चे अकसर बहुत आत्मविश्वास के साथ समाज का और अपनी कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते।

दरअसल पिता उनमें दुनिया से टकराने का आत्मविश्वास देता है। मां अगर संयम सिखाती है तो पिता की मौजूदगी बच्चों में प्रतिरोध का जज्बा भरती है। अगर मां नहीं होती तो बच्चे जीवन जीने के तौर तरीके कायदे से नहीं सीख पाते।

अगर पिता नहीं होते तो बच्चे जीवन का सामना ही बमुश्किल कर पाते हैं। मां की देखरेख में पले बच्चों में आत्मविश्वास की कमी तो होती ही है, वे तमाम बार अपनी बात को सार्वजनिक तौरपर व्यवस्थित ढंग से रख तक नहीं पाते।

कहने का मतलब यह है कि जिंदगी में मां और बाप दोनो की ही बराबर की जरूरत होती है। पर अगर गहराई से देखें तो पिता की जरूरत थोड़ी ज्यादा होती है; क्योंकि पिता की बदौलत ही बच्चे दुनिया से दो चार होने, उससे मुकाबला करने की हिम्मत और हिकमत पाते हैं।

Happy Fathers Day 2019 : हैप्पी फादर्स डे 2019


अगर बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ जाता है, तो बच्चों का बचपन खो जाता है। खेलन, कूदने की उम्र में बड़े बूढ़ों की तरह चिंताएं करनी पड़ती हैं, कई बार उन्हीं की तरह घर चलाने के लिए मां का हाथ बंटाना पड़ता है यानी खेलने, कूदने की उम्र में ही नौकरी या चाकरी करनी पड़ती है।

ज्यादातर बार पिता के न रहने पर बच्चों की पढ़ाई या तो आधी अधूरी रह जाती है या जैसे सोचा होता है, वैसी नहीं हो पाती। हां, कई मांएं अपवाद भी होती हैं जो बच्चों को पिता की गैर मौजूदगी का एहसास नहीं होने देतीं।

पिता की मौजूदगी में बच्चों में एक अतिरिक्त किस्म का आत्मविश्वास रहता है। किसी ने बिल्कुल सही कहा है कि पिता भोजन में नमक की तरह होते हैं, खाने में अगर नमक न हो तो खाना कितना ही बढ़िया, कितना ही कीमती क्यों न हो, बेस्वाद लगता है?

Happy Fathers Day 2019 : हैप्पी फादर्स डे 2019


लेकिन जब खाने में नमक की उपयुक्त मात्रा होती है तो कई बार हमें इसका एहसास तक नहीं होता। कई बार हम यह याद ही नहीं कर पाते कि हम जो कुछ खा रहे हैं उसमें नमक का भी कुछ महत्व है। पिता की मौजूदगी भी जीवन ऐसी ही होती है।

जब होते हैं तो कभी यह ख्याल ही नहीं होता कि पिता के महत्व को समझें। मगर जब नहीं होते तो हर पल, हर कदम उनके न होने का दुख उठाना पड़ता है, परेशानी भोगनी पड़ती है। हर संतान को एक न एक दिन अपनी जिंदगी की जिम्मेदारी या अपने जीवन का भार खुद ही उठाना पड़ता है।

मगर जब तक पिता होते हैं, वह भले कुछ न करते हों, संतानें तमाम तरह के दायित्व बोझों से मुक्त रहती हैं। उनमें एक बेफिक्री रहती है। पिता मनोवैज्ञानिक रूप से संतानों की जिम्मेदारी उठाते हैं।

अकसर माना जाता है और किसी हद तक यह सही भी होता है जिन बच्चों की सिर से बचपन में ही पिता का साया उठ जाता है, उनमें एक खास किस्म की आवरगी, एक खास किस्म का बेफिक्रापन और एक खास किस्म की आपराधिक प्रवृत्ति पैदा हो जाती है।

Happy Fathers Day 2019 : हैप्पी फादर्स डे 2019


दरअसल ऐसे बच्चों की समाज के लोग ज्यादा परवाह नहीं करते, उन्हें बहुत प्यार और इज्जत नहीं देते, जिस कारण ऐसे बच्चे भी समाज की परवाह नहीं करते, उसकी ज्यादा इज्जत नहीं करते और धीरे धीरे उनके माथे पर किसी न किसी असामाजिक श्रेणी का ठप्पा लग जाता है।

समृद्धि का एक आयाम मनोविज्ञान भी होता है, जब पिता होते हैं तो बच्चे खासकर लड़के मनोवैज्ञानिक रूप से खुद को जिंदगी के बोझ से लदा-फंदा नहीं पाते। उन्हें लगता है उनकी जिम्मेदारी उठाने के लिए पिता तो अभी मौजूद ही हैं। फिर चाहे भले पिता कुछ भी कर सकने की स्थिति में न हों लेकिन उनका होना ही बेटों के लिए एक बड़ा संबल होता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि माता और पिता दोनो ही संतान के पहले गुरु होते हैं, यह सच भी है। लेकिन माता और पिता अपनी संतान को एक ही पाठ नहीं पढ़ाते, वे दोनो उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए एक ही समय में अलग अलग और महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाते हैं।

मां जहां बच्चों को पारिवारिक मूल्यों, मान मर्यादा, उठने बैठने, बोलने के तौर तरीके सिखाती है, वहीं पिता बच्चों को घर से बाहर जिंदगी से कैसे जूझें, कैसे टकराएं, कैसे उससे गले मिलें इस सबका पाठ पढ़ाते हैं। इसलिए माता पिता दोनो ही बच्चे के सबसे पहले गुरु होते हैं और दोनो ही उन्हें जिंदगी के दो अलग अलग और महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाते हैं।

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