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Daughter's Day 2019 In India : 22 सितंबर को बेटी दिवस, जानें बिटिया दिवस मनाने का महत्व

भारत में बेटी दिवस 2019 में 22 सितंबर को मनाया जाएगा। डॉ. मोनिका शर्मा बेटी दिवस का महत्व बता रही हैं, आज बेटियां परंपरागत सोच से बाहर निकलकर बहुत कुछ करना चाहती हैं। वे ऐसे सपने देखती हैं, जो उनको पहचान ही न दे, उनके परिवार का सिर भी ऊंचा करें। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि परिवार बेटियों को स्नेह-भाव के साथ संबल और मार्गदर्शन दे, जो उनके सुनहरे भविष्य की राह बनाए। हमारी बेटियां कैसे एक स्वस्थ माहौल में उन्नत शिखर पर पहुंचें और आत्मसम्मान की जिंदगी जिएं, बेटी दिवस पर हम इस बारे में गंभीरता से जरूर सोचें।

Daughter

समय के साथ बेटियों की भूमिका और सोच दोनों बदली है। ऐसे में बेटियों को अपनों का साथ-सहयोग मिले, सपनों को पूरा करने की हिम्मत और मार्गदर्शन मिले तो इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है! ये सिर्फ जज्बाती बातें नहीं, आज की जरूरत भी है। ऐसा करना ज्यादा मुश्किल भी नहीं है। बस, हमें एक बंधी-बंधाई सोच से बाहर आकर, बेटियों की नई और सशक्त छवि को दिल से स्वीकारना होगा। इसीलिए बेटियों यानी कि घर की रौनक से ऐसा प्यारा रिश्ता बनाएं, जो उनकी जिंदगी को खुशहाल बनाए, उनके सपनों को पूरा करने का हौसला बढ़ाए।

समय के साथ बदलें

बेटियों के संबंध में वक्त के साथ बदलना रिश्तों को तो मजबूती देता ही है, अपनों की भूमिका में आ रहे बदलावों को भी सामने लाता है। घर के बड़े और रिश्ते-नाते में जुड़े लोगों के लिए बेटियों को लेकर सोच में बदलाव होना जरूरी है, क्योंकि अब बेटियां परंपरागत भूमिकाओं से अलग अपनी नई पहचान बना रही हैं। आज की बेटियां घर के आंगन में अच्छी परवरिश पाकर शादी कर घर बसाने भर तक सीमित नहीं हैं।


आज बेटियों के अपने सपने हैं- अपना भविष्य बनाने, अपने शौक पूरे करने, उच्च शिक्षा पाने या किसी खास क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के। ये सपने अपनों की सोच में बदलाव आए बिना पूरे नहीं हो सकते हैं। समय के साथ अपनों की सोच में बदलाव आए तो बिटिया को समझने में ही नहीं, उसके लिए सहयोगी परिवेश बनाने में भी मददगार होगा। अपनों के व्यवहार में आई यह समझ बेटियों के संघर्ष को आसान कर देती है। उनके आगे बढ़ने की राहें खोलती है, उनकी हिम्मत भी बढ़ाती है।

भरोसा जताएं

अपनी बिटिया का संबल बनने के लिए सबसे अहम है कि आप उस पर भरोसा करें। उसे यह विश्वास दिलाएं कि हर परिस्थिति में आप उसके साथ हैं। उसके सपनों से आपकी भी उम्मीदें जुड़ी हैं। आज के समय में बेटियां खुद अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। ऐसे में परिवार का भरोसा उनकी ताकत बनता है। स्कूल, कॉलेज और दफ्तर हर जगह उनका संबल बनें, इस संबल से वे हर तरह के हालातों से लड़ने लायक बनती हैं।


बेटियों की सुरक्षा का ख्याल पूरा रखें लेकिन पुराने दौर की बेवजह की बंदिशों को उन पर न थोपें। बिटियों को परंपरागत रिवाजों से बांधने के बजाय उन पर विश्वास करें, उनके मन को ठेस पहुंचाने वाले तकलीफदेह सवाल न करें, बल्कि जरूरी समझाइश दें। ताकि उनके आगे बढ़ने में कोई रुकावट न आए और आप भी निश्चिंत रहें। ऐसे स्वस्थ वातावरण में घर के भीतर या बाहर अगर बेटियां किसी शोषण या परेशानी का शिकार होंगी तो अपनी बात खुलकर कह सकेंगी। कई बार परिवार का भरोसा न पाने की स्थिति में बेटियों को कई परेशानियां अकेले ही झेलने को मजबूर होना पड़ता है।

अपनेपन का भाव रखें

हमारे परिवारों में बेटियों के लिए यह भाव अकसर देखने में आता है कि उन्हें तो शादी कर दूसरे घर चले जाना है। इस तरह बेटियों की 'पराया धन' मानने की सोच कहीं न कहीं, आज भी मौजूद है। ऐसी सोच बेटी को अपने ही आंगन में अपनापन महसूस नहीं करने देती। आज के समय में इस सोच से बाहर आना बहुत जरूरी है।


बेटी अपने ही आंगन में अकेली हो जाए, ऐसा न होने दें। बेटियों को नई उड़ाने भरने दें, उनकी सफलता पर गर्व करें। असफलता में साथ दें। बेटी की भावनाओं को गहराई से समझें। उनके विचारों को गंभीरता से लें। यह जुड़ाव और अपनापन बेटियों के लिए जीवन भर की थाती है। अपनेपन की यह सौगात उन्हें आगे बढ़ने का उत्साह, खुलकर जिंदगी जीने की उमंग देती है।

न करें कोई भेदभाव

बिटिया को सशक्त बनाने और इस प्यारे से रिश्ते को मन से निभाने के लिए, घर में किसी भी तरह का भेदभाव न रखें। बेटे-बेटी में खान-पान, पढ़ाई, सलाह-मशविरा या सहयोग करने के किसी भी मोर्चे पर कोई फर्क न करें। इतना ही नहीं, उन्हें घर के बेटे की तरह ही फैसले लेने और आगे बढ़ने का हक भी दें। कई बार छोटी-छोटी बातों में किया गया पक्षपात भी घर की लाडली के मन को पीड़ा दे जाता है। हालांकि इसके पीछे अकसर परिवारजनों की चिंता और बेटी की कुशलता की भावना होती है,


लेकिन यह भावना खुद बिटिया के मन को कमजोर करती है। उसे अकेला और हताश महसूस करवाती है। इसीलिए जरूरी है कि हर घर में बेटियों को बेटों के बराबर समझा जाए। ऐसा होने पर वे न केवल मजबूत सोच वाली नागरिक बनती हैं बल्कि करियर के फ्रंट पर भी पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ती हैं। यूं भी यह उनका इंसानी हक है कि उनके साथ कोई भेदभाव न हो। समानता और स्नेह का यह मेल बेटी के साथ आपके रिश्ते को और सुदृढ़ बनाता है, हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।

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