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को-डिपेंडेंट पैरेंटिंग बच्चे के लिए नहीं ठीक, इन बातों का रखें ध्यान

सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा हमेशा उनकी बात माने, उन पर डिपेंडेंट हो। लेकिन यह डिपेंडेंसी इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि फ्यूचर में बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो। इसके लिए पैरेंट्स को कुछ बातों पर गौर करना चाहिए।

को-डिपेंडेंट पैरेंटिंग बच्चे के लिए नहीं ठीक
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परिवार (प्रतीकात्मक फोटो)

सभी पैरेंट्स की ख्वाहिश होती है कि वे अपने बच्चे को न सिर्फ सबसे ज्यादा प्यार करें बल्कि उसे दुनिया की हर सुख-सुविधा भी दें। अपनी क्षमता के अनुसार पैरेंट्स अपने बच्चों को दुनिया की हर खुशी देते हैं, उनकी हर जरूरत पूरी करते हैं। लेकिन ऐसा करते हुए कई बार बच्चों की अपने पैरेंट्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता हो जाती है। फिर वे अपनी तरफ से कुछ भी करने की कोशिश नहीं करते।

हर काम और हर चीज के लिए पैरेंट्स पर डिपेंड हो जाते हैं। यह कंडीशन शुरू-शुरू में तो अच्छी लगती है, लेकिन एक लेवल के बाद हर पैरेंट्स को बच्चों की खुद पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता परेशान करने लगती है। यहीं से को-डिपेंडेंट पैरेंटिंग के नुकसान दिखने शुरू होते हैं। लेकिन कुछ बातों का ध्यान पैरेंट्स रखें तो अपने बच्चे को प्यार देने, उसकी हर जरूरत पूरी करने के साथ उसे सेल्फ डिपेंडेंट भी बना सकते हैं।

सेल्फ डिसीजन लेना सिखाएं

को-डिपेंडेंट पैरेंटिंग की वजह से बच्चे अपनी फीलिंग्स को इंपॉर्टेंस नहीं देते। वे हर समय अपने पैरेंट्स की फीलिंग की ही फिक्र करते हैं। ऐसे बच्चे कोई भी डिसीजन खुद से नहीं ले पाते, उनके हर डिसीजन में यह आशंका बाधा बनी होती है कि कहीं उनके फैसले से माता-पिता को बुरा न लगे। ऐसे बच्चे अपने पैरेंट्स के लिए भले अच्छे हो सकते हैं, लेकिन अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मां-बाप की फिक्र में खो देते हैं।

इससे उनके बाकी के रिश्तों पर भी असर होता है। ऐसे बच्चे छोटे से छोटा फैसला भी पैरेंट्स से पूछकर लेते हैं, जो कई बार उनकी जिंदगी में सेल्फ कॉन्फिडेंस के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसा न हो, इसके लिए अपने बच्चों को शुरू से प्यार भले कितना ही करें, लेकिन उन्हें पैरेंट्स खुद पर हमेशा डिपेंड न रहने दें। उन्हें इंडिपेंडेंट होकर डिसीजन लेने वाला बनाएं। तभी आपका बच्चा जिंदगी में आगे बढ़ पाएगा, सफल हो पाएगा।

इनका रखें ध्यान

एक्सपर्ट्स का मानना है कि को-डिपेंडेंट पैरेंटिंग न तो बच्चों के विकास के लिए सही है, न ही मां-बाप की भावनात्मक सुरक्षा के लिए। इसके लिए पैरेंट्स को अपने बिहेवियर में चेंज लाने की जरूरत है।

- गलत और अनुचित तरीके से अपने बच्चों के माध्यम से अपनी भावनात्मक, सामाजिक और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने की कोशिश न करें। इससे बच्चों का वास्तविक मानसिक विकास बाधित होता है।

- बच्चे के हर डिसीजन को गलत न ठहराएं। उन्हें अपने डिसीजन पर चलने के लिए बाध्य न करें, ऐसा करना बच्चे के कॉन्फिडेंस के लिए ठीक नहीं है।

-बच्चा अगर कोई डिसीजन आपसे पूछे बिना ले, जो उसके लिए सही है तो खुद को आहत महसूस न करें। उसे इसके लिए एप्रीशिएट करें।

- कई पैरेंट्स को लगता है कि उनके बच्चे ने उनकी बात न मानकर सार्वजनिक तौर पर उन्हें बेइज्जत कर दिया है। इसलिए वो कई बार बच्चों से नाराज हो जाते हैं। ऐसा न करें, इससे बच्चा आपकी बात मान तो लेगा, लेकिन इसमें उसकी खुशी नहीं होगी।

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