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बच्चों को करने दें छोटे-बड़े काम बढ़ेगा कॉन्फिडेंस

अकसर यह देखा जाता है, जब बच्चे पैरेंट्स के साथ काम में हाथ बंटाना चाहते हैं तो उन्हें रोक दिया जाता है। हर बार ऐसी रोक-टोक उनके लिए ठीक नहीं है। उनके मन पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए सावधानी के साथ बच्चों को पूरा सपोर्ट देकर काम करवाना चाहिए। इससे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

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नहीं यह काम तुम नहीं कर सकते।

अरे हटो, तुम्हें नहीं मालूम इसे कैसे करना है?

यह तुम्हारे वश का नहीं है।

ये वो बातें हैं, जो अकसर पैरेंट्स अपने छोटे बच्चों से बोलते हैं। जब वे उनकी देखा-देखी, किसी काम में हाथ बंटाने की कोशिश करते हैं। लेकिन पैरेंट्स की रोक-टोक की यह आदत बच्चे का भला नहीं, नुकसान ही करती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की बातें छोटे बच्चों के आत्मविश्वास को कम करती हैं। दरअसल, बच्चों को लगता है कि वे किसी भी काम को ठीक से नहीं सकते, इस वजह से पैरेंट्स ऐसा करते हैं। ऐसी बातें उसके खुद पर यकीन को, भरोसे को कम करती हैं। ऐसा न हो, इसके लिए पैरेंट्स को कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए, बच्चों को छोटे-बड़े हर काम को करने के लिए मोटिवेट करना चाहिए।

उन्हें अपने अनुभव से सीखने दें

जब पैरेंट्स, बच्चे से कहते हैं कि तुम अपने आप कोई छोटा सा काम भी नहीं कर सकते, तो इसे सुनकर वह बहुत निराश होता है। इस बात से सिर्फ उसका आत्मविश्वास ही कमजोर नहीं होता बल्कि उसके सीखने की प्रक्रिया भी रुक जाती है। जैसे हम सब अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों से तमाम तरह की बातें और चीजें सीखते हैं, वैसे ही बच्चे भी करते हैं। ऐसे में उन्हें छोटे-बड़े सभी काम करने दें। वे एक-दो बार उसे गलत करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे अपने अनुभव से सीख जाएंगे।

गाइडेंस में करवाएं काम

कई बार पैरेंट्स को लगता है कि बच्चा घर का या बाहर का कोई काम अकेला करेगा तो खुद को किसी तरह का नुकसान पहुंचा सकता है। यह चिंता गलत नहीं है। सभी पैरेंट्स को अपने बच्चे की सुरक्षा की चिंता करनी ही चाहिए। लेकिन पैरेंट्स को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अगर हमेशा बच्चों को प्रोटेक्शन ही दिया गया तो वह किसी बात को प्रैक्टिकल तरीके से नहीं सीख पाएंगे। इसलिए बच्चों को घर के तमाम छोटे-मोटे काम करने देना चाहिए। इससे वे शारीरिक तौर पर चुस्त-दुरुस्त रहेंगे। साथ ही इससे उनका दिमाग भी मजबूत और कल्पनाशील बनेगा। हां, जब बच्चा कोई काम कर रहा हो तो उस पर नजर रखें। अगर काम करने में कोई दिक्कत आ रही है तो उसकी मदद करें। लेकिन हर वक्त साए की तरह उसके साथ न रहें। इससे उसका कॉन्फिडेंस कमजोर होगा।

डर को दूर करने दें

अगर पैरेंट्स बच्चे को घर का कोई काम करने देते हैं तो उसके अंदर 'मैं कर सकता हूं' की भावना और भी मजबूत होगी। इसलिए जरूरत इस बात की है कि पैरेंट्स चीजों या घटनाओं को अपनी नजर से नहीं बल्कि बच्चे की नजर से देखें। मनोवैज्ञानिक कहते हैं पैरेंट्स को अपने बच्चों को वे सब काम जरूर करने देना चाहिए, जिससे उन्हें डर लगता हो। अगर पैरेंट्स बच्चों को वे काम नहीं करने देंगे, जिनसे उन्हें डर लगता है तो फिर यह डर पूरी जिंदगी उनके साथ रहेगा। जो चीज या बात डराती है, उसका सामना करने से ही डर दूर होता है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बच्चों को छोटे-बड़े सभी तरह के काम करने देने चाहिए। इससे वे अपने आगे के जीवन में खुद को कमतर नहीं समझेंगे और कॉन्फिडेंस से भरे रहेंगे।

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