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गुजरात में शुरू हुआ रण उत्सव, जानें कैसे पहुंचे, कहां रुकें और सब कुछ

टूरिज्म के लिहाज से गुजरात के कई सागर तटीय इलाके प्रसिद्ध हैं। लेकिन सफेद रेगिस्तान कहे जाने वाले कच्छ के रण क्षेत्र का अपना अलग सौंदर्य है। हर वर्ष नवंबर से फरवरी के बीच यहां रण उत्सव का आयोजन भी किया जाता है। अगर आप नैसर्गिक सौंदर्य के साथ स्थानीय कला-संस्कृति और रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं तो एक बार रण उत्सव में जरूर शामिल होना चाहिए।

गुजरात में शुरू हुआ रण उत्सव, जानें कैसे पहुंचे, कहां रुकें और सब कुछ
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रण के पश्चिमी छोर पर जब सूरज अस्त होने को होता है तो लगता है किसी ने सफेद चादर पर गेरुआ रंग डाल दिया हो, वहीं जब चांद अर्श से अपनी रोशनी बिखेरता है तो देखने वालों के मन में एक अजीब-सी रुमानियत छाने लगती है। गुजरात के कच्छ में स्थित रण यानी नमक के रेगिस्तान में पहुंचकर आपको कुदरत के अद्भूत नजारे दिखेंगे। नजरें जहां तक देख पाएंगी, वहां तक केवल सफेद चादर ही दिखेगी। रण अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है।

शुरू हो चुका है उत्सव

करीब 7500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस सफेद रेगिस्तान में एक तिनका तक उत्पन्न नहीं होता। नमक से भरपूर मिट्टी के अलावा यहां कुछ नहीं है। लेकिन इसकी इसी खासियत को देखने की चाहत लिए बड़ी तादाद में टूरिस्ट यहां ‘रण-उत्सव’ के दिनों में आते हैं।

बीते नवंबर से ‘रण-उत्सव’ शुरू हो चुका है और अभी यह 20 फरवरी तक चलेगा। खास बात यह है कि ‘रण उत्सव’ के लिए गुजरात का पर्यटन विभाग टूर पैकेज ऑफर करता है, जिसमें आवागमन, रहने की व्यवस्था और खाने-पीने का इंतजाम भी शामिल होता है।

रण उत्सव की खासियत

रण उत्सव में देखने को इतना कुछ होता है कि यहां कुछ दिन बिताने के बावजूद आप सब कुछ नहीं देख सकते। यहां से करीब ही स्थित धोरड़ो गांव में आप पारंपरिक घर ‘भुंगा’ देख सकते हैं, जो अपनी विशिष्ट गोलाकार आकृति की वजह से बड़े से बड़ा भूकंप भी झेल जाते हैं।

इस गांव के लोगों ने खास पर्यटकों के देखने के लिए भी कुछ ‘भुंगा’ बना रखे हैं, जिनमें कच्छ के इस क्षेत्र की कला-संस्कृति, इतिहास, हस्तकलाएं, मिट्टी और गोबर को मिलाकर बनने वाले मड-आर्ट जैसे तमाम नमूने देखे जा सकते हैं।

इन घरों को देखने के अलावा यहां के निवासियों के रहन-सहन को करीब से देखा जा सकता है, साथ ही उनके गर्मजोशी भरे सत्कार चाय-छाछ और कच्छी खान-पान का लुत्फ भी इस गांव में उठाया जा सकता है। पशुपालन पर निर्भर इस क्षेत्र के लोगों के लिए ‘रण-उत्सव’ कैसे एक आर्थिक और सामाजिक खुशहाली का अवसर लेकर आता है, यह आप यहां करीब से देख सकते हैं।

रण के अनोखे रंग

नमक का सफेद रेगिस्तान यानी ‘रण’, टेंट सिटी से करीब तीन-चार किलोमीटर दूर है। यहां से करीब दो किलोमीटर कंक्रीट की सड़क है, जिस पर पैदल चल कर आप खुद को रण में पाएंगे। यूं तो इस सफेद रण को किसी भी समय देखा जा सकता है, यह आकर्षक ही लगता है।

लेकिन इसे अलग-अलग समय और माहौल में देखने पर रण के विभिन्न रंगों से वाकिफ हुआ जा सकता है। कुछ लोग यहां तड़के पहुंच जाते हैं ताकि क्षितिज से उगते सूरज को देख सकें, लेकिन ज्यादातर लोग यहां शाम को आते हैं, ताकि पश्चिम में डूबते सूरज की छाया में रण की खूबसूरती निहार सकें।

पूर्णिमा के आस-पास के दिनों में सूरज डूबने के बाद कई लोग यहां चांद को निकलता देखने और उसकी सफेदी में उजले होते रण के सौंदर्य से रूबरू होने के लिए भी डटे रहते हैं। यहां जो खूबसूरत नजारा दिखाई देता है, उसे शब्दों में बयान कर पाना मुमकिन नहीं है। इसे तो बस आंखों और कैमरों में कैद कर सकते हैं।

स्पोर्ट्स एक्टिविटीज

यहां पास ही एक विशाल मैदान है, जिसमें पैरा-सेलिंग और पैरा-मोटरिंग, जिप-लाइन, रॉक-क्लाइंबिंग जैसी ढेरों एडवेंचर स्पोर्ट्स एक्टिवटीज आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा भी यहां ढेरों मनोरंजक गतिविधियां होती हैं।

एक म्यूजियम भी यहां है और एक बहुत बड़ा सेमिनार हॉल भी है। रात में यहां के एक खुले थिएटर में रोजाना होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ भी उठाया जा सकता है और अपने टेंट के सामने कैंप फायर का आनंद भी लिया जा सकता है।

इसके अलावा यहां स्पा, मेडिटेशन, झूले, किड्स जोन, आर्ट-गैलरी, क्लब हाउस जैसी कई सुविधाएं भी मौजूद हैं। बुलेट मोटर साइकिल के इंजन को लगाकर बने वाहन ‘छकड़े’ और ऊंट-गाड़ी की सवारी का आनंद भी ले सकते हैं। रात को टेलीस्कोप से तारों को देखने का इंतजाम भी है।

अन्य पर्यटन स्थल

यहां कार किराए पर लेकर आस-पास के दूसरे पर्यटन स्थल भी देखने जा सकते हैं। यहां से भुज के रास्ते में आईना महल, काला डूंगर, विजय विलास पैलेस भी देखे जा सकते हैं। करीब 90 किलोमीटर दूर बेहद खूबसूरत मांडवी बीच पर भी सैर का लुत्फ उठाया जा सकता है। कुछ टूर पैकेज में इन सारी जगहों पर ले जाने का इंतजाम भी रहता है।

ठहरने के बेहतरीन इंतजाम

रण उत्सव के लिए करीब पांच लाख वर्ग मीटर बनाई जाने वाली टेंट नगरी भारत की सबसे बड़ी टेंट-सिटी है। यहां करीब 400 टेंट हैं जिनमें एयरकंडीशन, हीटर, पंखा, ठंडा-गर्म पानी, बाथरूम-टॉयलेट, पलंग, कालीन और वे तमाम सुविधाएं मौजूद हैं, जो किसी शानदार होटल के कमरे में होती हैं।पूरी टेंट-सिटी में वाई-फाई मुफ्त है।

पूरे इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं साथ ही सुरक्षा गार्ड्स भी चौकसी करते हैं। यहां के विशाल डाइनिंग हॉल में एक साथ सैंकड़ों सैलानी किस्म-किस्म के खान-पान का लुत्फ उठा सकते हैं। करीब ही गेटवे टू रण रिसॉर्ट भी है। इन दोनों ही जगहों की बुकिंग के लिए ट्रैवल एजेंट्स या पर्यटन विभाग की वेबसाइट की मदद ली जा सकती है।

कैसे पहुंचें

यहां का सबसे करीबी एयरपोर्ट भुज में है, जहां से करीब 80 किलोमीटर दूर गुजरात के बन्नी क्षेत्र के आखिरी गांव धोरड़ो से आगे है यह विशाल सफेद रेगिस्तान। जहां हर साल रण-उत्सव आयोजित किया जाता है। लेकिन भुज हवाई मार्ग से कम ही शहरों से जुड़ा हुआ है। अहमदाबाद एयरपोर्ट उतर कर सड़क के रास्ते करीब 410 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन से आना चाहें तो भुज तमाम बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। अगर आप पर्यटन विभाग या प्राइवेट टूर ऑपरेटरों की मदद से आएंगे तो भुज एयरपोर्ट या रेलवे-स्टेशन से रण तक आने-जाने और रास्ते की जगहों को घूमने का इंतजाम भी हो जाएगा।

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