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''Hichki'' में रानी मुखर्जी को थी ''टॉरेट सिंड्रोम'' बीमारी, जानें इसके बारे में सब कुछ

रानी मुखर्जी की ''हिचकी'' बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। टीचर को टॉरेट सिंड्रोम नाम की बीमारी है। जिसके कारण इससे पीड़ित व्यक्ति अजीब हरकतें करता है। ''टॉरेट सिंड्रोम'' बीमारी में शरीर की तंत्र-तंत्रिकाएं सही तरीके से काम नहीं करती हैं।

रानी मुखर्जी की 'हिचकी' बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। फिल्म 'हिचकी' में रानी मुखर्जी एक टीचर के रूप में नजर आ रही हैं। टीचर को टॉरेट सिंड्रोम नाम की बीमारी है। जिसके कारण इससे पीड़ित व्यक्ति अजीब हरकतें करता है। 'टॉरेट सिंड्रोम' बीमारी में शरीर की तंत्र-तंत्रिकाएं सही तरीके से काम नहीं करती हैं।

तंत्र-तंत्रिकाओं के ठीक तरह से काम न करने की वजह से व्यक्ति अजीबो-गरीब हरकते करने लगता है। हरकतों में अचानक आवाजें निकालना, हिचकी लेना, शब्दों को दोहराना, बार-बार सूंघना, पलकें झपकाना, होंठों को हिलाना जैसी दिक्कतें शामिल होती हैं। इसके कारण व्यक्ति को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जानें इस बिमारी के बारे में सब कुछ...

टॉरेट सिंड्रोम क्या है

टॉरेट सिंड्रोम तंत्रिकाओं से जुड़ा हुआ रोग है, जिसमें मांसपेशियों में समय-समय पर अचानक संकुचन या सिकुड़न होती है। यही कारण है कि पीड़ित व्यक्ति के हाव-भाव और शब्द बदल जाते हैं।

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टॉरेट सिंड्रोम के कारण

टॉरेट सिंड्रोम दिमाग में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन के कारण होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दिमाग का यही हिस्सा कोशिकाओं को एक्टिव रखता है, लेकिन अभी तक इसका सही कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। यह बीमारी कई बार जेनेटिक भी होती है। टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति में ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और चीजों को सही तरह से न सीख पाने की आदत देखी जाती है।

टॉरेट सिंड्रोम के लक्षण

टॉरेट सिंड्रोम का उपचार

टॉरेट सिंड्रोम के लिए अब तक कोई इलाज संभव नहीं हो पाया है, लेकिन इसे कई तरीकों से कंट्रोल में किया जा सकता है। टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति का इलाज थेरेपी से किया जाता है। इसमें मांसपेशियों में समय-समय पर होने वाले संकुचन या सिकुड़न को मैनेज करने के साथ-साथ सभी लक्षणों पर काम किया जाता है।

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