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पब्लिक टॉयलेट में जाने से होती है ये गंभीर बीमारियां

स्कूल-कॉलेज, ऑफिस या सफर के दौरान पब्लिक टॉयलेट में जाना मजबूरी होती है।

पब्लिक टॉयलेट में जाने से होती है ये गंभीर बीमारियां
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पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल कौन नहीं करता। ऐसा कोई नहीं है जो पब्लिक टॉयलेट में जाता ही नहीं हो। हम चले तो जाते हैं लेकिन इस बात का ध्यान नहीं रखते कि वहां से कितनी बीमारियों को घर लाते हैं।

लेकिन स्कूल-कॉलेज, ऑफिस या सफर के दौरान पब्लिक टॉयलेट में जाना मजबूरी होती है। यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन्स(UTIs) तो एक बात है, लेकिन साथ ही गंदी टॉयलेट सीट पर बैठने से आपको हर्पीस(Herpes ) या क्लैमाइडिया( Chlamydia ) जैसे यौन रोगों के होने का का डर भी रहता है।
हेल्थसाइट के अनुसार, पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हुए झिझकती हैं क्योंकि महिलाओं को वैजाइनल और मूत्रमार्ग क्षेत्र या यूरेथ्रल एरिया (urethral area) टॉयलेट सीट के सीधे सम्पर्क में आते हैं। लेकिन अब तक, हम में से अधिकांश गीली सीट या फर्श के साथ बाथरुम का इस्तेमाल करना सीख गए हैं। सावधानियां बरतते हैं, जिससे इन्फेक्शन से बचा जा सके।

एक्सपर्ट और यूरो- ओन्कोलॉजिकल रोबोट सर्जन डॉ. अनूप रमानी से बात की जिन्होंने हमने कुछ चौंकानेवाली बातें बताई कि यह सब दिमाग की उपज है। “इतने सालों की प्रैक्टिस में मेरे ध्यान में एक बात आयी है, कि मैंने कभी किसी को पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करने की वजह से यूटीआई के सम्पर्क में आने की बात नहीं सुनी।

डॉक्टर कहते हैं, “ अगर टॉयलेट में सही बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको किसी प्रकार की यूटीआई का खतरा नहीं है। साफ-सफाई सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डीजिजेस?

डॉ. रमानी ने बताया, “सेक्सुअली ट्रांसमिटेट बीमारियां फैलानेवाले दाद या हर्पिस (herpes) और क्लैमिडिया(Chlamydia) जैसे सूक्ष्मजीव काफी कमजोर होते हैं।

हालांकि सार्वजनिक शौचालयों से यूटीआई और एसटीडी का खतरा बहुत कम है लेकिन ज़्यादातर समय ये गंदे ही रहते हैं। इसीलिए हमेशा सैनिटाइज़र और टिश्यू पेपर अपने साथ रखें, ताकि आप गीली टॉयलेट सीट पर को पोंछ सकें।

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