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अगर पीरियड्स में नहीं चाहती हैं कोई प्रॉब्लम, तो रखें इन बातों का ख्याल

पीरियड्स के दौरान अगर स्वच्छता का ख्याल न रखा जाए, तो कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे भविष्य में गंभीर रोग भी हो सकते हैं।

अगर पीरियड्स में नहीं चाहती हैं कोई प्रॉब्लम, तो रखें इन बातों का ख्याल

पीरियड्स के दौरान अगर स्वच्छता का ख्याल न रखा जाए, तो कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे भविष्य में गंभीर रोग भी हो सकते हैं।

ऐसे में हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट के अलावा कुछ और बातों का ख्याल भी रखना जरूरी है। पीरियड्स के दौरान आपको किसी तरह की प्रॉब्लम न फेस करनी पड़े। इस बारे में गायनेकोलॉजिस्ट-आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. श्वेता गुप्ता कुछ उपयोगी सलाह दे रही हैं।

मासिक धर्म यानी पीरियड्स की शुरुआत सामान्यत: किशोरियों में 12-13 वर्ष की आयु में होती है। हर माह पांच दिन, रक्तस्राव होता है। यह चक्र एक स्त्री के रजोनिवृत यानी मेनोपॉज (लगभग 45-46 वर्ष की उम्र) तक चलता है।

मासिक धर्म में 21 वर्ष के बाद का समय फर्टिलिटी प्रेग्नेंसी के लिए होता है। 35 वर्ष के बाद शरीर के हार्मोंस में बदलाव आने लगते हैं। शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस के चक्र का मासिक धर्म की प्रक्रिया से संबंध होता है।

ऐसे में जब भी मासिक चक्र से जुड़ी कोई समस्या हो तो बगैर लापरवाही बरते स्त्री रोग विशेषज्ञ से कंसल्ट और जरूरत पड़ने पर इलाज कराना चाहिए।

साथ ही पीरियड्स के दौरान लड़कियों, युवतियों और महिलाओं को सैनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, इससे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

संक्रमण से होता है बचाव

पीरियड्स के दौरान सैनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल से कई तरह के संक्रमण से बचा जा सकता है। लेकिन आज भी देश में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं ही सैनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं।

दूर-दराज के पिछड़े इलाकों और गांवों में रहने वाली बहुत सी महिलाएं टाट, कपड़े, पॉलीथीन, लकड़ी के बुरादे या राख का इस्तेमाल करती हैं। इस वजह से कई बार लड़कियों और महिलाओं को वैजाइना (योनि) के संक्रमण, मूत्रनली के संक्रमण होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

इस कारण आगे चलकर गर्भाशय का संक्रमण भी हो सकता है। इससे पीआईडी और बच्चेदानी की नली के अंदरूनी भाग को भी क्षति पहुंचती है। इसकी वजह से आगे चलकर बांझपन तक की समस्या हो सकती है। पीरियड्स के दौरान गंदे कपड़े और अन्य किसी माध्यम से होने वाले संक्रमण से प्रेगनेंसी में भी परेशानी हो सकती है।

यह भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी-ब्रेस्ट कैंसर समेत इन 5 चीजों का फर्स्ट पीरियड से है संबंध, जानें कैसे

बरतें पूरी सावधानी

अमूमन सैनेटरी पैड्स महंगे होते हैं, ऐसे में बहुत सी महिलाएं सूती कपड़े, रूई का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय काफी सावधानी की जरूरत होती है, जिससे संक्रमण के खतरे से बचा जा सके।

कपड़ा साफ, सूखा और अवशोषक होना चाहिए, जो ब्लीडिंग को सोख सके। कपड़े को इस्तेमाल करने के बाद इसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखने से भी बेहद गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। हैपेटाइटिस बी, सी और टीबी जैसी घातक डिजीज भी इनमें शामिल हैं।

लाइफस्टाइल-डाइट हो सही

  • वास्तव में पीरियड्स महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य नैसर्गिक प्रक्रिया है, जो एक खास उम्र के दौरान शारीरिक बदलाव और हार्मोंस के प्रभाव से शुरू होता है।
  • इसमें कुछ भी असहज नहीं है, इसलिए मासिक धर्म के दौरान सामान्य दिनचर्या ही होनी चाहिए। लेकिन डाइट का ध्यान रखना चाहिए।
  • हेल्दी-न्यूट्रीशस डाइट से पीरियड्स के दौरान किसी तरह की समस्या नहीं आती है।
  • आयरन, कैल्शियम युक्त डाइट का सेवन अधिक करना चाहिए। दरअसल, ब्लीडिंग की वजह से शरीर को आयरन की बहुत जरूरत होती है।
  • फाइबर युक्त फ्रूट्स, वेलीटेबल्स और ड्राई फ्रूट्स अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।
  • खूब पानी भी पीना चाहिए। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लम नहीं होती है।
  • चाय, तला हुआ, डिब्बा बंद चिप्स, बिस्कुट के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस दौरान हल्के व्यायाम भी करने चाहिए। इससे पीरियड्स के दौरान होने वाली छोटी-छोटी समस्याएं भी दूर हो सकती हैं।

रखें ध्यान

  • पीरियड्स के दौरान स्वच्छता विशेष तौर पर ध्यान रखने का मुद्दा है।
  • साफ-सफाई और नैपकिन के इस्तेमाल से संक्रामक बीमारियों से बचा सकता है।
  • वरना इनफर्टिलिटी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इस मामले में किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
  • किसी भी तरह की समस्या होने पर, जैसे कम या अधिक ब्लीडिंग या इररेग्युलर पीरियड्स होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

कर सकती हैं हर तरह के काम

पीरियड्स के दौरान कुछ ग्रामीण इलाकों और दकियानूसी सोच रखने वाले परिवारों में आज भी महिलाओं को घरेलू कार्य करने से रोका जाता है। उन्हें उपेक्षित भी किया जाता है।

इसका कोई वैज्ञानिक या मेडिकल आधार नहीं है। इस दौरान भी महिलाएं सभी तरह के कार्य करने में सक्षम होती हैं। पुराने दौर में महिलाओं को इस दौरान आराम देने की मानसिकता की वजह से घर के कामों से दूर रखा जाता था।

दरअसल, पहले इतनी साफ-सफाई की व्यवस्था ना होने के कारण किसी भी तरह के खतरे को टालने के उद्देश्य से महिलाओं, लड़कियों को कम कार्य करने दिया जाता था।

लेकिन अब बदलती जीवनशैली के अनुसार लड़कियां एक्टिव हैं और अपने सभी काम करती हैं। इसलिए व्यावहारिक तौर पर महिलाओं या लड़कियों को किसी भी तरह से अपने काम-काज से दूर रहने की जरूरत नहीं है।

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