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अब भूलने की बीमारी जाइए भूल, वैज्ञानिकों ने निकाला नया तोड़

यह रोग चूहों के साथ-साथ इंसानों में भी पाया जाता है।

अब भूलने की बीमारी जाइए भूल, वैज्ञानिकों ने निकाला नया तोड़
लंदन. वैज्ञानिकों ने दर्द रिलीवर मेफेनैमिक एसिड नाम की दवाई पर शोध किया है। यह एसिट आमतौर पर पीरियड्स के दर्द को कम करने के लिए दिया जाता है। वैज्ञानिकों ने अपने नए शोध में पाया है कि यह एसिट अब अल्जाइमर रोग से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होगा। दरअसल, यह रोग चूहों के साथ-साथ इंसानों में भी पाया जाता है। अल्जाइमर एक भूलने की बीमारी है। शोधकर्ताओं इस रोग से निपटने के लिए तोड़ निकाल लिया है।
sciencealert के मुताबिक शोध के दौरान जिन चूहों में अल्जाइमर के लक्षण थे उन पर मेफेनैमिक एसिड से एक महीने तक इलाज किया गया। जिसके बाद चूहों की खोई हुई याददाश्त और दिमाग में आए सूजन को पूरी तरह से खत्म करने में सफल रहे। अब वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर इंसान इस बीमारी से ग्रस्त है तो हमारे पास उसके रोकथाम के लिए एक सफल इलाज है।
यह शोध ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में किया गया है। शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि मेफेनैमिक एसिड न केवल पीरियड्स के दर्द को कम करने में मदद करता है कि बल्कि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो अल्जाइमर और मस्तिष्क में आने वाले सूजन को खत्म करने में मदद करता है।
प्रमुख शोधकर्ता डेविड ब्रो ने बताया कि चूहों पर किया गया हमारा यह टेस्ट पूरी तरह से सफल रहा है। मस्तिष्क में आए सूजन को अल्जाइमर और भी गंभीर बना देता है। हालांकि, अभी इस पर और काम करने की जरूरत है। फिर भी अभी तक हम कह सकते हैं कि हमारा यह शोध इंसानों को इस बीमारी से बचाने के लिए सफल है। माउस मॉडल (चूहों पर किया जाने वाला टेस्ट) टेस्ट हमेशा सही साबित नहीं होते हैं। मेफेनैमिक एसिड पहली दवां है जो ब्रेन सेल डेमेज को ठीक करने में मददगार है।
फिलहाल यह परिक्षण चूहों की लैब पर किया गया है। इसलिए इस बात का दावा नहीं किया जा सकता है कि जो परिणाम जानवरों पर किये गए टेस्ट में पाए गए हैं वो मनुष्य पर भी टेस्ट के बाद पाए जाएं। ज्यादातर परीक्षण चूहों पर किए जाते हैं, क्योंकि मनुष्य और चूहों के जेनेटिक 97.5 फीसदी तक एक समान होते हैं।
इन सब के बावजूद शोधकर्ताओं का मानना है कि मानव अल्जाइमर के रोगी के लिए मेफेनैमिक एसिड सफल रहेगा। खुशी की बात यह है कि ये दवाई मनुष्य के लिए सुरक्षित है। दुनियाभर में इस से पीड़ित 4 करोड़ 40 लाख लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगी। आने वाले समय में वैज्ञानिकों की यह खोज किसी वरदान से कम नहीं साबित होगी।
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