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अलग-अलग शहरों में कहां और किन नामों से मशहूर है ये पानीपूरी, जानिए

पानी पुरी का एक और दूसरा नाम पताशी, जो ज्यादातर राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बोला जाता है।

अलग-अलग शहरों में कहां और किन नामों से मशहूर है ये पानीपूरी, जानिए

नई दिल्ली. पानीपूरी का स्वाद इंडियन्स के बीच ही नहीं, विदेशों में भी मशहूर है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और नेपाल तक में पानीपूरी के स्वाद को लोग जानते और पसंद करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे शहर बदलते हैं वैसे-वैसे इनका स्वाद भी बदलता जाता है। मुंबई में इसे मटर के पेस्ट और इमली की मीठी चटनी के साथ सर्व किया जाता है, वहां मध्य प्रदेश के पानीपुरी में आलू और पानी में बूंदी का इस्तेमाल किया जाता है।

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गुजरात में जहां पानीपुरी के अंदर छोटे कटे आलू और उबली हुई मूंग की फीलिंग की जाती है जिसे खजूर की मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है तो वहीं बंगलौर में पानीपुरी के अंदर छोटे-छोटे प्याज का मिक्सचर भरा जाता है। करारे और चटपटे पानीपूरी के जायके को बढ़ाने का काम करता है वो है इसका पानी। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार पानीपूरी, गोलगप्पे, पुचके या फिर पताशे इनका स्वाद लगभग सभी को भाता है तो जानते हैं अलग-अलग शहरों में कहां और किन नामों से मशहूर है ये चीज....

पुचका
इसका पुचका नाम पश्चिम बंगाल और असम में मशहूर है। यहां तक कि बांग्लादेश में भी इसे इसी नाम से जाना जाता है। पुचका, फीलिंग और स्वाद में पानी पुरी से काफी हद तक अलग है। इसमें उबले गर्म और मैश किए हुए आलू का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी चटनी खट्टी-मीठी और पानी मसालेदार होता है। पुचका, पानी-पुरी से ज्यादा बड़ा और क्रिस्पी होता है। बिहार और झारखंड में भी पुचका स्नैक्स के तौर पर खाया जाता है।
गोलगप्पे
नार्थ इंडिया में इसे गोलगप्पे के नाम से जाना जाता है। सिर्फ हरियाणा को छोड़कर पूरे नॉर्थ इंडिया में गोलगप्पे के स्वाद से शायद ही कोई अंजान होगा। लगभग हर गली और मुहल्ले में गोलगप्पे के स्टॉल्स मिल जाएंगे। मुंबई में वडा पाव जितने ही मशहूर हैं गोलगप्पे। जिनमें आलू और काबुली चने की मैश की हुई फीलिंग होती है जिसे चटनी और खटे-मीठे पानी के साथ खाया जाता है। पानी को स्वादानुसार स्पाइसी बनाया जा सकता है। दिल्ली के नाथू स्वीट्स और बंगाली मार्केट में बहुत ही स्वादिष्ट गोलगप्पे खाए जा सकते हैं।
पकौड़ी
पकौडे नाम से कम्फ्यूज न हों। दरअसल ये हैं पानीपूरी ही, बस गुजरात के कुछ इलाकों में इसे पकौड़ी नाम से जाना जाता है। इसका स्वाद और इसकी तैयारी पानीपुरी जैसी ही होती है। कुछ जगहों पर इसकी गार्निशिंग सेव(बेसन के लच्छे) के साथ की जाती है। साथ ही इसमें मीठी चटनी और कच्चे प्याज भी रहता है। इसे खाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली पानी में पुदीना और हरी मिर्च का स्वाद मिलता है। सुनकर ही मुंह में पानी भर जाता है।
पानी के बताशे
हरियाणा में मिलने वाले पानी के पताशों का स्वाद गोलगप्पे जैसा ही होता है। उबले आलू की फिलिंग के साथ तीखा-चटपटा पानी इसके स्वाद को बेहतर बनाता है। कई जगहों पर स्वाद को बढ़ाने के लिए इसमें दही और इमली की मीठी चटनी मिलाते हैं।

पताशी
पानी पुरी का एक और दूसरा नाम पताशी, जो ज्यादातर राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बोला जाता है। आटे और सूजी से बनने वाली इन पताशी में भी उबले आलू-मटर की फीलिंग होती है लेकिन पानी का स्वाद अलग होता है। यहां इन पताशी का स्वाद आप पुदीने, जीरे, कई तरह के मसालों, हींग और बूंदी वाले पानी के साथ चख सकते हैं। बड़े-बड़े जार में अलग-अलग तरह के पानी को भरकर रखा जाता है। ये इतने चटपटे होते हैं कि पताशी खाने के बाद लोग अलग से इन्हें पीना पसंद करते हैं।
गुपचुप
ये नाम जरा हट के है। उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, हैदराबाद और तेलंगाना राज्यों में इसे गुप-चुप के नाम से जाना जाता है। गुपचुप में उबले आलू-मटर और काबुली चनों को भरा जाता है। खाने में इसका चटपटा स्वाद मूड को रिफ्रेश कर देता है। इन गुपचुप में आप स्वाद के अनुसार प्याज मिला सकते हैं।
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