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सफलता का मंत्र: सफलता पाने के लिए बनें आशावादी, रहें बीमारियों से दूर

जीवन में वही व्‍यक्ति कामयाब होता है जो आशावादी दृष्टिकोण रखता है।

सफलता का मंत्र: सफलता पाने के लिए बनें आशावादी, रहें बीमारियों से दूर
नई दिल्‍ली. आप आशावादी हैं और निराशावादी बातों को इग्‍नोर करते हैं तो आप एक सुखी जीवन जी सकते हैं। माना जाता है कि अगर आप आशावादी हैं तो दुनिया की हर मुश्किल को आसानी से फेस कर सकते हैं। वहीं निराशावादी अनुकूल परिस्थतियां होने पर भी हमेशा असफल ही रहते हैं। लोग अक्‍सर निराशावदी बातों को गांठ की तरह जहन में बसा लेते हैं और उसी में घुटते रहते हैं। न जाने क्यों इन दिनों मन बहुत परेशान है।' यह विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि तमाम लोगों का है। इन लोगों को थोड़ा सा कुरेदने पर बड़ी आसानी से इस तरह के शब्द आप सुन सकते हैं। जैसे 'काम में जी नहीं लगता, बात-बात में गुस्सा आता है।
हर समय चिड़चिड़ाहट घेरे रहती है। मन में घाव-सा हो गया है।' ऊपरी तौर पर ऐसे लोग यदा-कदा ठहाके भी लगा लेते हैं, पर उनके अंतर्मन में क्रोध का ज्वालामुखी दहकता-धधकता रहता है। विख्यात मनोचिकित्सक मौरिस फ्रेडमैन उपयुक्त लक्षणों का ब्योरा देते हुए कहते हैं कि यदि ऐसा है तो परखिए, जरूर कहीं मन की किसी निचली परत में कोई गांठ पड़ गई है। भले ही यह बात सतही तौर पर समझ में न आए, परंतु ये सारी परेशानियां होती इसी कारण से हैं। यही गांठ जब-तब कसकती है, चुभती है, टीसती, दुखती है, आक्रोश दिलाती है और रुलाती भी है।
मन की गहरी परतों के विश्लेषक जेडी फ्रैंक ने इस विषय पर काफी ज्यादा शोध-अनुसंधान किए हैं। उन्होंने अपने अनुसंधान-निष्कर्षो का ब्योरा 'हिडेन माइंड ए फॉरगॉटन चैप्टर ऑफ अवर लाइफ' नामक पुस्तक में प्रकाशित किया है। इस पुस्तक में प्रकाशित विवरण के अनुसार मन में ऐसी गांठ प्राय: किसी के उस कटु व्यवहार के कारण पड़ जाती है, जिसे हम भूल नहीं पाते। किसी के द्वारा की गई अवहेलना, उपेक्षा, तिरस्कार, अपमान के क्षण हमारे मन में गांठ बनकर पड़े रहते हैं। इससे निकलने का एक ही बेहतर तरीका है कि आप आशावादी बनें और उन बातों को अनसुना कर दें जो आपको तकलीफ देती हैं।
नीचे की स्‍लाइड्स में जानिए, आशावादी बनें, रोगों से दूर रहें-
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