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क्या Omicron से बचा सकता है बूस्टर डोज, जानें एक्सपर्ट्स की राय

बूस्टर डोज को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम फैले हुए हैं, जिन्हें एक्सपर्ट की राय के आधार पर दूर करना बेहद आवश्यक है।

क्या Omicron से बचा सकता है बूस्टर डोज, जानें एक्सपर्ट्स की राय
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क्या Omicron से बचा सकता है बूस्टर डोज, जानें एक्सपर्ट्स की राय

हाल ही में 15 से 18 वर्ष की आयु के टीनएजर्स के वैक्सीनेशन की घोषणा की गई। साथ ही हेल्थकेयर वर्कर्स और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों (उनके संबंधित डॉक्टर की सलाह के अनुसार) के लिए भी वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने की घोषणा हुई। जैसा हम देख रहे हैं कि इन दिनों देश-दुनिया में कोरोना के नए वेरिएंट ऑमिक्रोन का इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है। ऐसे में तमाम अन्य प्रयासों-सावधानियों के साथ ही टीनएजर्स का वैक्सीनेशन और बीमार-बुजुर्गों, हेल्थवर्कर्स को प्रिकॉशनरी या बूस्टर डोज लगवाने की घोषणाओं का निश्चित ही विशेष महत्व है। लेकिन बूस्टर डोज को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम फैले हुए हैं, जिन्हें एक्सपर्ट की राय के आधार पर दूर करना बेहद आवश्यक है। इस बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल, दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन, डॉ. गौरव जैन बहुत जरूरी बातें बता रहे हैं।

क्या है बूस्टर डोज (What is Booster Dose)

बूस्टर डोज के बारे में सबसे बड़ी जिज्ञासा लोगों के मन में इस बात की देखी जा रही है कि अगर व्यक्ति ने पहले से कोविड वैक्सीन के दोनों डोज लगवा रखे हैं तो इस बूस्टर डोज की क्या आवश्यकता है? अध्ययनों के मुताबिक इस बूस्टर डोज को कोरोना के नए वैरिएंट ऑमिक्रोन के संदर्भ में काफी असरदार पाया गया है। आज के दौर में हेल्थकेयर वर्कर्स संक्रमण से देश के लोगों का बचाव सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात मरीजों के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में संक्रमण के संपर्क में आने की उनकी अधिक संभावना है। इससे बचाव के लिए बूस्टर डोज जरूरी है। इसका दूसरा पहलू यह भी समझा जा सकता है कि अधिकतर हेल्थकेयर वर्कर्स को कोविड वैक्सीन बीते जनवरी के आस-पास लगी थी, यानी तकरीबन एक साल हो चुका है, इस अवधि में बहुत मुमकिन है कि इनमें से बहुत से लोगों की इम्यूनिटी कम हो गई होगी। लेकिन जिन्होंने हाल ही में कोविड वैक्सीन लगवाई है, उनके लिए यह जरूरी नहीं है क्योंकि कोविड वैक्सीन के दोनों डोज और बूस्टर डोज के बीच कम से कम 9 से 11 महीने का अंतराल होना चाहिए, क्योंकि इससे पहले लेने से बूस्टर का अतिरिक्त फायदा नहीं पहुंच पाता।

बीमार बुजुर्गों के लिए भी जरूरी: हेल्थकेयर वर्कर्स के अलावा बीमार बुजुर्गों को भी बूस्टर डोज दी जाएगी। दरअसल, यह देखा गया है कि कोविड का संक्रमण पहले से गंभीर बीमारियों से जूझने वाले बुजुर्ग लोगों के लिए तुलनात्मक रूप से अतिरिक्त गंभीरता ला सकता है। ऐसे में उनकी संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बूस्टर डोज को लेकर क्या है भ्रम

बूस्टर डोज के संदर्भ में एक भ्रम यह भी है कि इसकी घोषणा सभी के लिए एक साथ क्यों नहीं की गई? एक्सपर्ट्स के अनुसार बूस्टर डोज को, वैक्सीन के दो डोज लगने के 9 से 11 महीने बाद लगाया जाता है। इसलिए सबसे पहले हेल्थ केयर वर्कर्स और बीमार बुजुर्गों को ही इसे लगवाने को कहा गया है।

15 से 18 वर्षीय टीनएजर्स के लिए: जहां तक 15 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के टीनएजर्स के लिए वैक्सीन की बात है तो यह वो समूह है, जो स्कूल और कॉलेज जाने के लिए घरों से बाहर जाता है। ऐसे में घरों से बाहर निकलने की आवश्यकता इन्हें भी नियमित रूप से हो सकती है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए उन्हें वैक्सीनेट करने की पहल की जा रही है। संभावना है कि धीरे-धीरे उम्र की सीमा और कम की जाएगी, ताकि सभी लोग वायरस के संक्रमण से बचे रहें।

ना बरतें लापरवाही: निश्चित ही बूस्टर डोज और टीनएजर (15-18 वर्ष) बच्चों के वैक्सीनेशन की घोषणा सरकार की अच्छी पहल है। लेकिन इसके साथ ही संक्रमण के खतरे को देखते हुए सभी लोग कोविड संबंधित नियमों का पालन करते रहें और सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार वैक्सीन और बूस्टर डोज लगवाएं। पूरी सावधानी बरतें और संक्रमण का कोई लक्षण दिखने पर उसको नजरंदाज ना करें। महामारी का दौर अभी टला नहीं है लेकिन हर कदम सावधानी बरतकर अपना बचाव सुनिश्चित कर सकते हैं। इसके साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और जीवन के प्रति सकारात्मक रुख अपनाएं।

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