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हर बात पर चिंता करना सही नहीं

कुछ लोग दिन-रात, छोटी-बड़ी बातों को लेकर चिंता में घिरे रहते हैं। ऐसा करने से आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा, साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ेगा। चिंता करने के बजाय उसकी वजह जानकर उसका समाधान निकालने का प्रयास करने में ही समझदारी है।

हर बात पर चिंता करना सही नहीं
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चिंता करना हम सबके नेचर में शामिल होता है। लेकिन कुछ लोग हर वक्त उदास और गंभीर मुद्रा में किसी चिंता में ही डूबे नजर आते हैं। कुछ महिलाएं भी छोटी-बड़ी बातों पर बहुत चिंता करती हैं। डॉक्टर्स के अनुसार इतनी चिंता करना हेल्थ के लिए हार्मफुल होता है। मनोविज्ञानियों का मानना है कि चिंता करने से प्रोडक्टिविटी और एनर्जी लेवल पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में आपको ही यह तय करना चाहिए कि कौन-सी बात पर चिंता करनी जरूरी है और किन बातों को बिल्कुल भी अहमियम नहीं देनी है।

समझें चिंता की वजह

कई अध्ययनों से पता चला है कि हमारी 40 फीसदी चिंताएं ऐसी आशंकाओं से जुड़ी होती हैं, जो कभी सच नहीं होती हैं। 30 फीसदी चिंताएं, उन चीजों या स्थितियों से संबंधित होती हैं, जिन्हें हम चाहकर भी नहीं बदल सकते। 12 फीसदी चिंताएं हेल्थ और 10 फीसदी छोटी-मोटी बातों से जुड़ी हुई होती हैं। सिर्फ 8 फीसदी चिंताएं ऐसी होती हैं, जो वास्तविक और जरूरी कही जा सकती हैं। जाहिर है कि हमारी 92 फीसदी चिंता व्यर्थ और बेकार की बातों के लिए होती हैं। ऐसे में इनसे दूरी बनाने में ही समझदारी है।

चिंता की बजाय चिंतन करें

आपको यह जानकर शायद ताज्जुब होगा कि 7 शहरों को 100 फीट की ऊंचाई से घेरने वाले घने कुहासे में कुल नमी की मात्रा मात्र इतनी होती है, जो एक गिलास पानी में समा जाए। कहने का मतलब यह है कि अगर हम अपनी समस्याओं को सही नजरिए और सही तरीके से देखें तो वह इतनी बड़ी कभी नहीं दिखेगी, जितना हम उनके बारे में सोचते हैं। इसलिए समस्याओं के बारे में सिर्फ चिंता नहीं बल्कि उनके हर पहलू के बारे में चिंतन करें, इससे आपको उन चिंताओं का समाधान करने का तरीका भी समझ में आएगा।

ऐसे हल होंगी समस्याएं

सुरक्षित भविष्य : अकसर लोग अपनी रिटायर्ड लाइफ यानी बुढ़ापे में फाइनेंस की समस्याओं के बारे में सोचकर चिंता करते हैं। इस दिशा में कुछ सार्थक कदम उठाकर आप अपनी चिंताओं को कम कर सकती हैं। प्रॉपर्टी लेकर उसे भविष्य में बेचने, फ्लैट या दुकान लेकर किराए पर लगाने और फिक्स इनकम सुनिश्चित करने के लिए बैंक में फिक्स डिपॉजिट, सोने-चांदी में निवेश और एनएससी जैसे सरकारी बचत पत्रों में निवेश करके समाधान की कोशिश की जा सकती है।

सेहत : रेग्युलर हेल्थ चेकअप और शुरू से ही सही खान-पान की आदत आपको बुढ़ापे में स्वस्थ रहने में मददगार होगी। अगर आप सेहत की चिंता खूब करती हैं और रोज तेल-मसालेदार कचौड़ी-समोसे, फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक का सेवन करते हैं तो चिंता करने से कोई फायदा नहीं। इसके बदले सेहतमंद भोजन, फल सब्जियों का सेवन करें और रेग्युलर एक्सरसाइज करें, तभी आपकी चिंता का सही मायने में समाधान हो सकेगा।

करियर : इन दिनों हर कोई अपने कारोबार या करियर को लेकर चिंता में है। बहुत सारे लोगों का कारोबार, नौकरी कोविड-19 की वजह से प्रभावित हुआ है। लेकिन सिर्फ चिंता करने से कुछ नहीं होगा। आपको अपने इर्द-गिर्द नजर दौड़ाकर वर्तमान समयानुसार इनकम के कुछ और जरिए तलाशने होंगे। पार्ट टाइम या फुल टाइम जॉब के विकल्प खोजें, नया रिटेनरशिप वर्क करना होगा या फ्रीलांसिंग में कोशिश करनी होगी। इससे आपकी इनकम बढ़ेगी और आपकी पैसों की चिंता दूर होगी।

बिल्कुल बेफिक्र न हो जाएं

व्यवहार विशेषज्ञों, समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन बताते हैं कि थोड़ी चिंता हमारे लिए जरूरी है। यह हमें ना सिर्फ बेपरवाह होने से रोकती है बल्कि अच्छी प्लानिंग बनाने के लिए भी मोटिवेट करती है। समस्याओं के पूर्व आकलन और उनसे निपटने की तैयारी भी हम चिंता की वजह से ही कर पाते हैं। संतुलित मात्रा में की गई चिंता हमें डिप्रेशन जैसी गहरी मानसिक समस्या में घिरने से भी बचाती है। लेकिन ज्यादा चिंता सिर्फ पैनिक अटैक और एंग्जायटी का सबब बन सकती है।

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