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इन वजहों से ''दुनिया के सात अजूबे'' में शामिल हुई हैं ये इमारतें

''दुनिया के सात अजूबे'' हमेशा से हम इनके बारे में सुनते आए हैं। दुनिया के सात अजूबे में शामिल इमारतों के पीछे अलग-अलग कहानियां हैं। इसमें दुनिया के अलग-अलग देश के शहर की इमारतों को उनकी खास वजह के लिए शामिल किया गया है।

इन वजहों से दुनिया के सात अजूबे में शामिल हुई हैं ये इमारतें
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Seven Wonders of World

'दुनिया के सात अजूबे' हमेशा से हम इनके बारे में सुनते आए हैं। दुनिया के सात अजूबे में शामिल इमारतों के पीछे अलग-अलग कहानियां हैं। इसमें दुनिया के अलग-अलग देश के शहर की इमारतों को उनकी खास वजह के लिए शामिल किया गया है।

कई लोगों को पता होगा कि दुनिया के सात अजूबे में किन-किन चीजों का नाम शामिल हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम होगा कि इन्हें अजूबों में किस वजह से शामिल किया गया है।

अपनी इस रिपोर्ट के जरिए हम यही बताने जा रहे हैं कि किन इमारतों या जगहों में क्या चीजें खास थी, जिनकी वजह से उन्हें अजूबा कहा गया है। जानिए दुनिया के सात अजूबे और उनके अजूबे बनने का कारण-

ताजमहल

ताजमहल भारत के आगरा शहर में स्थित है। इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने, अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। बेपनाह मोहब्बत की निशानी बताने वाला ताजमहल करीब 20 सालों में बनकर तैयार हुआ। यह शिल्पकला का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। यही कारण है कि यह सात अजूबों में पहले स्थान पर है।

चिचेन इट्जा

चिचेन इट्जा या चिचेन इत्जा मेक्सिको में स्थित है। इस शहर को माया सभ्यता के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक माना जाता है। यहां कुकुल्कन के पिरामिड को अजूबे के रूप में शामिल किया गया है। बता दें कि कुकुल्कन का पिरामिड है 79 फीट ऊंचा है। इसके चारों दिशाओं में 91 सीढ़ियां हैं। इसके अलावा इसकी हर सीढ़ी साल के एक दिन का प्रतीक है और पिरामिड के ऊपर बना चबूतरा साल के 365वें दिन का प्रतीक है। यही कारण है कि सात अजूबों में इसे दूसरे नंबर पर रखा गया है।

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क्राइस्ट द रिडीमर

'क्राइस्ट द रिडीमर' जीसस क्राइस्ट की मूर्ति का नाम है। यह मूर्ति ब्राजील के रियो डी जेनेरो में कार्कोवैडो पर्वत की चोटी पर स्थित है। यह करीब 32 मीटर ऊंची है और इस मूर्ति का वजन 700 टन है। अपने इन्हीं क्वालिटी के कारण इसे सात अजूबों में से तीसरे स्थान पर रखा गया है।

कोलोसियम

कोलोसियम एक विशाल स्टेडियम है। 70वीं सदी में सम्राट वेस्पेसियन ने इसका निर्माण शुरू करवाया था। इस स्टेडियम के लिए ऐसा कहा जाता है कि यहां 50 हजार लोग, जंगली जानवरों और गुलामों के बीच खूनी लड़ाई का खेल देखते थे। स्टेडियम की वास्तुकला इस कदर बनाई गई है, जिसकी नकल करना असंभव नहीं है और यही कारण है कि यह सात अजूबों में से चौथे स्थान पर है।

चीन की दीवार

चीन की दीवार भी सात अजूबों में शामिल है। चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गई यह दीवार दुनिया की सबसे लंबी दीवार है, जो मानव निर्मित है। यह दीवार करीब 6500 किलोमीटर लंबी है और इसकी ऊंचाई 35 फीट है। दुनिया की सबसे लंबी दीवार चीन को सुरक्षा देती है। यही कारण है कि दुनिया के सात अजूबों में इसे पांचवें स्थान पर रखा गया है।

माचू पिच्चू

माचू पिच्चू नाम का एक शहर है, जो काफी ऊंचाई पर बसा है। दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में जमीन से 2430 फीट ऊंचाई पर यह शहर बसा है। इसे 15वीं शताब्दी में बसाया गया था। एंडीज पर्वतों के बीच बसा यह शहर इंका सभ्यता का प्रतीक है और इसी कारण से यह दुनिया के सात अजूबों में छठें स्थान पर है।

पेत्रा

पेत्रा एक ऐतिहासिक शहर है, जो पश्चिमी एशिया के जॉर्डन में स्थित है। यह शहर लाल बलुआ पत्थरों से बनी इमारतों के लिए बहुत फेमस है। यहां मौजूद इमारतों में 138 फुट ऊंचा मंदिर, ओपन स्टेडियम, नहर तालाब आदि खास इमारतें शामिल हैं। इन इमारतों की दीवारों पर बेहद खास और खूबसूरत नक्काशी हुई है, जिसके कारण इसे सात दुनिया के सात अजूबों में आखिरी स्थान पर जगह मिल पाई।

प्राचीन दुनिया के सात अजूबे

  • गीजा के पिरामिड
  • बेबीलोन के झूलते बाग
  • ओलम्पिया में जियस की मू्र्ति
  • अर्टेमिस का मंदिर
  • माउसोलस का मकबरा
  • रोडेस कि विशालमूर्ति
  • ऐलेक्जेन्ड्रिया का रोशनीघर

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