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समलैंगिक रिश्तों से जुड़ी ये झूठी बातें सच मानते हैं लोग

समलैंगिक रिश्तों से संबंधित कुछ बातें रिसर्त में गलत साबित हुई है।

समलैंगिक रिश्तों से जुड़ी ये झूठी बातें सच मानते हैं लोग
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नई दिल्ली. आमतौर पर समलैंगिक रिश्तों को लेकर कई तरह के तर्क-वितर्क दिए जाते हैं और लोगों द्वारा कई तरह की घिसी पिटी बातें सुनने को मिलती है। हममें से अधिकतर लोगों ने सामान लिंग वाले रिलेशनशिप को लेकर न जाने कितनी ही बेवजह की बातें सुनी हैं, लेकिन आपको बता दें कि इनके रिश्तों से संबंधित यह फालतू बातें गलत साबित हुई है यानि इनके लिए लोगों की जो भी धारणाएं थी वह वाजिफ नहीं है। तो चलिए आपको बताएं समलैंगिक रिश्तों से जुड़ी पांच गलत धारणाओं के बारे में...
समलैंगिक रिलेशन में भी होते हैं 'पुरुष' और 'महिला'
लोगों का मानना है कि समान लिंग वाले रिश्तों में एक पुरूष और एक महिला होना के किरदार निभाना चाहिए। लेकिन इस तरह की पुरानी मानसिकता को बर्ट-जे ग्रीन नामक एक शोधकर्ता ने गलत साबित कर दिया है उन्होने 2008 में एक शोध किया जिसमें कहा गया कि जो समलैंगिक होते हैं वह पक्षपातहीन होते हैं।
बच्चों को गोद लेने में आती है दिक्कतें
लोगों की धारणाओं की वजह से समान रिश्तों की संतानो पर बुरा असर पड़ सकता है। दरअसल लोगों की गलत सोच की वजह से ही समलैंगिक जोड़ा आज के समय में बी बच्चों को गोद लेने में असमर्थ है। इन्हे बच्चे गोद लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि कुछ लोगों की सोच होती है कि ये कपल जिस भी बच्चे को गोद लेगा वह भी समलैंगिक ही बन जाएंगे। लेकिन इस तरह की बेतरतीब बातें रिसर्च में गलत साबित हुई है। रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि समलैंगिक कपल के बच्चे बेहद खुशमिजाज होते हैं।
नहीं पड़ता बच्चों पर बुरा असर
लोगों का मानना है कि समलैंगिक कपल के बच्चों को समाज में सिर्फ परेशानियों का ही सामना करना पड़ता है, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है कि सिर्फ इनके बच्चों को ही संघर्ष करना होता है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इसके अलावा समाज के अन्य बच्चों को भी मेहनत और जोखिम उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं रिसर्च में यह बात सामने आई है कि समलैंगिकता के कारण उनके बच्चों को हानि नहीं होती है।
समलैंगिक रिलेशन लंबे समय तक नहीं चलते
समलैंगिक पुरुषों को व्यवहार से स्वतंत्र माना जाता है। इसका मतलब ये है कि पुरूष बार-बार अपना साथी बदलते रहते हैं। लेकिन ऐसे कई समलैंगिक रिश्ते होते हैं जो काफी समय तक टिके रहते हैं। दरअसल, समान लिंग वाले रिलेशन में ऐसा कुछ नही होता जो एक दूसरे से दूरी बना दे। वैसे रिसर्च में इस बात को बताया गया है कि आज के समय में जिस तरह से समलैंगिक अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं उससे यह साफ होता है कि इस तरह का मिथक जल्द ही मिट जाएगा।
समलैंगिक रिश्तों का आधार सिर्फ शारीरिक संबंध होता है
समान लिंग वाले रिलेशन के लिए लोगों की यह सोच काफी पुरानी है कि समलैंगिक रिश्तों का आधार सिर्फ शारीरिक संबंध है। जिस तरह से बाकी रिश्ते एक दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं ठीक उसी तरह ही समलैंगिक रिश्ते भी एक दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं।
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